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बिहार में मुस्लिम राज्यपाल ही समावेश का प्रतीक हैं: उप्र मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी का बयान

बिहार में मुस्लिम राज्यपाल ही समावेश का प्रतीक हैं: उप्र मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी का बयान
UP Minister Bihar Muslim Governor Statement – बिहार में मुस्लिम राज्यपाल होना समावेश का प्रतीक: दानिश अंसारी (FIle Photo)
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Asfi Shadab
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बिहार में मुस्लिम राज्यपाल, भाजपा का समावेशी दृष्टिकोण: दानिश अंसारी

बलिया (उत्तर प्रदेश), 30 अक्टूबर (वार्ता)।
उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनावों में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा, तो इसका यह अर्थ नहीं कि पार्टी अल्पसंख्यकों को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि “बिहार में मुस्लिम राज्यपाल की नियुक्ति ही समावेश का सबसे बड़ा उदाहरण है।”

मंत्री ने कहा कि वर्तमान में अरिफ़ मोहम्मद ख़ान बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं, और यह स्वयं दर्शाता है कि भाजपा सरकार हर समुदाय को समान अवसर प्रदान करने के अपने सिद्धांत पर कायम है।


समावेश की राजनीति को नया रूप देने का प्रयास

दानिश अंसारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति केवल चुनावी समीकरणों पर आधारित नहीं है, बल्कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र पर टिकी हुई है।
उन्होंने कहा, “किसी समुदाय को प्रतिनिधित्व देना केवल टिकट देने से नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णयों में भागीदारी से होता है। मुस्लिम राज्यपाल का चयन इस बात का प्रमाण है कि भाजपा की सोच राष्ट्रहित में सर्वसमावेशी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने कभी भी धर्म या जाति के आधार पर राजनीति नहीं की, बल्कि राष्ट्रीय एकता और विकास को सर्वोपरि रखा है।


राहुल गांधी के बयान पर मंत्री का पलटवार

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक प्रश्न पर, दानिश अंसारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।
राहुल गांधी ने कुछ दिन पूर्व बिहार के मुज़फ़्फरपुर में एक चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि “वोट पाने के लिए मोदी मंच पर नाचने को भी तैयार हैं।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दानिश अंसारी ने कहा,

“राहुल गांधी की टिप्पणियाँ उनकी निराशा और आगामी हार की झलक दिखाती हैं। जब किसी दल के पास न नीति बचती है, न दृष्टिकोण, तब वह इस प्रकार के तुच्छ बयान देता है।”

मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल केवल आलोचना की राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि भाजपा जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


अल्पसंख्यक समाज में भाजपा की पैठ मजबूत करने की रणनीति

अंसारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक, भाजपा अल्पसंख्यक समाज के हितों को प्राथमिकता देने की नीति पर कार्यरत है।
उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे कई योजनाएँ मुस्लिम युवाओं को शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रोत्साहित कर रही हैं।

उन्होंने कहा,

“भाजपा की नीति किसी समुदाय को अलग करना नहीं, बल्कि सभी को मुख्यधारा से जोड़ना है। मुस्लिम समाज में यह विश्वास लगातार बढ़ रहा है कि मोदी सरकार सबके लिए समान अवसर प्रदान कर रही है।”


बिहार चुनाव में भाजपा की रणनीति और संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने बिहार चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवार न उतारकर एक रणनीतिक संदेश दिया है—कि पार्टी अब केवल पहचान की राजनीति नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक दक्षता पर भरोसा कर रही है।
दानिश अंसारी का यह बयान उसी सोच की झलक देता है, जहाँ भाजपा अपनी नीतियों के जरिए अल्पसंख्यकों को भी आत्मसम्मान और सहभागिता का अवसर दे रही है।

उन्होंने कहा, “राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति का होना यह दर्शाता है कि भाजपा धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करती है।”


समावेश की दिशा में नई परिभाषा

दानिश अंसारी का यह बयान न केवल भाजपा की नीति स्पष्ट करता है, बल्कि विपक्ष को भी यह संकेत देता है कि समावेश केवल राजनीतिक शब्द नहीं, बल्कि व्यवहारिक नीति का हिस्सा है।
बिहार में मुस्लिम राज्यपाल की नियुक्ति, भाजपा की सांप्रदायिक संतुलन की दिशा में एक प्रतीकात्मक और ठोस पहल कही जा सकती है।


यह समाचार पीटीआई(PTI) के इनपुट के साथ प्रकाशित किया गया है।


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