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संसद में ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ के नारे रोकने के खिलाफ कोलकाता में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

संसद में ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ के नारे रोकने के खिलाफ कोलकाता में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
Vande Mataram Jai Hind Ban: लोकसभा में नारे रोकने के खिलाफ कोलकाता में कांग्रेस का जोरदार विरोध प्रदर्शन (File Photo)

लोकसभा में 'वंदे मातरम' और 'जय हिंद' नारों पर रोक के खिलाफ कोलकाता में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस ने हजरा मोड़ से यादव बाबू बाजार तक रैली निकाली। स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक इन नारों को राज्यसभा सचिव के आदेश से रोकने के फैसले को कांग्रेस ने देश की परंपरा का अपमान बताया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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देश की संसद में ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय नारों को रोकने के फैसले को लेकर देशभर में विरोध की लहर उठ खड़ी हुई है। इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी ने हजरा मोड़ से लेकर यादव बाबू बाजार तक एक विशाल रैली निकालकर अपना गुस्सा जताया।

यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ जब लोकसभा में राज्यसभा सचिव के एक फैसले से ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे ऐतिहासिक नारों पर रोक लगाने की बात सामने आई। इन नारों का भारत के स्वतंत्रता संग्राम से गहरा नाता है और इन्हें रोकने का फैसला कई राजनीतिक दलों के गले नहीं उतर रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम की धरोहर हैं ये नारे

‘वंदे मातरम’ केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा रहा है। सन 1870 में महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में इस गीत को लिखा था। यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य मंत्र बन गया था।

जब भी कोई क्रांतिकारी अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाता था, तो ‘वंदे मातरम’ का नारा उसकी ताकत बन जाता था। इस गीत ने हजारों युवाओं को देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर करने की प्रेरणा दी। आज जब इस गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, उसी समय संसद में इसके नारे पर रोक लगाने की बात सामने आना दुखद है।

नेताजी की देन है ‘जय हिंद’

वहीं ‘जय हिंद’ का नारा भारत के महान क्रांतिकारी नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की देन है। उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी जो धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित थी। इस फौज के सैनिक ‘जय हिंद’ के नारे से ही प्रेरित होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते थे।

यह नारा केवल एक युद्ध घोष नहीं था बल्कि यह एक ऐसा संदेश था जो सभी धर्मों और जातियों के लोगों को एक सूत्र में बांधता था। नेताजी ने इस नारे के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया था। ऐसे महान नारे को संसद में बोलने पर रोक लगाना देश के इतिहास और परंपरा का अपमान माना जा रहा है।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी ने इस फैसले के खिलाफ एक भव्य विरोध मार्च आयोजित किया। यह रैली हजरा मोड़ से शुरू होकर यादव बाबू बाजार तक गई। रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर इस फैसले की निंदा की। उन्होंने नारे लगाते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय नारों को कभी दबाया नहीं जा सकता। ये नारे हमारी आजादी की पहचान हैं और इन्हें हर हाल में जिंदा रखा जाएगा।

कांग्रेस नेता ने दिया बयान

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के सभापति प्रदीप प्रसाद ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिन नारों ने हमें आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई, उन्हें आज संसद में बोलने पर रोक लगाई जा रही है। यह देश के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।

उन्होंने आगे कहा कि राज्यसभा सचिव के एक कलम के इशारे पर ऐसे महत्वपूर्ण नारों को बंद करने का आदेश देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। कांग्रेस पार्टी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग करती है।

राजनीतिक घमासान

इस मुद्दे को लेकर देशभर में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दल इस फैसले को सरकार की तानाशाही बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह फैसला देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है। विपक्षी दल एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और जनता का समर्थन मांग रहे हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

आम जनता भी इस फैसले से नाखुश दिख रही है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जता रहे हैं और ‘वंदे मातरम’ तथा ‘जय हिंद’ के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। कई लोगों ने इसे देश की सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया है।

कोलकाता के कई नागरिकों ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि ये नारे हमारी पहचान हैं और इन्हें किसी भी हालत में खत्म नहीं होने दिया जाएगा।

आगे की राह

यह मुद्दा संसद में भी गूंजने की संभावना है। विपक्षी दल इस मामले को सदन में उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार इस फैसले पर स्पष्टीकरण दे और इसे तुरंत वापस ले।

कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे। पार्टी के कई नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का संकल्प लिया है।

कोलकाता में हुआ यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे नारे केवल शब्द नहीं बल्कि हमारी भावनाओं और इतिहास से जुड़े हुए हैं। इन्हें दबाने की कोशिश कभी सफल नहीं हो सकती।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।