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कोरियन गेम और 50 टास्क का खतरनाक जाल, आखिरी टास्क में 9वीं मंजिल से कूदी तीनों बहनें

कोरियन गेम और 50 टास्क का खतरनाक जाल, आखिरी टास्क में 9वीं मंजिल से कूदी तीनों बहनें
कोरियन गेम और 50 टास्क का खतरनाक जाल, आखिरी टास्क में 9वीं मंजिल से कूदी तीनों बहनें (Credit- @TheDesiMan_)

गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत ने तीन नाबालिग बहनों की जान ले ली। कोरियन गेम के 50वें टास्क ने बच्चियों को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया। यह घटना माता-पिता, समाज और सिस्टम के लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है।

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Dipali Kumari
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Sisters Suicide Case: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आज बुधार की सुबह जो कुछ हुआ, उसने सिर्फ एक परिवार को नहीं बल्कि पूरे देश को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है। ऑनलाइन गेमिंग की लत किस हद तक इंसान को अंधे रास्ते पर ले जा सकती है, इसकी सबसे भयावह तस्वीर इस घटना में सामने आ रही है। 15, 14 और 12 साल की तीन नाबालिग बहनें, जो आम बच्चों की तरह हंसती-खेलती जिंदगी जी रही थीं, अब इस दुनिया में नहीं हैं।

ऑनलाइन गेमिंग की लत

गाजियाबाद के जिस फ्लैट में यह परिवार रह रहा था, वहां उस रात सब कुछ सामान्य दिख रहा था। घर में मां-बाप थे, तीनों बेटियां भी अपने कमरों में थीं। लेकिन देर रात करीब 2 बजे जो हुआ, उसने सब कुछ हमेशा के लिए बदल दिया। नौवीं मंजिल से तीनों बहनों ने छलांग लगा दी।

पिता जब इस घटना को याद करते हैं तो उनकी आवाज कांप जाती है। वह लगातार यही कह रहे हैं कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि बेटियां किसी ऐसे खतरनाक खेल का हिस्सा बन चुकी हैं, जहां आखिरी टास्क मौत बनकर सामने आएगा।

कोरियन गेम और 50 टास्क का खतरनाक जाल

परिवार को बाद में पता चल रहा है कि तीनों बहनें एक कोरियन ऑनलाइन गेम खेल रही थीं। इस गेम में 50 दिनों तक 50 टास्क पूरे करने होते हैं। शुरुआत में टास्क साधारण होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ते हैं, टास्क मानसिक दबाव, डर और आत्मनियंत्रण तोड़ने वाले बनते चले जाते हैं।

50वां टास्क सबसे खौफनाक होता है—अपनी जान देना। यही वह टास्क है, जिसने तीनों मासूम बहनों की जिंदगी छीन ली।

पिता के मुताबिक, तीनों में से बीच वाली बेटी गेम में “कमांडर” की भूमिका में थी। वह गेम के निर्देशों को सबसे ज्यादा गंभीरता से ले रही थी। बड़ी और छोटी बहन उस पर भरोसा कर रही थीं और उसी के कहे अनुसार टास्क पूरा कर रही थीं।

यह सिर्फ गेम नहीं था, बल्कि एक तरह का मानसिक नियंत्रण बन चुका था। बच्चियां धीरे-धीरे अपने फैसले खुद लेना बंद कर चुकी थीं और गेम के आदेशों को ही सच मानने लगी थीं।

माफी भरा संदेश और टूटता हुआ परिवार

घटना के बाद जब परिवार ने बच्चियों के फोन देखे, तो एक संदेश ने सबको तोड़कर रख दिया। उसमें लिखा था—
“आई एम सॉरी, हम कोरियन गेम नहीं छोड़ सकते। हम मर रहे हैं। हम जा रहे हैं।”

पिता यह मान रहे हैं कि उन्हें पता था कि उनकी बेटियां मोबाइल पर गेम खेलती हैं। लेकिन यह जानकारी नहीं थी कि वह गेम इतना खतरनाक हो सकता है। आज ज्यादातर घरों में यही स्थिति बन रही है बच्चों का मोबाइल पर समय बिताना सामान्य समझा जा रहा है, लेकिन उसके कंटेंट पर नजर नहीं रखी जा रही।

समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी

गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं है। यह पूरे समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी है। ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ने वाले ऐसे खेलों पर सख्त निगरानी की जरूरत है।

विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, अकेले रहना, डर या बेचैनी—ये सब संकेत हो सकते हैं। लेकिन जब तक इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।