SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग का एक बड़ा और असरदार कदम सामने आया है। मंगलवार सुबह आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक कर दी, जिनके नाम 2026 की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से हटा दिए गए हैं। ये वे नाम हैं, जो 2025 की मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन अब सत्यापन प्रक्रिया के बाद बाहर कर दिए गए हैं।
यह कार्रवाई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर 2026 के तहत की गई है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में करीब 58 लाख से अधिक फॉर्म ऐसे पाए गए, जिन्हें ‘अनकलेक्टेबल’ माना गया। यानी या तो ये फॉर्म संबंधित पते पर जमा नहीं हो सके, या फिर उनका सत्यापन संभव नहीं हो पाया।
इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक हलकों में, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में इतने बड़े स्तर पर बदलाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं और आयोग की मंशा को लेकर चर्चाएं भी हो रही हैं।
मतदाता सूची की सफाई या बड़ा प्रशासनिक जोखिम
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाए रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आयोग के मुताबिक, जिन नामों को हटाया गया है, उनके पीछे ठोस कारण हैं। यह कदम किसी को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए नहीं, बल्कि फर्जी, डुप्लीकेट और गैर-मौजूद मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए उठाया गया है।
किन कारणों से हटाए गए नाम
आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, नाम हटाए जाने के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पाए गए, जो अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। कुछ लोग स्थायी रूप से दूसरे शहर या राज्य में स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि कई मामलों में मतदाता की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन सूची में नाम बना हुआ था।
इसके अलावा, कई नाम ऐसे भी मिले जो एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज थे। इस तरह की डुप्लीकेसी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। आयोग का मानना है कि इन खामियों को दूर करना समय की जरूरत है।
आम मतदाता के मन में चिंता
हालांकि आयोग ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है, लेकिन आम मतदाताओं के बीच चिंता भी देखी जा रही है। कई लोगों को आशंका है कि कहीं तकनीकी कारणों या सत्यापन में चूक के चलते उनका नाम गलती से तो नहीं हटा दिया गया। खासकर वे मतदाता जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से अपने मूल पते से दूर रहते हैं, उनके लिए यह चिंता और गहरी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल ड्राफ्ट सूची है और अभी सुधार की पूरी गुंजाइश मौजूद है।
नाम हट गया तो क्या है समाधान?
अगर किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलती से हटा दिया गया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। आयोग ने दावा और आपत्ति दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया तय कर दी है। ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद प्रभावित व्यक्ति फॉर्म 6 भरकर अपना नाम दोबारा जोड़ने का दावा कर सकता है।
इसके साथ डिक्लेरेशन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। दावा और आपत्तियों की अवधि 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक रखी गई है। इस दौरान आयोग सभी आवेदनों की सुनवाई करेगा और सही पाए जाने पर नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
चुनावी साल में क्यों अहम है यह फैसला
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने की संभावना है। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च या अप्रैल में चुनाव कराए जा सकते हैं। चुनाव से पहले मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता जहां एक ओर निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक होनी चाहिए, ताकि किसी वर्ग या क्षेत्र के मतदाताओं को अनजाने में नुकसान न पहुंचे।
सियासी प्रतिक्रियाओं की संभावना
भले ही आयोग ने इसे तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया बताया हो, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल इस पर सवाल उठा सकते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बता सकते हैं।