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राजसमंद में यात्रियों से भरी बस बनास नदी में गिरी, 15 घायल; एक्सल टूटने से हुआ हादसा

राजसमंद में यात्रियों से भरी बस बनास नदी में गिरी, 15 घायल; एक्सल टूटने से हुआ हादसा
Rajasthan Bus Accident: राजसमंद में बनास नदी में गिरी यात्रियों से भरी बस, 15 लोग घायल (File Photo)

राजस्थान के राजसमंद जिले में नाथद्वारा से मचिंद जा रही यात्रियों से भरी बस एक्सल टूटने के कारण मोलेला पुलिया से बनास नदी में गिर गई। हादसे में 15 यात्री घायल हुए, जिनमें दो गंभीर को उदयपुर रेफर किया गया। ग्रामीणों ने त्वरित बचाव कर सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला।

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Asfi Shadab
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राजस्थान के राजसमंद जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा उस समय हुआ जब यात्रियों से भरी बस अचानक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे बनास नदी में जा गिरी। यह दर्दनाक घटना खमनोर थाना क्षेत्र के मोलेला पुलिया पर हुई जहां एक निजी बस नाथद्वारा से मचिंद की ओर जा रही थी। बस में बैठे 25 से 30 यात्रियों के लिए एक क्षण ने ही भयावह दृश्य पैदा कर दिया। बताया जा रहा है कि एक्सल टूटने से बस का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से पुलिया से नीचे जा गिरी।

इस हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत अपनी जान जोखिम में डालकर सभी यात्रियों को बचाने में अहम भूमिका निभाई। बस गिरी तो जरूर, लेकिन नदी में पानी का बहाव कम होने के कारण कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। अगर नदी में पानी अधिक होता, तो स्थिति और भयावह हो सकती थी। स्थानीय लोगों के जागरूकता और तत्परता ने इस हादसे के प्रभाव को कम करने में मदद की।

बस का एक्सल टूटने से बिगड़ा संतुलन

बस हादसे के पीछे मुख्य कारण निर्मित सड़क सुरक्षा खामियां और वाहन की तकनीकी खराबी बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिया पर पहुंचते ही बस के नीचे से जोरदार आवाज आई और इससे पहले कि चालक कुछ समझ पाता, बस अचानक एक तरफ झुक कर नीचे गिर गई। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि पुराने वाहनों की समय-समय पर मैकेनिकल जांच नहीं की जाती, जिससे ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।

राजसी सड़क संरचना पर भी सवाल उठते हैं। कई क्षेत्रों में पुलिया और सड़कों का निर्माण पुरानी तकनीक के आधार पर किया गया है, जहां भारी वाहनों के वजन की क्षमता नहीं होती। इस वजह से हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला।

घायलों को ग्रामीणों ने बचाया, अस्पताल में भर्ती

हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिना किसी देरी के बचाव कार्य शुरू किया। पानी कम होने के कारण वे सीधे बस के पास पहुंचे और खिड़कियों तथा पिछले दरवाजे से लोगों को बाहर निकालने लगे। बस के अंदर फंसे यात्रियों में से अधिकांश महिलाएं थीं। घबराहट और चोट के कारण कई को तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। सभी 15 घायलों को खमनोर सीएचसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार दिया गया।

घायलों में 13 महिलाएं, 1 बच्चा और 1 पुरुष शामिल हैं। इनमें से दो को सिर में गंभीर चोटें आईं, जिन्हें डॉक्टरों ने तुरंत उदयपुर रेफर किया। घायलों के नामों में हगामी बाई, लीला, रूपा, रोहित, राकेश, पूजा, कमला, पूनम, पेमा राम, हमेरी बाई, सूरज कंवर, लीला देवी, नर्मदा देवी, अनिता और लीला शामिल हैं।

स्थानीय प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

जैसे ही सूचना प्रशासन तक पहुंची, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और नदी से बस को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रशासन का कहना है कि बस की तकनीकी जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि रखरखाव में कोई लापरवाही हुई या वाहन कई वर्षों से उपयोग में होने के बावजूद उसे फिटनेस प्रमाणपत्र दिया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि हादसे के बाद यात्रियों और उनके परिजनों की सहायता के लिए व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन के अनुसार जिस निजी संचालक की बस है, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तकनीकी खराबी से हुए हादसे में वाहन मालिक की जिम्मेदारी सबसे अधिक होती है क्योंकि वह नियमित सर्विसिंग और परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए बाध्य होता है।

दुर्घटनाएं रोकने के लिए क्या होना चाहिए

राजसमंद हादसा एक चेतावनी है कि सड़क परिवहन और वाहन सुरक्षा सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हर वाहन मालिक की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी परिवहन संचालकों को नियमित रूप से अपने वाहनों की फिटनेस जांच करानी चाहिए, साथ ही पुराने हिस्सों को समय पर बदलना भी जरूरी है। सड़क सुरक्षा अभियान, पुलिया और संकरे मार्गों पर चेतावनी बोर्ड, स्पीड लिमिट और नियमित पुलिस निगरानी दुर्घटनाओं को कम कर सकती है।

सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता आवश्यक है ताकि लोग बिना फिटनेस वाले वाहनों में यात्रा करने से बचें और शिकायत दर्ज कराने में संकोच न करें। जब तक प्रशासन, वाहन मालिक और आम जनता एकजुट होकर सुरक्षा पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।