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नागपुर में शिवसेना उद्धव गुट के कार्यकर्ताओं में रोष, नेतृत्व की अनदेखी से सैकड़ों पदाधिकारी देंगे इस्तीफा

Nagpur Shivsena Internal Conflict: नागपुर में शिवसेना उद्धव गुट के कार्यकर्ताओं में भारी रोष, पार्टी छोड़ने की चेतावनी
Nagpur Shivsena Internal Conflict: नागपुर में शिवसेना उद्धव गुट के कार्यकर्ताओं में भारी रोष, पार्टी छोड़ने की चेतावनी (FB Photo)
नागपुर में शिवसेना ठाकरे गुट के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व की लगातार उपेक्षा और आंतरिक साजिश के खिलाफ आवाज उठाई है। महानगरपालिका चुनाव से पहले सैकड़ों पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है। प्रभाग 28 के विवाद और नितिन तिवारी को समर्थन मिलने से कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ा है। पार्टी के सामने गहरा संकट।
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नागपुर में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर इन दिनों गहरा संकट मंडरा रहा है। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता और पदाधिकारी मुंबई स्थित पार्टी नेतृत्व की लगातार उपेक्षा और स्थानीय स्तर पर हो रही साजिशों से नाराज होकर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे चुके हैं। आगामी नागपुर महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में यह आंतरिक कलह पार्टी के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो लोग वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, कुछ ऐसे लोगों को संरक्षण मिल रहा है जो पार्टी के भीतर रहकर विरोधी दलों के लिए काम कर रहे हैं। यह स्थिति नागपुर की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।

पार्टी के भीतर असंतोष की जड़ें

शिवसेना ठाकरे गुट में विभाजन के बाद से ही नागपुर में पार्टी संगठन कमजोर पड़ता जा रहा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे के साथ रहे कार्यकर्ताओं को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अब समस्या बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक हो गई है।

नागपुर के वरिष्ठ शिवसैनिकों का कहना है कि मुंबई से आने वाले निर्देश स्थानीय हालात को ध्यान में रखकर नहीं दिए जा रहे। महानगरपालिका चुनाव में उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक में स्थानीय नेतृत्व की राय नहीं ली जा रही। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता हताश हो रहे हैं।

प्रभाग 28 का विवाद गहराया

नागपुर महानगरपालिका के प्रभाग 28 का मामला इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। इस प्रभाग से लगातार चार बार नगरसेवक चुने जा चुके जिलाप्रमुख किशोर कुमेरिया इस बार भी प्रबल दावेदार हैं। उनकी जनता में अच्छी पकड़ है और उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

लेकिन पार्टी के भीतर कुछ तत्व उन्हें हराने की कोशिश में लगे हुए हैं। आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने नितिन तिवारी और मंगला गवरे के साथ मिलकर किशोर कुमेरिया को कमजोर करने की रणनीति बनाई है। यह पूरा खेल पार्टी के भीतर से ही खेला जा रहा है, ऐसा निष्ठावान कार्यकर्ताओं का दावा है।

नितिन तिवारी पर गंभीर आरोप

नागपुर के शिवसैनिकों ने नितिन तिवारी पर सीधे आरोप लगाए हैं कि वह पार्टी के भीतर रहकर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। उनका पूरा समर्थक समूह शिंदे गुट में शामिल हो चुका है, लेकिन उन्हें अन्य दलों में प्रवेश नहीं मिलने के कारण वह ठाकरे गुट में बने हुए हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोग पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। बाहर से तो विरोधी दल चुनौती देते ही हैं, लेकिन जब अपने ही लोग पीठ में छुरा घोंपने लगें तो संगठन की नींव हिल जाती है। नितिन तिवारी को तत्काल पार्टी से निष्कासित करने की मांग जोर पकड़ रही है।

मुंबई नेतृत्व की भूमिका पर सवाल

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मुंबई से संचालित हो रही पार्टी की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से वरुण सरदेसाई द्वारा नितिन तिवारी को समर्थन मिलने का आरोप लगाया गया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि मुंबई बैठे नेता स्थानीय हालात को समझे बिना फैसले ले रहे हैं।

नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में पार्टी संगठन को मजबूत करने के बजाय ऐसे तत्वों को संरक्षण दिया जा रहा है जो पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह रवैया निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रहा है।

महानगरपालिका चुनाव पर संकट के बादल

आगामी नागपुर महानगरपालिका चुनाव पार्टी के लिए बेहद अहम है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह चुनाव पार्टी की साख बहाल करने का मौका है। लेकिन आंतरिक कलह के कारण यह अवसर संकट में बदलता नजर आ रहा है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुंबई से उम्मीदवारों को कोई ठोस सहयोग नहीं मिल रहा। स्थानीय शिवसैनिक अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में जीत की संभावना कमजोर हो जाती है। पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि वह जमीनी हकीकत को समझे और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाए।

सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

अब नागपुर के सैकड़ों निष्ठावान शिवसैनिकों और पदाधिकारियों ने खुलकर चेतावनी दे दी है। उनकी मांग साफ है कि यदि नितिन तिवारी को तुरंत पार्टी से नहीं निकाला गया तो वे सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। यह केवल धमकी नहीं, बल्कि उनकी निराशा और गुस्से की अभिव्यक्ति है।

कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे “जय महाराष्ट्र” का नारा लगाते हुए पार्टी छोड़ सकते हैं। यह संकेत है कि वे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना या किसी अन्य क्षेत्रीय दल में शामिल हो सकते हैं। ऐसा होने पर शिवसेना ठाकरे गुट को नागपुर में बड़ा झटका लगेगा।

पार्टी के सामने बड़ी चुनौती

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए यह समय बेहद नाजुक है। एक ओर शिंदे गुट से मुकाबला है तो दूसरी ओर आंतरिक असंतोष। नागपुर जैसे विदर्भ के प्रमुख शहर में पा��्टी का आधार कमजोर होना खतरे की घंटी है।

पार्टी नेतृत्व को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करना होगा। निष्ठावान कार्यकर्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेना होगा। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो नागपुर में पार्टी का संगठन बिखर सकता है।

विदर्भ की राजनीति में नागपुर की अहम भूमिका है। यहां मजबूत संगठन के बिना पार्टी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। उद्धव ठाकरे और उनकी टीम को अब फैसला करना होगा कि वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होंगे या मुंबई की चारदीवारी में बैठकर दूर से नेतृत्व करते रहेंगे।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।