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नागपुर शहर के मानकापुर में चोरों का बेखौफ आतंक: एक हफ्ते में शराब दुकानों में तीन बड़ी चोरियां, लाखों की नकदी और शराब साफ

नागपुर शहर के मानकापुर में चोरों का बेखौफ आतंक: एक हफ्ते में शराब दुकानों में तीन बड़ी चोरियां, लाखों की नकदी और शराब साफ
Mankapur Wine Shop Theft: मानकापुर में शराब दुकानों में लगातार चोरी, पुलिस मौन

Mankapur Wine Shop Theft: नागपुर के मानकापुर चौक में पिछले एक हफ्ते से चोरों का आतंक कायम है। तीन अलग-अलग शराब दुकानों में लाखों रुपये की नकदी और शराब की चोरी हुई। चोर रात 2 बजे के बाद सक्रिय होते हैं। CCTV में कैद होने के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही।

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Asfi Shadab
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मानकापुर में लगातार हो रही चोरियों से दुकानदारों में दहशत

नागपुर शहर के व्यस्त इलाके मानकापुर चौक पर पिछले एक हफ्ते से चोरों का खुला खेल जारी है। यह इलाका जो दिन भर रौनक से भरा रहता है, रात के अंधेरे में चोरों की गतिविधियों का अड्डा बन गया है। खास बात यह है कि चोरों ने शराब की दुकानों को अपना निशाना बनाया है। एक हफ्ते के भीतर तीन अलग-अलग वाइन शॉप में चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया है। हर बार चोर लाखों रुपये की नकदी और शराब की बोतलें लेकर फरार हो जाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सभी घटनाएं CCTV कैमरे में कैद हैं, लेकिन पुलिस अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है।

रात 2 बजे के बाद सक्रिय होता है चोरों का गिरोह

स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, चोरों का यह गिरोह रात 2 बजे के बाद सक्रिय होता है। जब पूरा इलाका सुनसान हो जाता है और सड़कों पर आवाजाही बंद हो जाती है, तभी ये चोर अपनी वारदात को अंजाम देते हैं। दुकानों के शटर तोड़कर या ताले खोलकर ये अंदर घुस जाते हैं। पहले नकदी को निशाना बनाया जाता है और फिर शराब की महंगी बोतलों को उठाकर ले जाया जाता है। दुकानदारों का कहना है कि चोर बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें दुकानों की पूरी जानकारी पहले से ही होती है।

नूपुर वाइन शॉप मालिक का बयान

नूपुर वाइन शॉप के मालिक ने मीडिया से बात करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों वाइन शॉप में चोरी एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग दिनों में हुई है। लेकिन सभी चोरियां एक ही हफ्ते के भीतर हुई हैं, जिससे साफ है कि एक ही गिरोह इन सभी वारदातों को अंजाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान से लगभग 2 लाख रुपये की नकदी और करीब 1 लाख रुपये की शराब चोरी हो गई। इसी तरह अन्य दो दुकानों से भी बड़ी मात्रा में नकदी और शराब गायब हो गई है। कुल मिलाकर तीनों चोरियों में 5 से 6 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

CCTV में कैद हैं चोर, फिर भी पुलिस क्यों चुप

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि तीनों दुकानों में लगे CCTV कैमरों में चोरों की तस्वीरें साफ तौर पर कैद हैं। चोरों के चेहरे, उनके कपड़े और उनके काम करने का तरीका सब कुछ वीडियो में दिख रहा है। दुकानदारों ने ये CCTV फुटेज पुलिस को भी सौंप दी है। लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। ना ही कोई ठोस कार्रवाई की खबर सामने आई है। इससे दुकानदारों में गुस्सा और निराशा का माहौल है। वे सवाल कर रहे हैं कि जब सबूत मौजूद हैं तो फिर पुलिस चुप क्यों बैठी है। क्या यह लापरवाही है या फिर कोई और मामला है।

दुकानदारों में डर और असुरक्षा की भावना

लगातार हो रही इन चोरियों से मानकापुर इलाके के दुकानदारों में डर का माहौल बन गया है। खासकर शराब की दुकान चलाने वाले व्यवसायी रात में अपनी दुकानों को लेकर चिंतित हैं। कई दुकानदारों ने अतिरिक्त सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। कुछ ने निजी सुरक्षा गार्ड लगाए हैं तो कुछ ने अपनी दुकानों में अधिक मजबूत ताले और शटर लगवाए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर छोटे दुकानदार के लिए इतनी सुरक्षा व्यवस्था संभव है। और क्या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह इलाके में गश्त बढ़ाए और चोरों को पकड़े।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोग और दुकानदार पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब CCTV फुटेज मौजूद है, जब चोरों के चेहरे साफ दिख रहे हैं, तो फिर गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। क्या पुलिस के पास तकनीक की कमी है या फिर इच्छाशक्ति की। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि पुलिस और चोरों के बीच कोई सांठगांठ हो सकती है। हालांकि यह सिर्फ अफवाह है, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता ऐसे सवालों को जन्म दे रही है। दुकानदारों ने पुलिस थाने में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

क्या है चोरों की रणनीति

जानकारों के मुताबिक, ऐसे गिरोह अक्सर पहले से ही रेकी करते हैं। वे दुकानों की खुलने-बंद होने का समय, वहां की सुरक्षा व्यवस्था, CCTV की स्थिति और आसपास की पुलिस गश्त का समय जान लेते हैं। फिर सबसे सुरक्षित समय देखकर वारदात को अंजाम देते हैं। मानकापुर में भी ऐसा ही हुआ प्रतीत होता है। चोरों को पता था कि रात 2 बजे के बाद इलाका एकदम सुनसान हो जाता है और पुलिस की गश्त भी कम हो जाती है। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने एक हफ्ते में तीन वारदातें कर दीं।

दुकानदारों की मांग: सख्त कार्रवाई हो

मानकापुर के दुकानदारों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द चोरों को पकड़ा जाए और उन पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इलाके में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। दुकानदारों ने यह भी कहा कि रात में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने मांग की है कि CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस तुरंत चोरों की पहचान करे और गिरफ्तारी करे। साथ ही चोरी का सामान और नकदी भी बरामद की जाए।

समाज में बढ़ता अपराध और कानून व्यवस्था

यह घटना सिर्फ मानकापुर तक सीमित नहीं है। यह पूरे समाज में बढ़ते अपराध और कमजोर होती कानून व्यवस्था की तस्वीर पेश करती है। जब अपराधी खुलेआम वारदात को अंजाम दे रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी हो, तो आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है। यह जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन जागे और अपनी जिम्मेदारी समझे। नहीं तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी और समाज में अराजकता फैलेगी। मानकापुर की घटना एक चेतावनी है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।