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राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर ओबीसी-बहुजन आंदोलनों पर रोक के खिलाफ जताया गया आक्रोश

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर ओबीसी-बहुजन आंदोलनों पर रोक के खिलाफ जताया गया आक्रोश
OBC Bahujan Protest Movement: ओबीसी-बहुजन आंदोलन पर रोक के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन

कटक में बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन पर लगी रोक के विरोध में विभिन्न बहुजन संगठनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। जाति आधारित जनगणना और ईवीएम प्रतिबंध पर केंद्रित यह अधिवेशन कथित तौर पर आरएसएस-बीजेपी दबाव में रोका गया। चरणबद्ध आंदोलन के तहत 22 फरवरी को नागपुर में महामोर्चा निकाला जाएगा।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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देश में ओबीसी और बहुजन समुदायों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों पर लगाई गई रोक के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। बुधवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कटक, उड़ीसा में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन पर लगाई गई रोक के विरोध में दिया गया है। इस घटना ने देशभर में पिछड़े और बहुजन समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा और राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा ने संयुक्त रूप से यह विरोध प्रदर्शन किया। 7 जनवरी को जिला कलेक्टर विपिन इतनकर को सौंपे गए ज्ञापन में उड़ीसा के कटक शहर में हुई घटना का पूरा विवरण दिया गया।

इस अवसर पर प्रो. बी.एस. हसते साहब ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कटक में बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा का संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन होना था। लेकिन आरएसएस और बीजेपी के दबाव में स्थानीय प्रशासन ने इस आयोजन को रोक दिया। यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।

OBC Bahujan Protest Movement: ओबीसी-बहुजन आंदोलन पर रोक के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन
OBC Bahujan Protest Movement: ओबीसी-बहुजन आंदोलन पर रोक के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन

अधिवेशन का उद्देश्य क्या था

रोके गए अधिवेशन दो अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित थे। बामसेफ का राष्ट्रीय अधिवेशन पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना के समर्थन में समर्पित था। यह मांग लंबे समय से पिछड़े समुदायों द्वारा उठाई जा रही है ताकि उनकी वास्तविक संख्या और स्थिति का सही आकलन हो सके।

दूसरी तरफ, भारत मुक्ति मोर्चा का राष्ट्रीय अधिवेशन ईवीएम मशीन पर प्रतिबंध लगाने और सभी चुनावों में बैलेट पेपर की बहाली की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। यह भी एक संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दा है जिस पर देशभर में बहस चल रही है।

हजारों लोग पहुंचे थे कटक

इन दोनों राष्ट्रव्यापी मुद्दों पर गहन विश्लेषण करने के लिए देशभर से वक्ता आने वाले थे। अधिवेशन में भाग लेने के लिए हजारों की संख्या में लोग कटक पहुंच चुके थे। लेकिन आयोजन स्थल पर पहुंचकर उन्हें निराशा हाथ लगी। स्थानीय प्रशासन ने आरएसएस-बीजेपी के कथित दबाव में अधिवेशन पर रोक लगा दी।

जो लोग दूर-दूर से अपना समय और पैसा खर्च करके आए थे, उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इससे लोगों में भारी निराशा और आक्रोश फैला। आयोजकों ने उड़ीसा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। यह स्थिति और भी चिंताजनक मानी जा रही है।

समाज में फैला आक्रोश

इस घटनाक्रम से देशभर में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। लोगों का मानना है कि उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया गया है। लेकिन यह आक्रोश हिंसक रूप नहीं ले रहा है।

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह आक्रोश संविधान सम्मत और शांतिपूर्ण तरीके से चरणबद्ध आंदोलन के माध्यम से व्यक्त किया जाएगा। इस बात से साफ होता है कि संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।

चरणबद्ध आंदोलन की योजना

विरोध को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए चार चरणों में आंदोलन की योजना बनाई गई है। प्रथम चरण के तहत राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जा चुका है। यह कदम 7 जनवरी को पूरा हुआ।

द्वितीय चरण में 19 जनवरी 2026 को जिला स्तर पर धरना आंदोलन किया जाएगा। इसमें स्थानीय स्तर पर लोग अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

तृतीय चरण में 15 फरवरी 2026 को जिला स्तरीय रैली और प्रदर्शन का आयोजन होगा। इसमें और अधिक संख्या में लोग शामिल होने की उम्मीद है।

अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण 22 फरवरी 2026 को आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में महामोर्चा के रूप में होगा। यह आंदोलन की चरम सीमा होगी।

नेतृत्व कौन करेगा

नागपुर में होने वाले महामोर्चा का नेतृत्व भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर वामन मेश्राम साहब करेंगे। वहीं, सह-नेतृत्व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, नई दिल्ली के चौधरी विकास पटेल करेंगे। दोनों नेताओं की उपस्थिति में यह आंदोलन बड़ा रूप लेने की संभावना है।

किन-किन ने की मौजूदगी

ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें संदीप मानकर जो बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क, नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रभारी हैं, प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

इसके अलावा एडवोकेट धर्मेश सहारे, अनिल नागरे, अंबादास लोखंडे, अनिल बोडखे, रायभान दहाट, हीरा बांसोड़ सहित अनेक समाजसेवी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।

मुद्दों की गंभीरता

जाति आधारित जनगणना और ईवीएम बनाम बैलेट पेपर दोनों ही मुद्दे देश की राजनीति और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जाति आधारित जनगणना से पिछड़े वर्गों को उनकी वास्तविक संख्या के अनुसार आरक्षण और सुविधाएं मिल सकेंगी।

वहीं, ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन चिंतित हैं। बैलेट पेपर की मांग चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए की जा रही है।

इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने से रोकना लोकतंत्र के लिए सही नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि पिछड़े और बहुजन समुदाय इस रोक को अपने अधिकारों पर हमला मान रहे हैं और संगठित होकर विरोध कर रहे हैं।

यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है और देश की राजनीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।