पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के सिमलापाल इलाके में चुनावी माहौल गरमाने लगा है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी विकास योजनाओं का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटी है। पिछले कुछ दिनों से सिमलापाल में इन दोनों पार्टियों के बीच सीधी जंग देखने को मिल रही है।
तालडांगरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिमलापाल में तृणमूल कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ‘विकास की पाचाली’ कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक फाल्गुनी सिंह बाबू सहित तृणमूल के कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। पार्टी अपनी उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक तरीके अपना रही है।
तृणमूल की विकास पाचाली का जवाब
लेकिन भाजपा भी चुप बैठने वाली नहीं है। तृणमूल की विकास पाचाली के जवाब में भाजपा ने ‘भ्रष्टाचार की पाचाली’ शुरू कर दी है। पिछले कुछ दिनों से भाजपा कार्यकर्ता टोटो में माइक लगाकर पूरे इलाके में घूम रहे हैं। वे पाचाली की धुन पर सरकार के भ्रष्टाचार का लेखा-जोखा लोगों के सामने रख रहे हैं।
यह अनोखा चुनावी प्रचार स्थानीय लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पार्टियां पारंपरिक पाचाली के माध्यम से अपना संदेश लोगों तक पहुंचा रही हैं। पाचाली बंगाल की एक पुरानी लोक कला है जिसमें गीत और कविता के जरिए कहानियां सुनाई जाती हैं।
तृणमूल का जवाब
हालांकि तृणमूल कांग्रेस भाजपा की इस रणनीति को खास तवज्जो नहीं दे रही है। सिमलापाल ब्लॉक के नवनियुक्त अध्यक्ष सौमेन पात्र ने कहा कि लोगों को विकास चाहिए, भाषण नहीं। उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार ने जमीनी स्तर पर जो काम किए हैं, वे सबके सामने हैं। लोग खोखले वादों से ऊपर उठ चुके हैं और असली विकास को पहचानते हैं।
तृणमूल के नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी ने राज्य में गरीबों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए खास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन्हीं उपलब्धियों को वे अपनी विकास पाचाली के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
भाजपा का दावा
दूसरी ओर भाजपा के स्थानीय मंडल अध्यक्ष शौभिक पात्र का दावा है कि तृणमूल की झूठी पाचाली कोई नहीं सुन रहा। उनका कहना है कि यह उनके लिए आखिरी मौका है जब वे तृणमूल के भ्रष्टाचार को लोगों के सामने ला सकते हैं। पाचाली के माध्यम से वे यही काम कर रहे हैं।
शौभिक पात्र ने कहा कि तृणमूल सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। असल में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया है। भाजपा इन सभी मुद्दों को लोगों के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
चुनावी तैयारियां तेज
आधिकारिक तौर पर चुनाव की घोषणा होने से पहले ही बांकुड़ा के जंगल महल इलाके में चुनावी जंग शुरू हो गई है। दोनों पार्टियां अपने-अपने तरीके से जनता को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। तृणमूल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रही है तो भाजपा विफलताओं को उजागर कर रही है।
सिमलापाल जैसे छोटे इलाकों में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह दिखाता है कि दोनों पार्टियां इस बार की लड़ाई को कितना गंभीरता से ले रही हैं। हर सीट महत्वपूर्ण है और कोई भी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग तृणमूल के विकास कार्यों से संतुष्ट दिखते हैं तो कुछ भाजपा के भ्रष्टाचार के आरोपों से सहमत नजर आते हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस पार्टी को फायदा मिलेगा।
पाचाली जैसे पारंपरिक माध्यम का इस्तेमाल दोनों पार्टियों की चतुराई को दर्शाता है। ग्रामीण इलाकों में लोक कला का अभी भी काफी प्रभाव है। लोग इसे रुचि से सुनते हैं और समझते हैं। इसलिए दोनों पार्टियां इस माध्यम को अपने संदेश पहुंचाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
2026 चुनाव की तैयारी
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन दोनों पार्टियां पहले से ही मैदान में उतर चुकी हैं। तृणमूल अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है तो भाजपा सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
बांकुड़ा जैसे इलाके राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं। यहां की जनता का रुझान चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दोनों पार्टियां यहां अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी हैं।
अब देखना यह है कि 2026 के चुनाव में पाचाली का फायदा किसे मिलता है। क्या तृणमूल की विकास पाचाली जनता को लुभा पाएगी या फिर भाजपा की भ्रष्टाचार पाचाली लोगों को प्रभावित करेगी। इसका जवाब तो कुछ महीनों बाद ही मिलेगा जब चुनाव के नतीजे सामने आएंगे। फिलहाल दोनों पक्ष घड़ी की सुइयां गिनने में व्यस्त हैं।