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नागपुर में टोल प्लाज़ा पर ट्रक से 522 किलो गांजा बरामद, ओडिशा से एमपी जा रहा था

नागपुर में टोल प्लाज़ा पर ट्रक से 522 किलो गांजा बरामद, ओडिशा से एमपी जा रहा था
Nagpur Ganja Seizure: नागपुर टोल प्लाज़ा पर ट्रक से 522 किलो गांजा बरामद, 2.61 करोड़ का माल जब्त (File Photo)

नागपुर के साओनेर स्थित भगिमहारी टोल प्लाज़ा पर 11 जनवरी 2026 को एमपी नंबर के ट्रक से 522 किलो गांजा बरामद किया गया। कूलर, पंखे और कंबल के नीचे छिपाए गए माल की कीमत 2.61 करोड़ रुपये आंकी गई। गांजा ओडिशा से मध्य प्रदेश जा रहा था। एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है।

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Asfi Shadab
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नागपुर के साओनेर इलाके में स्थित भगिमहारी टोल प्लाज़ा पर एक बड़ी कार्रवाई में 11 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश नंबर के एक ट्रक से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया है। यह मामला राज्य के अंदर नशीले पदार्थों की तस्करी के बढ़ते मामलों पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

टोल प्लाज़ा पर रोका गया संदिग्ध ट्रक

दिनांक 11 जनवरी को दोपहर के समय एमपी 04 जीबी 3859 नंबर का एक ट्रक भगिमहारी टोल प्लाज़ा पर नियमित जाँच के लिए रोका गया। ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को वाहन के चालक और सहचालक के व्यवहार से शक हुआ। जब ट्रक के कागजात और परमिट की जाँच की गई तो कुछ विसंगतियाँ सामने आईं। इसके बाद अधिकारियों ने एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत गाड़ी की तलाशी लेने का फैसला किया।

सामान के नीचे छिपाया गया गांजा

तलाशी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ट्रक में विभिन्न प्रकार के रोजमर्रा के सामान जैसे कूलर, पंखे, कंबल, जैकेट और अन्य घरेलू चीजें भरी हुई थीं। लेकिन जब इन सामानों को हटाकर गहराई से जाँच की गई तो नीचे की तरफ बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियों में पैक किया हुआ गांजा मिला। यह देखकर साफ हो गया कि तस्करों ने बेहद सोच-समझकर इस तरह का इंतजाम किया था ताकि आसानी से पकड़ में न आए।

522 किलो से ज्यादा गांजा बरामद

जब अधिकारियों ने पूरे वाहन की सूची तैयार की और बरामद गांजे को तौला तो कुल वजन 522.138 किलोग्राम निकला। यह एक बहुत बड़ी मात्रा है और इससे साफ होता है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं बल्कि एक संगठित तस्करी का हिस्सा है। अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे माल की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 2 करोड़ 61 लाख रुपये के आसपास है। अगर यह माल बाजार में पहुँच जाता तो इससे हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो सकती थी।

ओडिशा से एमपी तक का रूट

प्रारंभिक पूछताछ और जाँच में यह बात सामने आई है कि यह गांजा ओडिशा राज्य से लाया जा रहा था और इसे मध्य प्रदेश तक पहुँचाना था। ओडिशा के कुछ इलाके गांजे की खेती और उसकी तस्करी के लिए जाने जाते हैं। वहाँ से यह माल अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता है। इस मामले में भी यही रूट अपनाया गया था। नागपुर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच एक प्रमुख मार्ग पर है इसलिए यहाँ से गुजरना तस्करों के लिए सुविधाजनक होता है।

एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई

यह पूरा मामला नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट यानी एनडीपीएस अधिनियम 1985 के अंतर्गत आता है। इस कानून के तहत किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का उत्पादन, बिक्री, खरीद, परिवहन या भंडारण करना गंभीर अपराध है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कानून के तहत सजा बहुत कठोर होती है और लंबी जेल की सजा के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

तस्करी के तरीकों में लगातार बदलाव

पिछले कुछ सालों में नशीले पदार्थों की तस्करी के तरीकों में काफी बदलाव देखने को मिला है। पहले तस्कर खुले तौर पर या साधारण तरीकों से माल ले जाते थे लेकिन अब वे बेहद चालाकी से काम करते हैं। इस मामले में भी रोजमर्रा के सामान के बीच गांजा छिपाना एक सोची-समझी चाल थी। इससे यह पता चलता है कि तस्करी के नेटवर्क काफी संगठित और प्रशिक्षित हो गए हैं।

टोल प्लाज़ा पर सतर्कता जरूरी

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि टोल प्लाज़ा और चेक पोस्ट पर सतर्क रहना कितना जरूरी है। अगर ड्यूटी पर तैनात अधिकारी सतर्क नहीं होते तो यह बड़ा माल आसानी से निकल जाता। नागपुर जैसे इलाकों में जहाँ राज्यों के बीच आवाजाही अधिक होती है वहाँ ऐसी जाँच और भी जरूरी हो जाती है।

आगे की जाँच जारी

फिलहाल इस मामले में संबंधित एजेंसियों द्वारा आगे की जाँच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वे पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यह जानना जरूरी है कि यह माल किसने भेजा, कौन लोग इस धंधे में शामिल हैं और इसे कहाँ तक पहुँचाना था। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह की और भी खेप पहले भेजी गई थीं या यह पहली बार था।

नशे के खिलाफ सख्ती जरूरी

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। नशीले पदार्थों की तस्करी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ा खतरा भी है। खासकर युवा वर्ग इसकी चपेट में आसानी से आ जाता है। सरकार और पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि तस्करों में डर बना रहे।

जनता की भूमिका भी अहम

इस तरह के अपराधों को रोकने में आम जनता की भूमिका भी बेहद अहम है। अगर किसी को किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हो तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। सामूहिक प्रयास से ही समाज को नशे की बुराई से बचाया जा सकता है।

नागपुर में यह पकड़ एक सफलता है लेकिन यह लड़ाई लंबी है। जब तक हर स्तर पर सतर्कता और सख्ती नहीं होगी तब तक ऐसे मामले होते रहेंगे।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।