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मेट्रो ट्रैक से साही का रेस्क्यू: नागपुर में चला 1 घंटे का थ्रिलर

Porcupine Rescue from Metro Track
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Asfi Shadab
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Porcupine Rescue from Metro Track: Nagpur में चला रोमांचक रेस्क्यू ऑपरेशन

नागपुर शहर में शनिवार, 27 सितम्बर को मेट्रो ट्रैक पर एक अनोखी घटना घटी। कांग्रेस नगर से अजनी स्टेशन के बीच अचानक एक porcupine (साही) मेट्रो पटरी पर दौड़ता हुआ नज़र आया। मेट्रो प्रशासन को जैसे ही इसकी सूचना मिली, तुरंत Porcupine Rescue from Metro Track के लिए रेस्क्यू कॉल जारी किया गया।

Rescue Team की तैनाती

ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर की रेस्क्यू टीम—वनपाल सुधाकर मरसकोल्हे, उनके सहयोगी बंडू मंगर, चेतन बारस्कर और वाहन चालक स्वप्नील भुरे—तुरंत मौके पर पहुँचे। इस मिशन में मेट्रो के कर्मचारी दिलेश मेश्राम और उनकी टीम भी शामिल रही।

मिशन शुरू होते ही सबको अंदाज़ा हो गया कि यह कोई आसान काम नहीं होने वाला। बारिश और ट्रैक पर फैली काई ने ऑपरेशन को और मुश्किल बना दिया। फिर भी टीम ने बिना हिम्मत हारे लगातार साही का पीछा किया।

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रोमांचक पीछा

करीब एक घंटे तक यह Porcupine Rescue from Metro Track का थ्रिलर चलता रहा। कभी मेट्रो रोककर पटरी पर दौड़ना, तो कभी ट्रेन से उतरकर पीछा करना—पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी सीन जैसा प्रतीत हो रहा था। साही बार-बार इधर-उधर भागकर टीम को चकमा देता रहा, लेकिन टीम ने उसे घेरने की कोशिश जारी रखी।

हादसा और चोटें

इस रोमांचक पीछा के दौरान एक दुर्घटना भी हुई। मेट्रो कर्मचारी दिलेश मेश्राम फिसलकर पटरी पर गिर पड़े। उनके हाथ, पैर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं और उनका मोबाइल भी टूट गया। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी बहादुरी और समर्पण इस घटना को और भी यादगार बना देते हैं।

आखिरकार सफलता

लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद, बंडू मंगर, चेतन बारस्कर और स्वप्नील भुरे ने अपनी जान जोखिम में डालकर साही को पकड़ लिया। उसके नुकीले कांटे खतरे से कम नहीं थे, लेकिन सूझबूझ और सावधानी से उसे काबू में किया गया।

इसके बाद साही को ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर लाया गया। मेडिकल जांच में पाया गया कि वह घायल नहीं था, केवल थकावट से कमजोर हो गया था। आराम के बाद उसे जंगल में आज़ाद किया जाएगा।

वेब स्टोरी:

बड़ा सवाल

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—आखिर एक साही इतनी ऊँचाई पर बने मेट्रो ट्रैक तक पहुँचा कैसे? यह घटना शहरीकरण और वन्यजीवों के बीच बढ़ती खाई की ओर संकेत करती है। वन विभाग और मेट्रो प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए और पुख्ता इंतज़ाम करने होंगे।

टीम का साहस

बारिश, फिसलन और दुर्घटना के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी। इस Porcupine Rescue from Metro Track ने साबित कर दिया कि हमारी रेस्क्यू टीमें पूरी तरह से समर्पित हैं। उनका साहस न केवल वन्यजीवों को बचाता है बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।

Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।