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श्रम कोड रद्द करने की मांग पर देशव्यापी हड़ताल, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान और प्रशासनिक चुनौतियां

Labour Code Strike: श्रम कोड रद्द करने की मांग पर देशव्यापी हड़ताल, बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल
Labour Code Strike: श्रम कोड रद्द करने की मांग पर देशव्यापी हड़ताल, बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल (FB Photo)

Labour Code Strike: देशभर में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने श्रम कोड रद्द करने की मांग पर हड़ताल का आह्वान किया। पश्चिम बंगाल में निर्मला-अभिषेक के बीच तीखी बहस, बेलडांगा हिंसा में सुप्रीम कोर्ट ने NIA जांच बरकरार रखी। मतदाता सूची से 58 लाख नाम हटे, कोलकाता नगर निगम वित्तीय संकट में और सरकारी बसों की कमी से यात्री परेशान।

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देश में श्रम कानून को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। AIUTUC समेत दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने श्रम कोड रद्द करने की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। इस बीच पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक मोर्चे पर कई अहम मुद्दे चर्चा में हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और तृणमूल नेता अभिषेक बंद्योपाध्याय के बीच तीखी नोकझोंक से लेकर बेलडांगा हिंसा मामले में NIA जांच तक, राज्य की राजनीति गर्म है।

देशव्यापी हड़ताल का असर कितना होगा

श्रम कोड को रद्द करने की मांग को लेकर दस बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एकजुट होकर हड़ताल का ऐलान किया है। AIUTUC के नेतृत्व में यह हड़ताल देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने भी इस हड़ताल को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। मजदूर संगठनों का कहना है कि नया श्रम कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकार कमजोर होंगे। हड़ताल से उत्पादन, परिवहन और सेवा क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका है। खासकर औद्योगिक राज्यों में इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।

फॉरवर्ड ब्लॉक का पार्टी छोड़ने वालों को वापसी का आह्वान

पश्चिम बंगाल में फॉरवर्ड ब्लॉक ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को वापस आने का आह्वान किया है। इनमें अली इमरान रामज उर्फ विक्टर जैसे नेता शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन न होने के बाद वामपंथी दल कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी छोड़ चुके नेताओं को वापस बुलाने की यह कोशिश वाम दलों की नई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बना रहे हैं।

निर्मला सीतारमण और अभिषेक बंद्योपाध्याय के बीच तीखी बहस

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बंद्योपाध्याय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक ने अपने बयान में सांसदों को बेवकूफ बनाया है। निर्मला ने अभिषेक के बयान के संदर्भ में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी हमला किया। उन्होंने बंगाल में लगातार हो रहे बलात्कार की घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर दो तरह के भारत का जिक्र करते हुए निर्मला को करारा जवाब दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ ही इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी बढ़ती जाएगी।

बेलडांगा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पश्चिम बंगाल सरकार को बेलडांगा हिंसा मामले में बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने NIA जांच और केंद्रीय बलों की तैनाती के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला राज्य सरकार के लिए चिंताजनक है। बेलडांगा में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटना ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच को मंजूरी दे दी है, तो यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। राज्य सरकार पर दबाव बढ़ना तय है।

हुमायूं की विवादास्पद पदयात्रा को मंजूरी

नदिया जिले में हुमायूं की पदयात्रा को प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। यह पदयात्रा पलाशी पाड़ा से बाबरी मस्जिद निर्माण स्थल तक 22 किलोमीटर की है। दिलचस्प बात यह है कि यह पदयात्रा उच्च माध्यमिक परीक्षा के पहले दिन निकाली जा रही है। जबकि बीजेपी की सभाओं और रैलियों को अक्सर प्रशासन की तरफ से अनुमति नहीं मिलती। इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासन का पक्षपातपूर्ण रवैया बताया है।

मतदाता सूची से 58 लाख नाम हटने से बूथों की संख्या में कमी

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से 58 लाख नामों को हटा दिया है। इसके चलते मतदान बूथों की संख्या में भी कमी आ सकती है। पहले 94 हजार बूथ बनाने की योजना थी, लेकिन अब यह संख्या कम हो सकती है। हालांकि बूथों की संख्या कम होने से पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराना आसान होगा। इससे निष्पक्ष चुनाव कराने में मदद मिलेगी। लेकिन सत्तारूढ़ दल के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कोलकाता नगर निगम का बजट और वित्तीय संकट

शुक्रवार को विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता नगर निगम का आखिरी बजट पेश किया जाएगा। मेयर ने खुद वित्तीय संकट की बात स्वीकार की है। इससे मेला, खेल और विभिन्न भत्तों पर असर पड़ सकता है। सवाल यह है कि अगर नगर निगम के पास पैसे नहीं हैं, तो नागरिक सेवाएं कैसे दी जाएंगी। शहर के विकास कार्य और रखरखाव पर भी इसका असर पड़ेगा।

सरकारी बसों की कमी से यात्रियों को परेशानी

फिटनेस सर्टिफिकेट न होने के कारण फरवरी की शुरुआत से ही 250 से 300 बसें सड़कों से गायब हो गई हैं। माध्यमिक परीक्षा खत्म हो चुकी है और अब उच्च माध्यमिक परीक्षा चल रही है। जहां 1000 सरकारी बसें चलनी चाहिए, वहां केवल 450 बसें ही चल रही हैं। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग पूरी तरह से ठप हो जाएगा।

बांग्लादेश में चुनाव

पड़ोसी देश बांग्लादेश में आज चुनाव हो रहे हैं। यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भारत के लिए भी बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और सीमा से जुड़े कई मुद्दे हैं।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल अपनी रणनीति बना रहे हैं। प्रशासनिक मोर्चे पर भी कई चुनौतियां हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर और भी ज्यादा बहस होगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।