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नागपुर शहर में सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा लगाने को मिलेगी प्राथमिकता – आदित्य प्रताप सिंह

Solar Energy Priority: सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा को मिलेगी प्राथमिकता, नागपुर राज्य में प्रथम
Solar Energy Priority: सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा को मिलेगी प्राथमिकता, नागपुर राज्य में प्रथम (IG Photo)

Solar Energy Priority: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक आदित्य प्रताप सिंह ने नागपुर में घोषणा की कि सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत नागपुर महाराष्ट्र में प्रथम स्थान पर है। देशभर में प्रतिदिन 6500 सोलर रूफटॉप परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं।

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प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना: नागपुर में आयोजित महत्वपूर्ण सत्र में सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा लगाने की घोषणा

नागपुर शहर में हाल ही में एसोसिएशन फॉर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की तरफ से एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नाम “एडवांटेज विदर्भ – सांसद औद्योगिक महोत्सव” था। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर एक विशेष सत्र रखा गया था। इस सत्र में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक आदित्य प्रताप सिंह ने हिस्सा लिया और कई महत्वपूर्ण बातें बताईं।

आदित्य प्रताप सिंह ने इस कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा कि अब सिर्फ घरों पर ही नहीं बल्कि सरकारी भवनों पर भी सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी। यह फैसला देश में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक भवनों पर सोलर पैनल लगाने से न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

नागपुर का शानदार प्रदर्शन – महाराष्ट्र में पहले स्थान पर

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देशभर में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इस मामले में महाराष्ट्र राज्य पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। महाराष्ट्र में भी नागपुर जिला सबसे आगे है और राज्य में पहले स्थान पर काबिज है। यह उपलब्धि नागपुर के नागरिकों की जागरूकता और सरकार की मेहनत को दर्शाती है।

नागपुर के अलावा विदर्भ क्षेत्र के दो और जिले भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अमरावती और बुलढाणा जिले महाराष्ट्र के शीर्ष दस जिलों में शामिल हैं। इन तीनों जिलों का प्रदर्शन यह साबित करता है कि विदर्भ क्षेत्र में लोग स्वच्छ ऊर्जा के प्रति काफी जागरूक हो रहे हैं। छतों पर सोलर पैनल लगाकर लोग न केवल अपने बिजली के बिल कम कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी अपना योगदान दे रहे हैं।

योजना की शुरुआत और वर्तमान स्थिति

आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि जब यह योजना शुरू हुई थी तब शुरुआती दिनों में इसे उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं मिल पाई थी। लोगों को योजना के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी और कई तरह की शंकाएं भी थीं। लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे लोगों को इस योजना के फायदों के बारे में पता चला, वैसे-वैसे इसमें तेजी आने लगी। आज की तारीख में पूरे देश में प्रतिदिन 6,500 से भी ज्यादा सोलर रूफटॉप परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं। यह आंकड़ा योजना की बढ़ती लोकप्रियता और सफलता को साफ तौर पर दिखाता है।

13 फरवरी 2024 को यह योजना पूरे देश में लागू की गई थी। तब से अब तक लाखों घरों पर सोलर पैनल लग चुके हैं। लोगों को इस योजना से काफी राहत मिली है क्योंकि इससे उनके बिजली के खर्च में काफी कमी आई है। जो परिवार पहले महीने में हजारों रुपये बिजली बिल में देते थे, अब वे अपनी खुद की बिजली बना रहे हैं।

डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया से मिल रही सफलता

कार्यक्रम में महावितरण के वरिष्ठ अधिकारी श्री तालेवार ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि इस योजना की सफलता में पंजीकृत विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। सरकार ने केवल योजना शुरू ही नहीं की बल्कि उसे सफल बनाने के लिए एक मजबूत तंत्र भी खड़ा किया है। इस योजना की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है। आवेदन से लेकर स्वीकृति और सब्सिडी की राशि तक सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है।

योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर कदम पर जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकता है। सब्सिडी का वितरण भी तेजी से हो रहा है जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बीच में कोई दलाल या बिचौलिया न आए और लाभार्थी को सीधे फायदा मिले।

