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राज्य के विश्वविद्यालयों में हजारों प्राध्यापक पद खाली, वित्त विभाग से मंजूरी का इंतजार

राज्य के विश्वविद्यालयों में हजारों प्राध्यापक पद खाली, वित्त विभाग से मंजूरी का इंतजार
Professors Recruitment: महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों में हजारों प्राध्यापक पदों की भर्ती अटकी (Pinterest Photo)

महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है। अनुदानित महाविद्यालयों में 11,918 सहायक प्राध्यापक पद खाली हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रिक्त हुए 5012 पदों की भर्ती के लिए वित्त विभाग से मंजूरी का इंतजार है। प्राचार्यों के 454 और विश्वविद्यालयों में 1422 पद भी रिक्त हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

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Asfi Shadab
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राज्य के शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की भारी कमी एक बार फिर सामने आई है। विधायक प्रज्ञा सातव ने विधान परिषद में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की पदभरती को लेकर सवाल उठाया। इस पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने जो जानकारी दी, वह चौंकाने वाली है। राज्य भर में हजारों शिक्षक पद खाली पड़े हैं और भर्ती प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है।

अनुदानित महाविद्यालयों में पदों की स्थिति

साल 2018 में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। 3 अक्टूबर 2018 के शासन निर्णय के तहत अनुदानित महाविद्यालयों में खाली पड़े पदों में से 40 प्रतिशत यानी 3580 सहायक प्राध्यापक पदों को भरने की मंजूरी दी गई थी। इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है। अब तक 3086 पद भरे जा चुके हैं, लेकिन अभी भी 494 पदों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने भर्ती की दिशा में कदम तो उठाए हैं, लेकिन रफ्तार उतनी तेज नहीं है जितनी होनी चाहिए। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में देरी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता है।

11 हजार से अधिक पद खाली

महाराष्ट्र के अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में स्थिति और भी गंभीर है। 1 अक्टूबर 2017 की छात्र संख्या के आधार पर जो पद स्वीकृत किए गए थे, उनमें से दिसंबर 2024 के अंत तक सहायक प्राध्यापक संवर्ग के कुल 11,918 पद खाली हैं। यह संख्या बेहद चिंताजनक है।

इन हजारों खाली पदों का मतलब है कि राज्य भर में लाखों छात्र पर्याप्त शिक्षकों के बिना पढ़ाई कर रहे हैं। कक्षाओं में शिक्षकों की कमी से शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।

वित्त विभाग से मंजूरी की प्रतीक्षा

मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बताया कि वर्ष 2018 से 2024 की अवधि में जो पद रिक्त हुए हैं, उनमें से 5012 सहायक प्राध्यापक पदों की भर्ती के लिए वित्त विभाग से मंजूरी मांगी गई है। यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सवाल यह है कि मंजूरी में कितना समय लगेगा।

शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के बीच समन्वय की कमी अक्सर भर्ती प्रक्रिया में देरी का कारण बनती है। ऐसे में जरूरी है कि दोनों विभाग मिलकर तेजी से काम करें।

प्राचार्य पदों पर भी कमी

सहायक प्राध्यापकों के अलावा प्राचार्यों के पदों पर भी भारी कमी है। राज्य के अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में प्राचार्यों के कुल 1227 स्वीकृत पदों में से केवल 773 पद भरे हुए हैं। इसका मतलब है कि 454 पद खाली पड़े हैं।

प्राचार्य किसी भी शिक्षण संस्थान की रीढ़ होते हैं। उनकी कमी से प्रशासनिक कार्य और शैक्षणिक गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं। कई महाविद्यालयों में अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है, जो आदर्श स्थिति नहीं है।

सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में भर्ती की स्थिति

राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में भी पदों की कमी बनी हुई है। कुल 1422 रिक्त पदों में से 622 पदों को भरने की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा 422 पदों के लिए वित्त विभाग से मंजूरी का अनुरोध किया गया है।

7 अगस्त 2019 के शासन निर्णय के अनुसार सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में 80 प्रतिशत पद भरने की अनुमति दी गई थी। अब सरकार ने स्वीकृत अध्यापकीय पदों की 85 प्रतिशत सीमा तक भर्ती के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है।

भर्ती प्रक्रिया में तेजी की जरूरत

इन सभी आंकड़ों से साफ है कि राज्य में शिक्षकों की भारी कमी है। हालांकि सरकार ने भर्ती के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन प्रक्रिया की गति बेहद धीमी है। वित्त विभाग से मंजूरी मिलने में समय लगता है और फिर वास्तविक भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है।

इस बीच छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है। कम शिक्षकों के कारण कक्षाओं में भीड़ बढ़ जाती है और व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। शोध कार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण भी प्रभावित होता है।

समाधान की दिशा में

राज्य सरकार को इस समस्या के तुरंत समाधान की दिशा में काम करना होगा। सबसे पहले वित्त विभाग को जल्द से जल्द मंजूरी देनी चाहिए। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने की जरूरत है।

ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल साक्षात्कार से प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। साथ ही, समय-समय पर भर्ती अभियान चलाकर योग्य उम्मीदवारों को आकर्षित करना चाहिए।

शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव

हजारों खाली पदों का सीधा असर महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक जरूरी हैं। अगर यह स्थिति जारी रही तो महाराष्ट्र की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

विधायक प्रज्ञा सातव द्वारा उठाया गया यह सवाल बेहद प्रासंगिक है। सदन में इस मुद्दे पर चर्चा होना जरूरी था और अब सरकार को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

राज्य के शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए न केवल पदों की भर्ती बल्कि शिक्षकों के प्रशिक्षण, सुविधाओं में सुधार और वेतन संरचना पर भी ध्यान देना होगा। तभी महाराष्ट्र में शिक्षा का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।