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ओवैसी ने हिमंत को दो रुपये की पेशकश कर किया बेइज्जत, मिया मुस्लिम विवाद और चीन सीमा पर साधा भाजपा को निशाना

ओवैसी ने हिमंत को दो रुपये की पेशकश कर किया बेइज्जत, मिया मुस्लिम विवाद और चीन सीमा पर साधा भाजपा को निशाना
Owaisi Mocks Himanta Biswa Sarma: ओवैसी ने असम CM को दो रुपये देकर उड़ाया मजाक, जानें पूरा मामला (File Photo)

Owaisi Mocks Himanta Biswa Sarma: AIMIM प्रमुख ओवैसी ने निजामाबाद रैली में असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा को दो रुपये की पेशकश कर मजाक उड़ाया। मिया मुस्लिम विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि मुस्लिम आबादी कभी हिंदू आबादी से अधिक नहीं होगी। चीन सीमा और पाकिस्तान मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा।

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Asfi Shadab
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ओवैसी का हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर से असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को अपने तीखे तेवर का निशाना बनाया है। तेलंगाना के निजामाबाद में आयोजित एक विशाल जनसभा में ओवैसी ने न सिर्फ हिमंत बिस्वा सरमा का मजाक उड़ाया, बल्कि भाजपा और आरएसएस की नीतियों पर भी सवाल उठाए। मिया मुस्लिम विवाद को लेकर ओवैसी ने जो बयान दिया, वह अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को दो रुपये देने की पेशकश करते हुए कहा कि क्या वह यह पैसा लेंगे।

दो रुपये की पेशकश से क्यों उड़ाया मजाक

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कुछ समय पहले एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कोई ऑटो चालक मिया मुस्लिम है तो उसे तय किराए से कम पैसे देने चाहिए। इस बयान पर ओवैसी ने सख्त एतराज जताया और कहा कि यह संविधान के खिलाफ है। ओवैसी ने अपनी रैली में कहा कि अगर किराया पांच रुपये है तो हिमंत कहते हैं कि चार रुपये दो। उन्होंने कहा कि हिमंत विश्व शर्मा मैं तुम्हें यह दो रुपये दे रहा हूं, क्या तुम इसे लोगे? मुझे पता है कि तुम दो रुपये के भिखारी हो। क्या मैं यह पैसा तुम्हारे खाते में भेज दूं? इस तरह के बयान से पूरी सभा में तालियों की गड़गड़ाहट हो गई। ओवैसी ने साफ कहा कि संविधान सभी नागरिकों को बराबर का अधिकार देता है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री।

मिया मुस्लिम शब्द का विवाद क्या है

मिया शब्द का इस्तेमाल असम में बंगाली भाषा बोलने वाले मुस्लिमों के लिए किया जाता है। यह शब्द कई बार अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल होता रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने यह शब्द नहीं बनाया है, बल्कि यह समुदाय के अंदर ही चलता है। लेकिन ओवैसी ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जो किसी समुदाय को अपमानित करे। उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा लोगों को धमकी दे रहे हैं कि अगर वोट नहीं दिया तो उन्हें बांग्लादेश भेज दिया जाएगा। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

भारत में मुस्लिम आबादी पर ओवैसी का बड़ा बयान

निजामाबाद की रैली में ओवैसी ने मुस्लिम आबादी को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों की आबादी कभी भी हिंदुओं की आबादी से ज्यादा नहीं होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम कह रहे हैं कि पूरी दुनिया की आबादी बूढ़ी हो रही है लेकिन भारत की आबादी युवा है। ओवैसी ने सवाल किया कि अगर देश की साठ फीसदी आबादी चालीस साल से कम उम्र की है तो उनके लिए रोजगार के क्या इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बीस साल बाद यह युवा आबादी भी बूढ़ी हो जाएगी और तब महंगाई कितनी बढ़ेगी, इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा।

आरएसएस प्रमुख पर भी साधा निशाना

ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख कहते हैं कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए, लेकिन खुद वह ऐसा नहीं करते। ओवैसी ने कहा कि पहले कहा जाता था कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाया जाएगा और मुसलमानों की आलोचना की जाती थी। लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि जब देश की आबादी बूढ़ी होगी तो इसका असर क्या होगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम आबादी स्थिर हो जाएगी और कभी भी हिंदू आबादी से अधिक नहीं होगी। यह बयान उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो लगातार आबादी के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाते हैं।

टी-20 विश्व कप और पाकिस्तान का बहिष्कार

ओवैसी ने टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच का पाकिस्तान द्वारा बहिष्कार करने पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत मेजबानी कर रहा है और बेकार पाकिस्तानी टीम कह रही है कि वह भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी। ओवैसी ने कहा कि भारत सरकार को पाकिस्तान से साफ कहना चाहिए था कि अगर नहीं खेलना है तो यहां से चले जाओ। लेकिन सरकार चुपचाप बैठी सुन रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत की कमजोरी दिखाता है।

चीन सीमा विवाद पर मोदी सरकार को घेरा

ओवैसी ने चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर भी मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का हवाला देते हुए कहा कि चीन ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की है लेकिन सरकार चुप है। ओवैसी ने सवाल किया कि जब पाकिस्तान के खिलाफ इतना बोलते हो तो चीन के मामले में चुप क्यों हो। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की सीमा की रक्षा करनी चाहिए और चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। लेकिन सरकार सिर्फ बातें करती है, काम कुछ नहीं करती।

संविधान और समानता का सवाल

ओवैसी ने अपने पूरे भाषण में संविधान की बात की। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को बराबर का अधिकार देता है। किसी भी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी समुदाय के साथ भेदभाव करे। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऑटो चालक है तो उसे उसकी मेहनत का पूरा पैसा मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। ओवैसी ने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा जैसे लोग समाज में नफरत फैला रहे हैं और यह देश के लिए खतरनाक है।

तेलंगाना में नगर निगम चुनाव की तैयारी

यह रैली तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले आयोजित की गई थी। ओवैसी ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में वोट करें और AIMIM को जिताएं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में विकास की जरूरत है और AIMIM ही असली विकास ला सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक जैसी पार्टियां हैं जो सिर्फ वोट के लिए धर्म का इस्तेमाल करती हैं। ओवैसी ने कहा कि लोगों को समझदारी से काम लेना चाहिए और सही उम्मीदवार को चुनना चाहिए।

युवाओं के लिए रोजगार की मांग

ओवैसी ने युवाओं के लिए रोजगार की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करती है लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है और महंगाई आसमान छू रही है। ओवैसी ने कहा कि सरकार को युवाओं को कौशल सिखाना चाहिए और उन्हें रोजगार के अवसर देने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युवा बेरोजगार रहेंगे तो देश का भविष्य कैसे बनेगा।

ओवैसी का यह भाषण न सिर्फ हिमंत बिस्वा सरमा बल्कि पूरी भाजपा सरकार के लिए एक चुनौती है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे और संविधान की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।