ग्रंथोत्सव में पढ़ने की संस्कृति पर जोर
Nagpur Granthostav Reading Culture AI Era: नागपुर, 6 मार्च। वसंतराव नाईक शासकीय कला एवं समाज विज्ञान संस्थान, नागपुर में दो दिवसीय ‘नागपुर ग्रंथोत्सव-2025’ का आयोजन किया गया। उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग, ग्रंथालय संचालनालय मुंबई और संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत पुस्तक पूजन और ग्रंथ दिंडी से हुई।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संध्या पवार ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का साधन नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाली शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में नई पीढ़ी का रुझान मोबाइल की ओर बढ़ा है, फिर भी सच्चे अर्थों में व्यक्तित्व निर्माण की शक्ति पुस्तकों में ही निहित है। उन्होंने पुस्तकालयों के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ग्रंथोत्सव आयोजित किए जाने पर जोर दिया।

एआई के दौर में भी जरूरी है पुस्तकों से जुड़ाव
“पढ़ोगे तो बढ़ोगे” — इस संदेश के साथ डॉ. पवार ने पुस्तक प्रेम के माध्यम से ज्ञान परंपरा को जीवित रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. गणेश मुळे, डॉ. गजानन कोठेकर और डॉ. मनोहर कुंभारे ने भी पुस्तकालयों और पुस्तकों के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि लेखक, प्रकाशक और पाठक — इन तीनों की भूमिका पठन संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।


ग्रंथोत्सव में विभिन्न पुस्तकों के स्टॉल लगाए गए तथा वाचन संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
शनिवार को ‘एआई के दौर में पठन संस्कृति की वर्तमान स्थिति’ विषय पर विशेष परिसंवाद आयोजित होगा, जिसमें डॉ. अरुंधती वैद्य, शफी पठाण, विजय सावंत और प्रसेनजीत गायकवाड अपने विचार व्यक्त करेंगे।

रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र