Rashtra Bharat Logo

कोलकाता के राजारहाट इलाके में स्थित अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

कोलकाता के राजारहाट इलाके में स्थित अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
BC Roy Hospital Kolkata: अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों में आक्रोश

BC Roy Hospital Kolkata: कोलकाता के राजारहाट स्थित बीसी रॉय अस्पताल में डेढ़ साल के बच्चे की मां की गोद में मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि सर्दी, खांसी और दस्त से पीड़ित बच्चे को समय पर भर्ती नहीं किया गया। बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में तनाव फैल गया और परिजनों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

कोलकाता के राजारहाट इलाके में स्थित बीसी रॉय अस्पताल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। न्यू टाउन के रहने वाले एक परिवार का डेढ़ साल का मासूम बच्चा अस्पताल परिसर में ही मां की गोद में दम तोड़ गया। परिजनों का आरोप है कि समय पर भर्ती न करने और लापरवाही के कारण बच्चे की जान चली गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने हंगामा काट दिया।

बीमार बच्चे को पहले दिन अस्पताल लाया गया था

राजारहाट के न्यू टाउन इलाके में रहने वाले इस परिवार के डेढ़ साल के बच्चे को सर्दी, खांसी और दस्त की शिकायत हो गई थी। बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे कल यानी मंगलवार को बीसी रॉय अस्पताल लेकर आए थे। वहां डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की और ओआरएस का घोल पिलाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने कहा कि अगर बच्चे की हालत और खराब हो जाए तो अगले दिन फिर से अस्पताल ले आएं।

BC Roy Hospital Kolkata: अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों में आक्रोश
BC Roy Hospital Kolkata: अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों में आक्रोश

दूसरे दिन फिर अस्पताल लाया गया बच्चा

परिजनों के मुताबिक रात भर बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं आया बल्कि स्थिति और गंभीर हो गई। बच्चे को लगातार उल्टी और दस्त हो रहे थे। इस वजह से बुधवार यानी आज सुबह परिवार वाले फिर से बच्चे को लेकर बीसी रॉय अस्पताल पहुंचे। परिजनों का कहना है कि इस बार बच्चे की हालत काफी गंभीर थी और उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी।

अस्पताल ने नहीं किया भर्ती

परिजनों ने आरोप लगाया है कि सुबह अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती नहीं किया। बच्चे की मां अपने बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल परिसर में इंतजार करती रही। परिजनों ने कई बार डॉक्टरों से गुहार लगाई कि बच्चे की हालत बहुत खराब है, उसे जल्दी से भर्ती करके इलाज शुरू किया जाए। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मां की गोद में तड़प-तड़पकर हुई मौत

परिजनों के अनुसार लंबे इंतजार के बाद बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई। मां की गोद में ही बच्चा तड़पने लगा और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। जब तक डॉक्टर या अस्पताल स्टाफ कोई व्यवस्था करता, तब तक बच्चे की जान जा चुकी थी। मां की गोद में अपने मासूम बच्चे को मरते देखना परिवार के लिए बेहद दर्दनाक रहा।

BC Roy Hospital Kolkata: अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों में आक्रोश
BC Roy Hospital Kolkata: अस्पताल में भर्ती न होने से डेढ़ साल के बच्चे की मौत, परिजनों में आक्रोश

अस्पताल परिसर में फैला तनाव

बच्चे की मौत के बाद परिजनों में गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अगर समय पर बच्चे को भर्ती करके इलाज शुरू किया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। परिजनों का रोष देखकर अस्पताल प्रशासन ने पुलिश को बुला लिया।

पुलिश के साथ हुई धक्का-मुक्की

पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। शोक और गुस्से में डूबे परिजनों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की शुरू कर दी। पूरे अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को काबू में किया और परिजनों को शांत कराने की कोशिश की। लेकिन परिवार वाले इस घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की बढ़ती घटनाएं

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और खराब व्यवस्था की ओर इशारा करती है। खासकर पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों की हालत को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इन अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कई बार लापरवाही और व्यवस्था की कमी के कारण मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी, बुनियादी सुविधाओं की कमी और मरीजों की भारी संख्या के कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं। राज्य सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ होना चाहिए और आपात स्थिति में तुरंत मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

जांच की मांग

इस घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्हें उचित मुआवजा भी मिलना चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में दखल देने का आश्वासन दिया है।

समाज के लिए चेतावनी

यह घटना पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह सभी को समय पर और बेहतर इलाज उपलब्ध कराए। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था और संवेदनशीलता की सख्त जरूरत है ताकि ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।