किफायती ऋण सुविधा से आम लोगों को मिल रही मदद

बहुत से लोग सोलर पैनल लगाना तो चाहते हैं लेकिन शुरुआती खर्च के कारण पीछे हट जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने योजना के तहत आसान ऋण की सुविधा भी शुरू की है। लोग केवल 5.75 प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण ले सकते हैं। यह ब्याज दर बाजार में मिलने वाले अन्य ऋणों की तुलना में काफी कम है। इस कम ब्याज दर की वजह से मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोग भी इस योजना का लाभ उठा पा रहे हैं।

सोलर पैनल लगाने के बाद लोगों को हर महीने बिजली के बिल में काफी बचत होती है। कुछ समय में यह बचत इतनी हो जाती है कि लगाने का पूरा खर्च निकल आता है। उसके बाद तो यह बिल्कुल मुफ्त बिजली जैसा है। इसलिए यह योजना एक तरह से लंबे समय का निवेश है जो हर घर को फायदा पहुंचाता है।

अधिकारियों का सम्मान और प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान एमएसईडीसीएल (महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड) के अधिकारियों का विशेष सम्मान किया गया। इन अधिकारियों ने योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने लोगों को जागरूक करने से लेकर तकनीकी मदद देने तक हर कदम पर साथ दिया है। उनकी मेहनत और लगन की वजह से ही नागपुर और विदर्भ के अन्य जिले इस योजना में इतना आगे बढ़ पाए हैं।

सरकार ऐसे अधिकारियों को सम्मानित करके अन्य कर्मचारियों को भी प्रोत्साहित करना चाहती है। जब अच्छे काम की सराहना होती है तो और लोग भी अच्छा काम करने के लिए प्रेरित होते हैं। यह एक सकारात्मक माहौल बनाता है जिससे योजनाओं को और बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।

पर्यावरण और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम

सौर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है। यह पर्यावरण की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। जब हम कोयले या अन्य जीवाश्म ईंधन से बिजली बनाते हैं तो वातावरण में हानिकारक गैसें निकलती हैं। ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का कारण बनती हैं। लेकिन सौर ऊर्जा पूरी तरह से स्वच्छ है और इससे कोई प्रदूषण नहीं होता।

आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना एक महत्वपूर्ण कदम है। जितने ज्यादा घर और सरकारी भवन सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेंगे, उतना ही कम पारंपरिक बिजली की जरूरत पड़ेगी। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और हमारा देश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ेगा।

आम लोगों को क्या करना चाहिए

जो लोग अभी तक इस योजना का लाभ नहीं उठा पाए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। योजना की वेबसाइट पर जाकर या नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क करके आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। पंजीकृत विक्रेताओं की सूची भी ऑनलाइन उपलब्ध है। केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विक्रेताओं से ही सोलर पैनल खरीदना चाहिए ताकि सब्सिडी और गुणवत्ता दोनों का फायदा मिल सके।

योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले अपनी छत की उपयुक्तता जांच लें। देखें कि छत मजबूत है या नहीं और उस पर धूप ठीक से आती है या नहीं। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से सोलर पैनल की क्षमता तय करें। छोटे घरों के लिए 1-2 किलोवाट और बड़े घरों के लिए 3-5 किलोवाट के सिस्टम काफी होते हैं। आवेदन के समय सभी जरूरी दस्तावेज साथ रखें और सही जानकारी भरें।

योजना का व्यापक असर

इस योजना का असर केवल बिजली बचत तक सीमित नहीं है। इससे रोजगार के भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सोलर पैनल बनाने, बेचने, लगाने और रखरखाव करने के लिए हजारों लोगों को काम मिला है। खासकर युवाओं के लिए यह क्षेत्र नए करियर के अवसर प्रदान कर रहा है। कई कंपनियां सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश कर रही हैं जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा है।

गांवों और छोटे शहरों में भी यह योजना तेजी से फैल रही है। ऐसी जगहों पर जहां बिजली की आपूर्ति अनियमित है या बिजली कटौती की समस्या है, वहां सोलर पैनल एक बेहतरीन समाधान साबित हो रहे हैं। लोग अब बिजली कटौती से परेशान नहीं हैं क्योंकि उनके पास अपनी बिजली का स्रोत है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश के लिए एक वरदान साबित हो रही है। नागपुर और विदर्भ के अन्य जिलों का प्रदर्शन दूसरों के लिए प्रेरणा है। सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देने का फैसला और भी सकारात्मक बदलाव लाएगा। हर नागरिक को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल में अपना योगदान देना चाहिए।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।