वित्त एवं योजना राज्यमंत्री एडवोकेट आशीष जयसवाल ने इस अवसर पर कहा कि यह योजना राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की दूरदर्शिता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि खेत सड़कों की उपलब्धता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है और किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है। बारहमासी खेत सड़कें न केवल यातायात का साधन हैं, बल्कि किसानों की आर्थिक प्रगति का आधार भी हैं।
योजना का महत्व और उद्देश्य
राज्यमंत्री जयसवाल ने जोर देकर कहा कि समय पर बाजार तक पहुंचने वाला कृषि उत्पाद ही किसानों को उचित मूल्य दिला सकता है। बारिश के मौसम में कच्ची पगडंडियां किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाती हैं। इस योजना के तहत पक्की सड़कें बनाने से किसानों को हर मौसम में अपनी उपज ढोने में सुविधा होगी। यह योजना राज्य के प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू की जानी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी
कार्यशाला में विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी, जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनी तथा राज्यभर के नोडल अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए रणनीति तैयार की।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खारगे ने कार्यशाला में अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए। हर क्षेत्र की जमीन, मिट्टी और जलवायु अलग होती है, इसलिए निर्माण में इन बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।

कार्यशाला का उद्देश्य
विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने बताया कि यह कार्यशाला योजना की स्पष्ट जानकारी देने और बिना किसी संदेह के क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को योजना की हर बारीकी समझना जरूरी है ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके।

शासन निर्णय की जानकारी
जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर ने 14 दिसंबर 2025 को जारी शासन निर्णय की सरल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना से राज्य के लाखों किसानों को फायदा होगा।
ग्रामीण विकास में योगदान
यह योजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास की दिशा में एक व्यापक पहल है। अच्छी सड़कों से न केवल कृषि उपज की ढुलाई आसान होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सड़क निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने से स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के लिए आर्थिक लाभ
पक्की सड़कें होने से किसानों की उपज बाजार तक पहुंचने में समय की बचत होगी और परिवहन खर्च भी कम होगा। सब्जी, फल और दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।
तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था
कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना और गुणवत्ता मानकों का पालन करना जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समयबद्ध क्रियान्वयन की जरूरत
योजना की सफलता के लिए समयबद्ध तरीके से काम करना जरूरी है। कार्यशाला में सभी जिलों के नोडल अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में योजना को पूरा करने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी और समीक्षा की जाएगी ताकि किसी प्रकार की देरी न हो।
पारदर्शिता और जवाबदेही
योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। डिजिटल माध्यमों से योजना की प्रगति की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाएगी। शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान हो सके।
भविष्य की योजनाएं
राज्य सरकार का उद्देश्य आने वाले समय में हर खेत तक पक्की सड़क पहुंचाना है। इससे किसान सशक्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। यह योजना महाराष्ट्र को कृषि के क्षेत्र में और आगे ले जाने में मदद करेगी।
यह कार्यशाला योजना के सफल क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। सभी हितधारकों के सहयोग से यह योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।