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पश्चिम बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, कोयला तस्करी मामले में एक साथ 9 ठिकानों पर रेड

पश्चिम बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, कोयला तस्करी मामले में एक साथ 9 ठिकानों पर रेड
पश्चिम बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, कोयला तस्करी मामले में एक साथ 9 ठिकानों पर रेड

पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी मामले की जांच में ईडी ने 3 फरवरी 2026 को नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। काले धन, हवाला नेटवर्क और अवैध बालू खनन के तार सामने आ रहे हैं। जांच अभी जारी है।

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Dipali Kumari
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ED Raid: पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर अपनी जांच तेज कर दी है। मंगलवार, 3 फरवरी 2026 की सुबह ईडी ने राज्य के कई अहम शहरों में एक साथ छापेमारी अभियान शुरू किया। कोलकाता, दुर्गापुर, आसनसोल, बर्द्धमान समेत कुल नौ ठिकानों पर केंद्रीय एजेंसी की टीमें एक ही समय पर पहुंचीं, जिससे प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में हलचल मच गई।

यह कार्रवाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोयला तस्करी से जुड़े काले धन के उस नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश है, जो वर्षों से परत दर परत छिपा हुआ माना जा रहा है।

काले धन और हवाला नेटवर्क पर जांच का फोकस

सूत्रों के अनुसार, ईडी की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कोयला तस्करी से अर्जित भारी मात्रा में धन के लेन-देन के तरीकों का पता लगाना है। जांच एजेंसी को संदेह है कि तस्करी से कमाई गई रकम को सीधे बैंकिंग सिस्टम में लाने के बजाय हवाला नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया।

ईडी की टीमें डिजिटल साक्ष्य, बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खंगाल रही हैं, ताकि यह समझा जा सके कि पैसा कहां से आया, किन रास्तों से गया और आखिरकार किसके पास पहुंचा।

दुर्गापुर में बालू कारोबारियों के ठिकानों पर दबिश

कोलकाता के अलावा दुर्गापुर इस छापेमारी का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। मंगलवार सुबह करीब छह बजे से सेपको टाउनशिप में स्थित एक बालू कारोबारी के आवास पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसके साथ ही सिटी सेंटर इलाके की आंबेडकर सरणी स्थित एक अन्य संदिग्ध घर की भी गहन जांच की जा रही है।

पांडवेश्वर और कांकसा क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास मौजूद ठिकानों पर भी ईडी की टीमें पहुंचीं। इन इलाकों को पहले से ही अवैध खनन और परिवहन के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है।

अवैध बालू खनन से जुड़ता दिख रहा कोयला तस्करी का मामला

जांच में सामने आया है कि जिन कारोबारियों के यहां छापेमारी की गई है, वे अजय और दामोदर नदी से बालू निकालने के काम से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि वैध टेंडर मिलने की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किया गया।

जानकारी के मुताबिक, एक ही चालान का बार-बार इस्तेमाल कर बालू की ढुलाई की गई। बीरभूम जिले के चालान दिखाकर पश्चिम बर्द्धमान जिले से बालू की तस्करी की जाती रही। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि अवैध कमाई का एक समानांतर तंत्र भी खड़ा हो गया।

कम समय में बनाई गई अकूत संपत्ति

ईडी को शक है कि इन अवैध गतिविधियों के जरिए कुछ कारोबारियों ने बहुत कम समय में अकूत संपत्ति अर्जित की। महंगी अचल संपत्तियां, नकदी लेन-देन और संदिग्ध निवेश इस जांच के केंद्र में हैं।

जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि क्या इस अवैध कमाई का इस्तेमाल किसी राजनीतिक या प्रभावशाली नेटवर्क को मजबूत करने में किया गया। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला बन गया है।

पहले से ही विवादों में रहा है कोयला तस्करी मामला

पश्चिम बंगाल का कोयला तस्करी मामला पहले भी कई बार राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है। इसमें बड़े नामों, अफसरों और कारोबारियों के तार जुड़ने के आरोप लगते रहे हैं। हर नई कार्रवाई के साथ यह मामला और गहराता जा रहा है।

ईडी की मौजूदा छापेमारी यह संकेत देती है कि एजेंसी अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के मूड में है, न कि केवल सतही कार्रवाई कर मामले को बंद करने के।

आगे क्या निकलकर आएगा, इस पर टिकी नजर

फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के जब्त होने की खबर है। आने वाले दिनों में पूछताछ, समन और संभावित गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह कार्रवाई सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं मानी जा रही, क्योंकि कोयला और बालू तस्करी जैसे मामलों में अंतरराज्यीय नेटवर्क की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि यह जांच कितनी गहराई तक जाती है और किन-किन नामों का खुलासा होता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।