Rashtra Bharat Logo

राज्य को तुरंत भंग करनी चाहिए SC-ST उपवर्गीकरण समिति: जयदीप कवाडे का बड़ा बयान

राज्य को तुरंत भंग करनी चाहिए SC-ST उपवर्गीकरण समिति: जयदीप कवाडे का बड़ा बयान
SC-ST Subclassification Committee
Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

जयदीप कवाडे ने SC-ST Subclassification Committee को भंग करने की मांग की | महाराष्ट्र राजनीतिक खबर

महाराष्ट्र की राजनीति में SC-ST Subclassification Committee को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उपवर्गीकरण के मुद्दे पर राज्य में बढ़ते तनाव के बीच, पीपल्स रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और महाराष्ट्र लघु उद्योग विकास महामंडल के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) जयदीपभाई जोगेंद्र कवाडे ने राज्य सरकार से इस समिति को तुरंत भंग करने की मांग की है।

यह भी पढ़ें:
बाढ़ पैक्स अध्यक्ष करंट हादसा: राणाबीघा पंचायत के पैक्स अध्यक्ष अनिल सिंह की खेत में करंट लगने से मौत, क्षेत्र में छाया मातम

जयदीप कवाडे ने अपने प्रेस बयान में कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित यह समिति न केवल सामाजिक सौहार्द को कमजोर कर रही है बल्कि जातीय तनाव को भी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि “समाज को बांटकर न्याय नहीं किया जा सकता। न्याय तभी संभव है जब सभी वर्गों में समानता और एकता बनी रहे। यह समिति सामाजिक विभाजन का कारण बन रही है, जिससे असंतोष का माहौल पैदा हो सकता है।”

कवाडे ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार वास्तव में Social Justice के सिद्धांतों पर काम करना चाहती है, तो उसे SC-ST Subclassification Committee को तुरंत समाप्त करना चाहिए। उनके अनुसार, यह समिति आरक्षण प्रणाली के भीतर नई असमानताएं पैदा करने का कार्य कर रही है, जो सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।

सामाजिक सौहार्द पर खतरा

जयदीप कवाडे ने कहा कि महाराष्ट्र जैसे सामाजिक रूप से संवेदनशील राज्य में उपवर्गीकरण की नीति से समाज में दरारें बढ़ेंगी। “एक ओर सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उपवर्गीकरण जैसी नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं। यह विरोधाभास राज्य की सामाजिक एकता के लिए खतरनाक है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई सामाजिक संगठनों और विचारकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि Subclassification Policy का परिणाम सामाजिक वैमनस्य के रूप में सामने आएगा। “राज्य सरकार को इस संवेदनशील विषय पर व्यापक संवाद शुरू करना चाहिए, न कि एकतरफा निर्णय लेना चाहिए,” उन्होंने जोड़ा।

केंद्र सरकार से भी अपील

जयदीप कवाडे ने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि वह आगामी शीतकालीन संसदीय सत्र (Winter Session of Parliament) में कानून लाकर SC-ST Subclassification Committee को पूरी तरह रद्द करे।
उन्होंने कहा कि “यह निर्णय सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए आवश्यक है। अगर यह समिति बनी रहती है, तो संविधान की भावना को ठेस पहुंचेगी और आरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।”

संवैधानिक दृष्टिकोण

कवाडे ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने SC और ST वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान करते समय किसी भी प्रकार के उपवर्गीकरण की परिकल्पना नहीं की थी। “यह संविधान की भावना के खिलाफ है। Subclassification से सामाजिक न्याय का उद्देश्य विकृत होगा और राजनीतिक लाभ के लिए समाज को तोड़ा जाएगा,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को Equality before Law और Social Harmony को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में आकर ऐसी समितियों का गठन करना चाहिए।

आगे की रणनीति

पीपल्स रिपब्लिकन पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। कवाडे ने कहा कि “हम सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। अगर सरकार ने समिति को नहीं भंग किया, तो जनता सड़कों पर उतरेगी।”

वेब स्टोरी:

राज्य में पहले से ही SC-ST Subclassification Committee के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे में कवाडे का यह बयान इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा महाराष्ट्र की आगामी सियासत में एक बड़ा सामाजिक एजेंडा बन सकता है, जिससे विभिन्न दलों की रणनीतियों पर भी असर पड़ेगा।


Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।