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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

Mamata Banerjee EC Allegations: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी
Mamata Banerjee EC Allegations: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी (File Photo)

Mamata Banerjee EC Allegations: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि TMC विधायकों वाले क्षेत्रों में 40,000 से 1 लाख तक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही है।

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पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और TMC में टकराव

Mamata Banerjee EC Allegations: पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाने का काम पक्षपातपूर्ण तरीके से किया जा रहा है। यह विवाद अब इतना बढ़ गया है कि TMC मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही है।

दिल्ली में हुई बैठक में ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच काफी तीखी बहस हुई। इस बैठक के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के नाम पर लोगों के मतदान के अधिकार छीने जा रहे हैं। यह पूरा मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

TMC सांसद ने की महाभियोग की बात

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से मतदाता सूची की सफाई की जा रही है, वह पूरी तरह से गलत है। यह देश के हर नागरिक के मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है।

कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि TMC अन्य विपक्षी दलों से संपर्क करेगी और इस मुद्दे पर एक साझा मोर्चा बनाने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल पश्चिम बंगाल का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है। अगर चुनाव आयोग इस तरह से काम करेगा तो लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार खतरे में पड़ जाएगा।

ममता ने लगाए चुनिंदा नाम हटाने के आरोप

ममता बनर्जी ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में BJP के विधायक हैं, वहां केवल 3,000 से 4,000 नाम हटाए जा रहे हैं। लेकिन जिन इलाकों में TMC के विधायक हैं, वहां 40,000 से लेकर 1 लाख तक नाम काटे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने ही विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अब तक 40,000 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में 1 लाख नाम हटाने का लक्ष्य रखा गया है। ममता ने कहा कि यह साफ तौर पर साजिश है और इसका मकसद चुनाव में TMC को नुकसान पहुंचाना है।

58 लाख नाम एकतरफा हटाने का आरोप

ममता बनर्जी ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 58 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से एकतरफा तरीके से हटा दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह काम बिना निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों से सलाह लिए किया गया। यह बहुत गंभीर बात है क्योंकि स्थानीय अधिकारी ही बेहतर तरीके से जानते हैं कि कौन असली मतदाता है और कौन नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तार्किक विसंगति के नाम पर लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को भी सुनवाई के लिए बुलाया गया था। ममता ने कहा कि अगर अमर्त्य सेन जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति को परेशान किया जा सकता है, तो आम लोगों का क्या हाल होगा।

चुनाव से ठीक पहले SIR क्यों

ममता बनर्जी ने SIR की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्या 2-3 महीनों में बिना किसी योजना के इतना बड़ा काम करना संभव है। यह सवाल बहुत जरूरी है क्योंकि मतदाता सूची की सफाई एक लंबी और सावधानीपूर्ण प्रक्रिया होती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव वाले चार राज्यों में से तीन राज्यों में SIR किया जा रहा है, लेकिन BJP शासित असम में नहीं। उन्होंने पूछा कि अगर यह प्रक्रिया जरूरी है तो असम में क्यों नहीं हो रही। इससे साफ होता है कि यह काम केवल विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में ही किया जा रहा है।

विपक्षी दलों का एकजुट होना जरूरी

ममता बनर्जी ने कहा कि यह केवल पश्चिम बंगाल का मुद्दा नहीं है। जहां भी विपक्षी दल सत्ता में हैं, वहां यह सब हो रहा है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों। लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी को मिलकर आवाज उठानी होगी।

TMC ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही अन्य विपक्षी दलों से संपर्क करेगी। इसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हो सकते हैं। अगर सभी विपक्षी दल एकजुट होकर महाभियोग की मांग करते हैं तो यह एक बड़ा राजनीतिक दबाव बन सकता है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

यह पूरा मामला चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। चुनाव आयोग को संविधान के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। लेकिन अगर किसी राज्य में चुनिंदा तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं तो यह चिंता का विषय है।

ममता बनर्जी के आरोप गंभीर हैं और इन पर गहराई से जांच होनी चाहिए। अगर सच में पक्षपात हो रहा है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। चुनाव आयोग को इन आरोपों का जवाब देना चाहिए और साफ करना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो रही है।

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं

Mamata Banerjee EC Allegations: कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और गर्म होगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव बहुत करीब हैं और ऐसे में यह विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ममता बनर्जी अपने मतदाताओं को जोड़ने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही हैं।

वहीं कुछ विश्लेषक मानते हैं कि अगर वाकई में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। मतदाता सूची की सफाई जरूरी है लेकिन इसे पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। हर मतदाता को अपना नाम जांचने और आपत्ति दर्ज करने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

आगे क्या होगा

अभी देखना यह है कि TMC महाभियोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है या नहीं। महाभियोग लाने के लिए संसद में पर्याप्त संख्या चाहिए। विपक्षी दलों को मिलकर काम करना होगा। अगर महाभियोग की नोटिस दी जाती है तो यह एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग को भी इन आरोपों का जवाब देना होगा। उन्हें साफ करना होगा कि SIR की प्रक्रिया कैसे की जा रही है और क्या यह सभी राज्यों में एक समान है। पारदर्शिता और निष्पक्षता ही लोकतंत्र की बुनियाद है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव अब केवल राज्य की राजनीति का मामला नहीं रहे हैं। यह पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।