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बंगाल में अपर प्राइमरी शिक्षक पद के लिए इंटरव्यू की मांग, 1300 दिनों से जारी है धरना

बंगाल में अपर प्राइमरी शिक्षक पद के लिए इंटरव्यू की मांग, 1300 दिनों से जारी है धरना
Upper Primary Teacher Interview Demand: बंगाल में 1300 दिनों से जारी धरना, नबन्ना की ओर बढ़ेंगे प्रदर्शनकारी (Pinterest Photo)

पश्चिम बंगाल में अपर प्राइमरी शिक्षक पद के उम्मीदवार 1300 दिनों से धरने पर बैठे हैं। 11 साल से इंटरव्यू की मांग कर रहे ये उम्मीदवार अब शांतिपूर्ण नबन्ना अभियान चलाएंगे। शियालदह से शुरू होकर मातंगिनी हाजरा प्रतिमा तक मार्च निकालेंगे और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। उम्मीदवार गजट नियमों के अनुसार अपडेट सीट पर इंटरव्यू और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

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Asfi Shadab
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कोलकाता की सड़कों पर एक बार फिर नौकरी की मांग को लेकर आवाज उठने वाली है। अपर प्राइमरी शिक्षक पद के लिए इंटरव्यू से वंचित उम्मीदवार अब शांतिपूर्ण तरीके से नबन्ना अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं। ये वे उम्मीदवार हैं जो पिछले 11 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और 16 जून 2022 से शहीद मातंगिनी हाजरा की प्रतिमा के पास लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।

इंटरव्यू बंचित अपर प्राइमरी नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों का यह संघर्ष अब 1300 दिनों को पार कर चुका है। इन उम्मीदवारों की मुख्य मांग है कि 2016 के अपर प्राइमरी गजट के नियम 8.3(b) के अनुसार अपडेट सीट पर इंटरव्यू लिया जाए और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए।

कोलकाता में होगा शांतिपूर्ण मोरण बाचन कार्यक्रम

उम्मीदवारों ने कोलकाता में एक व्यापक कार्यक्रम की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के तहत शियालदह स्टेशन स्मार्ट बाजार के सामने एकत्रित होकर प्रदर्शनकारी एसएन बनर्जी रोड के रास्ते धर्मतला डोरिना क्रॉसिंग को पार करते हुए शहीद मातंगिनी हाजरा की प्रतिमा तक मार्च करेंगे।

यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन होगा जिसमें उम्मीदवार अपनी 11 साल की पीड़ा को सड़कों पर उतारेंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करना और अपनी मांगों को लेकर जनता में जागरूकता फैलाना है।

मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी ज्ञापन प्रति

शहीद मातंगिनी हाजरा की प्रतिमा के पास कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पांच प्रतिनिधियों का एक दल पुलिस प्रशासन की मदद से नबन्ना स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय जाएगा। यह प्रतिनिधि मंडल माननीया मुख्यमंत्री को 11 साल की जीवन यंत्रणा के बारे में बताते हुए एक ज्ञापन सौंपेगा।

प्रतिनिधि मंडल के नबन्ना पहुंचने का अनुमानित समय दोपहर 3 बजे रखा गया है। उम्मीदवार उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री उनकी समस्याओं को सुनेंगी और उनके हक की लड़ाई में सकारात्मक पहल करेंगी।

11 साल की प्रतीक्षा का दर्द

ये उम्मीदवार पिछले 11 साल से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इन वर्षों में कई उम्मीदवारों की उम्र नौकरी की सीमा से बाहर हो चुकी है। कुछ उम्मीदवारों का भविष्य अंधकारमय हो गया है क्योंकि वे इस इंतजार में अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष गंवा चुके हैं।

इन उम्मीदवारों का कहना है कि साल दर साल बीत रहे हैं लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण की, योग्यता सिद्ध की, लेकिन इंटरव्यू के अवसर से वंचित रहे।

उम्मीदवारों की प्रमुख मांगें

इन उम्मीदवारों की मुख्य मांग है कि अपर प्राइमरी गजट 2016 के नियम 8.3(b) के अनुसार इंटरव्यू के 15 दिन पहले की अपडेट रिक्तियों पर इंटरव्यू लिया जाए और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए।

इसके अलावा उम्मीदवारों का कहना है कि शिक्षक और विद्यार्थी का अनुपात 1:35 होना चाहिए। अपर प्राइमरी (कक्षा 5 से 8) के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए और स्कूलों को बंद होने से बचाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी है।

1300 दिनों का संघर्ष

16 जून 2022 से शहीद मातंगिनी हाजरा की प्रतिमा के पास अपडेट सीट पर इंटरव्यू और नियुक्ति की न्यायसंगत मांग को लेकर ये उम्मीदवार धरने पर बैठे हैं। अब यह संघर्ष 1300 दिनों को पार कर चुका है।

इस लंबे संघर्ष के दौरान उम्मीदवारों ने गर्मी, बारिश और सर्दी सभी मौसमों का सामना किया है। उन्होंने अपने परिवार से दूर रहकर, अपनी आजीविका को दांव पर लगाकर यह लड़ाई लड़ी है।

उम्मीदवारों का कहना है कि उनके जीवन के 11 अमूल्य वर्ष किसकी गलती से व्यर्थ हो गए, इसका उत्तर भी वे चाहते हैं। वे इस अपूरणीय क्षति के लिए प्रतिकार की मांग कर रहे हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव

उम्मीदवारों का तर्क है कि शिक्षकों की कमी से न केवल उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है बल्कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक न होने के कारण बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

अपर प्राइमरी स्तर की शिक्षा बच्चों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस समय उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए जो उनके भविष्य की नींव रखे। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।

न्यायालय से न्याय की अपेक्षा

उम्मीदवारों का कहना है कि वे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से मानवीय दृष्टिकोण से न्याय पाने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि न्यायपालिका उनकी पीड़ा को समझेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी।

उम्मीदवारों ने कहा है कि जिन लोगों की नौकरी की उम्र समाप्त हो चुकी है और जिनका भविष्य अंधकारमय हो गया है, उनकी नौकरी की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार को इन योग्य उम्मीदवारों को नौकरी देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री से मानवीय हस्तक्षेप की अपील

उम्मीदवारों ने माननीया मुख्यमंत्री और सबकी प्रिय दीदी से मानवीय हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि 11 साल के अंधकारमय और कलंकित अध्याय का अंत करने के लिए मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप जरूरी है।

उम्मीदवारों का कहना है कि उनके बचने का एक ही रास्ता है – गजट के नियमों के अनुसार अपडेट सीट पर इंटरव्यू लेकर उन्हें नियुक्ति दी जाए। वे मुख्यमंत्री से उम्मीद कर रहे हैं कि वह उनकी समस्याओं को समझेंगी और उनके हक में फैसला लेंगी।

सरकार के सामने चुनौती

यह मुद्दा अब पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ योग्य उम्मीदवार अपने हक की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

सरकार को इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान खोजना होगा। 1300 दिनों से चल रहे इस आंदोलन को अनदेखा करना अब संभव नहीं है। उम्मीदवारों की मांगें वाजिब हैं और उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।

अपर प्राइमरी शिक्षक पद के इंटरव्यू से वंचित उम्मीदवारों का यह संघर्ष न केवल नौकरी की मांग है बल्कि यह एक न्यायसंगत मांग है। 11 साल की प्रतीक्षा के बाद भी जब कोई समाधान नहीं मिलता तो निराशा स्वाभाविक है।

आगामी नबन्ना अभियान से उम्मीदवारों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी। वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखेंगे और सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करेंगे। यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।