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असदुद्दीन ओवैसी का नागपुर में तीखा भाषण, मोदी सरकार पर साधा निशाना

Asaduddin Owaisi Nagpur Rally: ओवैसी ने नागपुर में मोदी सरकार पर बोला हमला, चीन नीति और वक्फ कानून पर उठाए सवाल
Asaduddin Owaisi Nagpur Rally: ओवैसी ने नागपुर में मोदी सरकार पर बोला हमला, चीन नीति और वक्फ कानून पर उठाए सवाल (File Photo)
नागपुर में AIMIM की चुनावी सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने चीन के साथ सरकार की दोहरी नीति, मुस्लिम इलाकों में विकास की कमी और नए वक्फ कानून को लेकर तीखे सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि नागपुर के मुस्लिम इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने वक्फ कानून को मुसलमानों की संपत्ति छीनने की साजिश बताया और समुदाय से राजनीतिक रूप से मजबूत होने की अपील की।
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नागपुर में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन यानी AIMIM की चुनावी सभा में पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। ओवैसी ने अपने भाषण में कई मुद्दों को उठाया और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने चीन के साथ सरकार के रिश्तों, मुस्लिम इलाकों में विकास की कमी और नए वक्फ कानून को लेकर तीखी टिप्पणी की। नागपुर की इस सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और ओवैसी के भाषण को ध्यान से सुना।

ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की सरकार दोहरी नीति अपना रही है। एक तरफ वह देशभक्ति की बातें करती है लेकिन दूसरी तरफ चीन जैसे देश को खुले हाथों से स्वागत कर रही है। उन्होंने अपने भाषण में इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था तब चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी। लेकिन आज वही सरकार चीन को भारत में निवेश के लिए बुला रही है।

AIMIM प्रमुख ने सरकार की चीन नीति को लेकर कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सीमा पर चीनी सेना के साथ तनाव है और दूसरी तरफ सरकार उन्हें निवेश के लिए रेड कारपेट बिछा रही है। यह सरकार की दोहरी नीति को दर्शाता है। ओवैसी ने कहा कि जनता को यह समझना होगा कि सरकार किसके हित में काम कर रही है।

विकास के मुद्दे पर स्थानीय सवाल

ओवैसी ने अपने भाषण में स्थानीय मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने नागपुर से सांसद नितिन गडकरी के क्षेत्र में विकास की कमी को लेकर सवाल खड़े किए। ओवैसी ने कहा कि नागपुर के जिन इलाकों में मुसलमान रहते हैं वहां आज भी पक्की सड़कें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और नागपुर से सांसद भी हैं लेकिन मुस्लिम इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ कुछ खास इलाकों का ही विकास कर रही है। जहां मुस्लिम आबादी रहती है वहां सीमेंट की सड़कें तक नहीं हैं। यह भेदभाव की नीति है जो लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती। ओवैसी ने कहा कि हर नागरिक को विकास का बराबर हक है चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का हो।

वक्फ कानून पर तीखा हमला

AIMIM प्रमुख ने नए वक्फ कानून को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कानून मुसलमानों की संपत्ति छीनने के लिए बनाया जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि अजीत पवार, एकनाथ शिंदे और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता इस कानून को बनाने में सरकार का साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए मुसलमानों की जमीन छीन ली जाएगी।

ओवैसी ने कहा कि वक्फ की संपत्ति सदियों से मुस्लिम समुदाय की है और यह धार्मिक और सामाजिक कामों के लिए इस्तेमाल होती है। लेकिन नई सरकार इस संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह कानून मुसलमानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। ओवैसी ने कहा कि समुदाय को इस कानून के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जो राजनीतिक दल इस कानून का समर्थन कर रहे हैं वे मुसलमानों के असली दोस्त नहीं हैं। ओवैसी ने कहा कि चुनाव के समय ये नेता मुस्लिम वोट मांगने आते हैं लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है तो वे सरकार का साथ देते हैं।

सिर्फ वोटर बनकर रहना खतरनाक

ओवैसी ने अपने भाषण में मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि अगर वे सिर्फ वोटर बनकर रहे तो उनके घरों पर बुलडोजर चलेगा। उन्होंने कहा कि समुदाय को राजनीतिक रूप से मजबूत होना होगा। सिर्फ वोट देने से काम नहीं चलेगा बल्कि समुदाय के लोगों को राजनीति में आगे आना होगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।

उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में मुस्लिम परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। यह कानून के शासन के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा कि अगर समुदाय राजनीतिक रूप से मजबूत नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ वोट बैंक नहीं बल्कि राजनीतिक ताकत बनना होगा।

AIMIM प्रमुख ने कहा कि समुदाय के युवाओं को आगे आना होगा। उन्हें शिक्षा प्राप्त करनी होगी और राजनीति में भागीदारी बढ़ानी होगी। तभी उनके अधिकारों की रक्षा हो सकेगी। ओवैसी ने कहा कि जब तक समुदाय खुद अपनी आवाज नहीं उठाएगा तब तक कोई उनकी नहीं सुनेगा।

राजनीतिक गठजोड़ पर सवाल

ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे गठजोड़ों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अजीत पवार और एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़कर सत्ता के लिए बीजेपी का साथ दिया। ये नेता सिद्धांतों पर नहीं बल्कि कुर्सी के लिए राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

ओवैसी ने कहा कि जो नेता अपनी ही पार्टी को तोड़ सकते हैं वे जनता के साथ कैसे वफादारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता को समझना होगा कि कौन असली नेता है और कौन सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति कर रहा है। ओवैसी ने कहा कि आने वाले चुनावों में जनता को सोच समझकर वोट देना होगा।

उन्होंने कहा कि AIMIM किसी भी गठजोड़ का हिस्सा नहीं है और न ही किसी के साथ सौदेबाजी करती है। पार्टी सिर्फ जनता के मुद्दों पर काम करती है और उनके अधिकारों के लिए लड़ती है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और न ही भविष्य में करेगी।

चुनावी रणनीति और आगे की योजना

नागपुर की इस सभा को AIMIM की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी महाराष्ट्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी उन लोगों की आवाज है जिन्हें राजनीति में नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि AIMIM सिर्फ मुसलमानों की नहीं बल्कि सभी वंचित वर्गों की पार्टी है।

ओवैसी ने कहा कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का मकसद सिर्फ जीतना नहीं बल्कि जनता के मुद्दों को विधानसभा तक पहुंचाना है। ओवैसी ने कहा कि चाहे एक सीट मिले या दस लेकिन पार्टी अपनी आवाज उठाती रहेगी।

नागपुर की इस सभा में ओवैसी का भाषण काफी चर्चा में रहा। उनके समर्थकों ने उनकी बातों का समर्थन किया जबकि विरोधियों ने इसे सिर्फ वोट की राजनीति बताया। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ओवैसी ने कुछ ऐसे मुद्दे उठाए जो आम जनता की चिंता हैं। उनके भाषण ने एक बार फिर यह साबित किया कि वे एक मुखर नेता हैं जो अपनी बात बिना डरे कहते हैं।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।