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प्रयागराज: एक ही गांव के चार बच्चों की डूबने से मौत, मची चीख-पुकार

प्रयागराज: एक ही गांव के चार बच्चों की डूबने से मौत, मची चीख-पुकार
एक ही गांव के चार बच्चों की डूबने से मौत

प्रयागराज के पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के कुसुआ गांव में तालाब में डूबने से चार बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। गांव में शोक का माहौल है। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

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Dipali Kumari
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Prayagraj News: प्रयागराज के ग्रामीण इलाके में आज बुधवार का दिन खुशियों के बजाय गहरे शोक के साथ शुरू हुआ। पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के कुसुआ गांव में एक तालाब चार परिवारों के लिए ऐसा जख्म बन गया, जो शायद कभी भर नहीं पाएगा। खेलते-खेलते चार बच्चों की तालाब में डूबकर मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। हर आंख नम है, हर घर में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है—आखिर ऐसा कैसे हुआ।

एक खेल, जो मौत में बदल गया

बुधवार को गांव के कुछ बच्चे रोज की तरह खेलने के लिए घर से निकले थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह खेल उनकी आखिरी खुशी बन जाएगा। बताया जा रहा है कि एक युवक और तीन बच्चे तालाब के पास खेल रहे थे। खेलते-खेलते कब वे तालाब के भीतर चले गए, किसी ने देखा तक नहीं। जब तक लोगों को कुछ समझ आता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

तालाब के किनारे बच्चों के कपड़े और चप्पल पड़े मिले। यही दृश्य अब गांववालों की आंखों में हमेशा के लिए बस गया है। बच्चे शायद नहाने या पानी के पास खेलने के इरादे से तालाब में उतरे होंगे, लेकिन गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाए। इस हादसे में जिन चार बच्चों की मौत हुई है, उनमें प्रतीक सोनकर (12), प्रिंस सोनकर (10), करण सोनकर (19) और प्रियांशु सोनकर (11) शामिल हैं। ये सभी कुसुआ गांव के ही रहने वाले थे। एक ही गांव के चार घरों में एक साथ चूल्हा ठंडा पड़ गया।

किसी मां ने अपना इकलौता बेटा खोया, तो किसी परिवार की उम्मीद हमेशा के लिए बुझ गई। गांव की गलियों में रोने की आवाजें और मातम का माहौल है। जिन बच्चों की हंसी से गांव गूंजता था, आज उनकी यादें ही रह गई हैं।

गांव में कोहराम और भीड़

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास और सल्लाहपुर पुलिस चौकी पर जमा हो गए। हर कोई जवाब चाहता है। हर कोई जानना चाहता है कि यह सिर्फ हादसा था या इसके पीछे कुछ और भी है।

ग्रामीणों का कहना है कि तालाब काफी गहरा है और उसके चारों ओर किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। पहले भी यहां छोटे-मोटे हादसे होते रहे हैं, लेकिन किसी ने कभी गंभीरता से नहीं सोचा।

परिजनों की पीड़ा और हत्या की आशंका

मृत बच्चों के परिजनों का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कुछ परिजनों ने इस घटना को हादसा मानने से इनकार किया है और हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि चारों बच्चों का एक साथ डूबना कई सवाल खड़े करता है। परिजन चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

परिजनों का आरोप है कि अगर यह हादसा है, तो सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई। और अगर हादसा नहीं है, तो दोषियों को सजा क्यों न मिले।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल की स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि हत्या या साजिश की कोई भी आशंका पुख्ता होती है, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।