नागपुर जिले में राजस्व और ग्राम विकास से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए जो विशेष अभियान चलाया गया, वह न केवल सफल रहा बल्कि यह दिखाता है कि जब प्रशासन जमीनी स्तर पर नागरिकों से सीधा संवाद करता है, तो कितनी तेजी से काम हो सकता है। 8 से 13 जनवरी के बीच चले इस छह दिवसीय अभियान में 172 मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। यह आंकड़ा बताता है कि अगर नीयत साफ हो और व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त हो, तो फाइलें मेजों पर धूल नहीं खाती।

राजस्व मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव के निर्देश पर हुआ अभियान
राज्य के राजस्व मंत्री और नागपुर के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे के निर्देशों पर यह अभियान शुरू किया गया। उद्देश्य साफ था – ग्रामीण इलाकों में राजस्व विभाग और जिला परिषद के बीच जो समन्वय की कमी दिखती है, उसे दूर करना। क्योंकि जब दोनों विभाग मिलकर काम करते हैं, तभी विकास योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर ने इस पूरे अभियान की बागडोर संभाली और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनी के साथ मिलकर 11 तालुकाओं का दौरा किया।
तालुका स्तर पर पंचायत समितियों में हुई बैठकें
हर तालुके की पंचायत समिति में विशेष बैठकें आयोजित की गईं। इनमें तहसीलदार, गट विकास अधिकारी, कृषि अधिकारी समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल हुए। यह कोई औपचारिक बैठक नहीं थी जहां सिर्फ चाय-पानी हो और फाइलें आगे बढ़ा दी जाएं। बल्कि यहां 610 नागरिकों से सीधा संवाद हुआ और उन्होंने अपनी समस्याएं रखीं। कुल 565 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।
गांव स्तर पर 1,279 अधिकारी-कर्मचारियों की भागीदारी
जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है, वह यह कि इस पूरे अभियान में लगभग 1,279 अधिकारी और कर्मचारी गांव स्तर पर बैठकों में शामिल हुए। यानी यह सिर्फ ऊपरी स्तर का दिखावा नहीं था, बल्कि निचले स्तर तक हर कोई सक्रिय रहा। घरकुल योजना, भूमि स्वामित्व के कागजात, प्रॉपर्टी कार्ड, ई-फेरफार, शेत पांदण सड़क योजना जैसे मुद्दों पर खासतौर पर चर्चा हुई और प्रगति देखी गई। ये वे योजनाएं हैं जिनका सीधा असर ग्रामीण लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।

अब हर तीन महीने में होगा यह अभियान
जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर ने साफ किया कि यह एकबारगी प्रयास नहीं है। यह अभियान अब हर तीन महीने में चलाया जाएगा। अगला अभियान 4 से 11 मार्च के बीच होगा। इससे यह उम्मीद बनती है कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी लगातार कम होगी। साथ ही, जो मामले लटके रहते हैं, उनका समय पर निपटारा होगा।
समन्वय ही सफलता की कुंजी
जिलाधिकारी का कहना बिल्कुल सही है कि तालुका स्तर पर सभी विभागों के आपसी समन्वय से ही निर्णय प्रक्रिया को गति मिलती है। जब राजस्व, पंचायत समिति, कृषि, ग्राम विकास जैसे विभाग एक साथ बैठकर मामलों पर चर्चा करते हैं, तो अधिकतर समस्याएं वहीं सुलझ जाती हैं। फाइलों का चक्कर कम होता है और नागरिकों को राहत मिलती है।
जमीनी हकीकत और भविष्य की योजना
यह अभियान बताता है कि अगर नीति निर्माता और अधिकारी मिलकर जमीनी स्तर पर काम करें, तो हर योजना का लाभ सही हकदार तक पहुंच सकता है। नागपुर जिले में यह प्रयास एक मिसाल बन सकता है। आने वाले दिनों में इसी तरह के अभियानों से और भी बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद है।