उम्र सिर्फ एक संख्या है, यह कहावत शायद डॉ. पांडे के लिए ही बनी है। नागपुर विश्वविद्यालय के 97 वर्षीय पूर्व छात्र को जल्द ही ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ की प्रतिष्ठित उपाधि से नवाजा जाएगा। यह खबर न केवल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक संदेश है जो मानते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अर्थशास्त्र में अनुसंधान का सफर नागपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि डॉ. पांडे को यह उपाधि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके गहन शोध के लिए दी जा रही है। उनकी थीसिस का विषय ‘वैश्विक आर्थिक मंदी’