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मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी के नाम को मिटाने का प्रयास, मनरेगा खत्म कर नई योजना लाने पर कांग्रेस सेवा दल का विरोध

मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी के नाम को मिटाने का प्रयास, मनरेगा खत्म कर नई योजना लाने पर कांग्रेस सेवा दल का विरोध
MGNREGA Scrapped: मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी के नाम को हटाने का प्रयास, कांग्रेस का विरोध (File Photo)

मोदी सरकार ने MGNREGA को बंद कर नई योजना VB-G Ram G लाने का फैसला किया। कांग्रेस सेवा दल ने इसे महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की साजिश बताते हुए कोलकाता में विरोध प्रदर्शन किया। MGNREGA ने कोविड के दौरान करोड़ों गरीबों को रोजगार दिया था। विपक्ष ने इस फैसले को गरीबों के साथ धोखा बताया है।

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Asfi Shadab
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जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने खुद को बहुत बड़ा गांधी भक्त दिखाने की कोशिश की थी। इसका कारण यह था कि महात्मा गांधी गुजराती थे और गुजरात में उनके भक्तों की संख्या नरेंद्र मोदी के भक्तों से भी ज्यादा है। हालांकि नरेंद्र मोदी की गांधी भक्ति केवल स्वच्छ भारत मिशन में महात्मा गांधी के चश्मे की तस्वीर इस्तेमाल करने तक ही सीमित रही।

लेकिन आरएसएस का DNA कहां जाएगा? नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने 1994 में एक साक्षात्कार में आरएसएस नेतृत्व के इस लगातार प्रचार का विरोध किया था कि नाथूराम गोडसे आरएसएस से नहीं थे। उन्होंने कहा था, हम दोनों भाई आरएसएस के ही लोग थे। नाथूराम ने सरसंघचालक गोलवलकर का नाम गांधी हत्या के बयान में इसलिए इस्तेमाल नहीं किया ताकि गोलवलकर को बचाया जा सके।

महात्मा गांधी का नाम बीजेपी के लिए घृणा का विषय

MGNREGA यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम या जिसे 100 दिन का काम कहते हैं, उसने गंभीर आर्थिक संकट के समय भारत को बचाया है। सिर्फ यूपीए के समय में ही नहीं बल्कि कोविड के दौरान भी इस योजना ने गरीब परिवारों को सहारा दिया।

लेकिन अब बीजेपी सरकार ने MGNREGA को बंद करके VB-G Ram G यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन नाम की नई योजना लाने के लिए संसद में बिल पेश किया है।

क्यों यह नई योजना असल में 100 दिन के काम को खत्म करने की साजिश है

नरेंद्र मोदी सरकार क्या सच में 100 दिन के काम को 125 दिन के काम में बदलना चाहती है? जवाब है नहीं। नरेंद्र मोदी हमेशा से कोई न कोई छोटा फायदा दिखाकर असल में बहुत बड़ा नुकसान करने का रास्ता तैयार करते हैं।

उन्होंने आतंकवाद खत्म करने और काले धन से मुक्ति जैसे फायदे दिखाकर नोटबंदी की थी। बाद में पता चला कि भारत की अर्थव्यवस्था को ही बर्बाद कर दिया। पार्थ चटर्जी जैसे लोगों के घर से सभी नरेंद्र मोदी के छपाए हुए नोट निकले। बाद में 2000 रुपये के नोट को भी नरेंद्र मोदी ने बंद कर दिया। अब इस बारे में कोई बात करे तो चुप बैठ जाते हैं।

आतंकवाद कम करने के नाम पर धारा 370 खत्म कर दी। उसके बाद ही पुलवामा और पहलगाम में हमले हुए।

भारत को 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का वादा करके अडानी के पीछे खड़े हो गए। आज 2025 खत्म होने वाला है। भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। अभी भी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बन पाया बल्कि पांचवें स्थान पर ही बैठा है।

मोदी सरकार में सभी सूचकांकों में पिछड़ा भारत

नरेंद्र मोदी के समय में मानव विकास सूचकांक, लैंगिक असमानता सूचकांक, स्वास्थ्य सूचकांक, पर्यावरण सूचकांक, मीडिया स्वतंत्रता सूचकांक, सुरक्षा सूचकांक किसी भी सूचकांक में भारत डॉ मनमोहन सिंह के समय की तुलना में अच्छा नहीं कर रहा है।

नरेंद्र मोदी के समय में ही दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई। जो 4 श्रम कानून लाए हैं वे श्रमिक सुरक्षा के खिलाफ हैं।

ठीक उसी तरह यह VB-G Ram G भी असल में MGNREGA को बंद करने का प्रयास है। यह योजना महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की साजिश है।

कांग्रेस सेवा दल का जोरदार विरोध प्रदर्शन

MGNREGA बंद करने के खिलाफ प्रतिरोध जताते हुए आज राज्य INTUC सेवादल परिवार ने एक जोरदार आंदोलन की शुरुआत की। कोलकाता में चर्च लेन स्थित पेट्रोल पंप स्टेशन से 1 नंबर किरण शंकर राय रोड होते हुए नए सचिवालय भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया।

राज्य INTUC सेवादल के अध्यक्ष प्रमोद पांडेय ने कहा कि मोदी सरकार महात्मा गांधी के नाम से नफरत करती है। MGNREGA ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को रोजगार दिया है। यह योजना गरीबों की जीवनरेखा है।

संकर हजरा ने कहा कि सरकार केवल नाम बदलकर नई योजना ला रही है लेकिन असल में इसका मकसद महात्मा गांधी के नाम को मिटाना है। यह देश के साथ धोखा है।

MGNREGA ने कैसे बचाया देश को

MGNREGA को 2005 में यूपीए सरकार ने शुरू किया था। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार गारंटी के साथ दिया जाता है। यह योजना खासकर गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई।

कोविड महामारी के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए थे तब MGNREGA ने उन्हें सहारा दिया था। लेकिन अब मोदी सरकार इस योजना को खत्म करना चाहती है।

विपक्ष ने भी उठाई आवाज

कांग्रेस सेवा दल के साथ कई विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार का असली मकसद गरीबों की मदद करना नहीं बल्कि महात्मा गांधी के नाम को मिटाना है। विपक्ष ने मांग की है कि MGNREGA को जारी रखा जाए और अगर सरकार सुधार करना चाहती है तो योजना में बदलाव करे लेकिन इसे बंद न करे।यह साफ है कि मोदी सरकार का यह कदम सिर्फ एक योजना बदलने का नहीं है बल्कि महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने का प्रयास है। MGNREGA ने देश के करोड़ों परिवारों को रोजगार दिया है और यह गरीबों की आखिरी उम्मीद है। इसे बंद करना देश के गरीबों के साथ धोखा होगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।