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पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारी तेज, ममता से लेकर आयोग तक सब मैदान में

पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारी तेज, ममता से लेकर आयोग तक सब मैदान में
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में चुनाव तैयारी तेज, अफसरों की सूची पर विवाद और ममता की बैठक (File Photo)

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में मार्च में चुनाव तारीख घोषणा की उम्मीद है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच अफसरों की सूची पर विवाद जारी है। ममता बनर्जी ने वैध मतदाताओं के नाम न काटने को लेकर बैठक की। DA मामले में मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को टाला। नदिया में आंख दान विवाद अभी भी सुलझा नहीं है।

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Asfi Shadab
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पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारी तेज, ममता से लेकर आयोग तक सब मैदान में

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। चुनाव आयोग से लेकर राज्य सरकार तक, विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक, हर कोई अपनी-अपनी जगह मैदान में आ गया है। चुनाव की तारीख का ऐलान होने से पहले ही राज्य की सियासत इतनी गरम हो गई है कि हर दिन कोई न कोई नया विवाद सामने आ रहा है। अफसरों की सूची पर झगड़ा हो, ममता की बैठकें हों, DA का मसला हो या फिर नदिया में आंख दान का कांड — सब कुछ एक साथ चल रहा है।

मार्च में चुनाव तारीख का ऐलान संभव

सूत्रों की मानें तो मार्च के पहले हफ्ते में ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। होली के बाद चुनाव आयोग इस बारे में जानकारी दे सकता है। चुनाव आयोग के अधिकारी राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल से सभी जरूरी जानकारियां जुटा रहे हैं। इसमें मतदाता सूची, बूथों की स्थिति, सुरक्षा के इंतजाम और बाकी तैयारियां शामिल हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो रहा है, इसलिए अप्रैल से पहले चुनाव होना जरूरी है।

अफसरों की सूची पर राज्य और आयोग में टकराव

राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच अफसरों की सूची को लेकर लड़ाई अभी भी जारी है। राज्य ने चुनाव ड्यूटी के लिए 8505 अफसरों की एक सूची चुनाव आयोग को भेजी थी। इसी सूची को लेकर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने गड़बड़ी का आरोप लगाया था। लेकिन राज्य सरकार ने इस आरोप को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि ग्रुप बी के अफसरों की सूची को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

नबान्न यानी राज्य सरकार के मुख्यालय ने कहा है कि कुछ स्वार्थी लोग जानबूझकर चुनाव आयोग को दी गई जानकारी को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि चुनाव से पहले राज्य और आयोग के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। यह टकराव आगे और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि चुनाव में निष्पक्ष अफसरों की तैनाती बहुत जरूरी मानी जाती है।

ममता की कालीघाट बैठक और मतदाताओं की सुरक्षा

इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर के बूथ लेवल एजेंटों यानी BLA-2 के साथ तीसरी बैठक की। यह बैठक कालीघाट में हुई और इसमें मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। खासतौर पर SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर कहा कि किसी भी सही मतदाता का नाम सूची से न कटने पाए।

उन्होंने कहा कि घर-घर जाएं, लोगों से मिलें और अगर किसी का नाम सूची से हट गया है तो सुनवाई की प्रक्रिया पर नजर रखें। ममता का यह कदम इसलिए भी जरूरी था क्योंकि SIR के तहत करीब 58 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें से कई लोगों के नाम गलती से या जानबूझकर हटाए जाने का डर है। तृणमूल कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उनके समर्थकों का एक भी वोट न जाए।

DA मामले में मुख्यमंत्री ने कोर्ट का रास्ता अपनाया

पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता यानी DA का मुद्दा भी फिर से गरमाया है। सवाल उठाया गया कि राज्य सरकार के पास कर्मचारियों को DA देने के पैसे नहीं हैं, लेकिन दूसरे भत्ते देने के लिए पैसे हैं। यह सवाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने रखा गया तो उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का हवाला देकर टाल दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में है इसलिए वे इस पर कुछ नहीं कह सकतीं।

लेकिन विपक्ष और सरकारी कर्मचारी संगठन इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि राज्य सरकार केंद्र के मुकाबले DA में बहुत पीछे है और सालों से कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा। चुनाव के वक्त यह मुद्दा और बड़ा बन सकता है।

नदिया में आंख दान विवाद और मुर्शिदाबाद की पहेली

इन सब राजनीतिक खींचतान के बीच नदिया जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। आंख दान विवाद में गिरफ्तार हुए आमिर चांद अभी भी जेल में हैं। नदिया पुलिस कभी कहती है कि उसके पास आंख दान की अनुमति का कागज नहीं था, तो कभी कहती है कि पुराना अंगदान पत्र था।

इस बीच मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के आई बैंक ने एक चिट्ठी लिखकर यह माना है कि मृत रबेया बीबी शेख की आंखें मिली थीं और इसकी रसीद भी दी गई थी। यह चिट्ठी गिरफ्तार आमिर चांद शेख के नाम पर है। इससे पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है और कई सवाल खड़े हो गए हैं।

अंगदान आंदोलन को बड़ा झटका

यह मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इससे अंगदान आंदोलन को गहरी चोट पहुंची है। वर्षों की मेहनत से जो अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाई गई है, यह विवाद उस पूरी कोशिश को नुकसान पहुंचा रहा है। जब लोग देखते हैं कि आंख दान करने वाले परिवार को भी पुलिस की परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो वे डरने लगते हैं। इससे आम लोगों में अंगदान को लेकर जो थोड़ी बहुत जागरूकता आई है, वह भी खत्म हो सकती है।

चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में उबाल

कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों हर मोर्चे पर सक्रिय है। एक तरफ चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच खींचतान है, दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपने मतदाताओं को बचाने की कोशिश में लगी हैं। भाजपा के नेता लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं और सरकारी कर्मचारी DA को लेकर नाखुश हैं। ऊपर से नदिया और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों से जो खबरें आ रही हैं, वे भी माहौल को और पेचीदा बना रही हैं।

दिलीप घोष जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता भी इको पार्क जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह तो साफ है कि 2026 का विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल के इतिहास में बेहद कड़ा और रोचक होने वाला है। हर पार्टी अपनी-अपनी ताकत आजमा रही है और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी है। चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ ही यह लड़ाई और तेज होने की उम्मीद है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।