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तारिक रहमान की ऐतिहासिक वापसी

17 साल बाद तारिक रहमान की ऐतिहासिक वापसी! बांग्लादेश की राजनीति में नया दौर शुरू

Tarique Rehman: बांग्लादेश में हुए आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। वोटों की गिनती के साथ ही यह साफ हो गया है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है। 17 साल के लंबे अंतराल के बाद देश लौटे तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की वापसी है जिसने निर्वासन, मुकदमों और राजनीतिक संघर्ष के बीच अपना रास्ता बनाया। चुनाव परिणामों ने साफ संकेत दिया है कि जनता बदलाव

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Sheikh Hasina Bangladesh elections illegal demand: बांग्लादेश चुनाव को अवैध बताकर रद्द करने और यूनुस के इस्तीफे की मांग

बांग्लादेश के चुनाव पर शेख हसीना का तीखा प्रहार, चुनाव रद्द करने और यूनुस के इस्तीफे की मांग

बांग्लादेश में चुनाव पर गहराया विवाद Sheikh Hasina Bangladesh election illegal demand: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वहां हुए आम चुनाव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस चुनाव को पूरी तरह से अवैध, गैर कानूनी और जनता के बिना कराया गया चुनाव बताया है। शेख हसीना ने साफ शब्दों में कहा है कि इस चुनाव को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनाव में है। चुनाव के नतीजों और मतदान

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Sheikh Hasina Calls Yunus Murderer: दिल्ली से दिया बड़ा बयान, यूनुस को बताया हत्यारा

शेख हसीना ने दिल्ली से दिया बड़ा बयान, मोहम्मद यूनुस को बताया हत्यारा और फासीवादी

Sheikh Hasina Calls Yunus Murderer: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दिल्ली में आयोजित एक खास कार्यक्रम में उन्होंने ऑडियो भाषण देकर अपने देश की मौजूदा अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सीधे तौर पर हत्यारा और फासीवादी करार दिया है। उनका कहना है कि यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश आतंक और अपराध की आग में जल रहा है। दिल्ली से गूंजी हसीना की आवाज बांग्लादेश में लोकतंत्र की रक्षा नामक कार्यक्रम में शेख हसीना ने ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग

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Jaishankar on Sheikh Hasina: शेख हसीना को भारत में रहने की पूरी छूट, जयशंकर ने कहा - यह उनकी निजी पसंद

शेख हसीना जब तक चाहें भारत में रह सकती हैं, विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया आश्वासन

शेख हसीना जब तक चाहें भारत में रह सकती हैं, विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया आश्वासन भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक अहम बयान देते हुए पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में ठहरने को लेकर स्पष्टता दी। उन्होंने कहा कि शेख हसीना का भारत में रहना पूरी तरह से उनका निजी फैसला है, लेकिन जिन हालात में वे यहां आईं, वे इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में तब भारत आई थीं जब बांग्लादेश में उनकी 15 साल की सत्ता खूनी हिंसा के बीच समाप्त हो

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शेख हसीना को मानवता के अपराध में मौत की सज़ा — बांग्लादेश राजनीतिक उथल-पुथल की कगार पर

बांग्लादेश की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। अंतर्राष्ट्रीय क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के अपराधों (crimes against humanity) के आरोपों में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल देश में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है, बल्कि आगामी चुनावों और सामाजिक व्यवस्था पर लंबे समय तक असर डालने वाला है। देशव्यापी सुरक्षा अलर्ट और भय का माहौल हाल में जारी रिपोर्टों के अनुसार, हसीना के फैसले की घोषणा से पहले ही धरती पर उथल-पुथल महसूस की जा रही थी। राजधानी ढाका में सुरक्षा बलों को सख्त हिदायत दी गई है

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भारत को प्रत्यर्पण अनुरोध ठुकराने का वैधानिक अधिकार, विशेषज्ञों ने बताए ठोस आधार

भारत द्वारा शेख हसीना प्रत्यर्पण अनुरोध अस्वीकार करने की कानूनी संभावनाएं गहरी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नया आग्रह और उसके निहितार्थ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान कमाल को भारत से प्रत्यर्पित करने का औपचारिक आग्रह दोबारा करने की घोषणा की है। ढाका से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, दोनों को जुलाई 2024 के छात्रों के आंदोलन के दौरान विरोध कर रहे लोगों की कथित हत्या के प्रकरण में मृत्यु-दंड दिया गया है। इस संदर्भ में अंतरिम प्रशासन के विधिक सलाहकार आसिफ नज़रुल ने स्पष्ट किया कि भारत को भेजे गए पिछले

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शेख हसीना की सजा: मानवाधिकार निकाय ने कहा ‘न्याय की हंसी उड़ाई गई’, असली अपराधी रह गए दण्ड से मुक्त

शेख हसीना की सजा और मानवाधिकार का दृष्टिकोण नई दिल्ली, १७ नवम्बर (आईएएनएस) – नई दिल्ली स्थित मानवाधिकार निकाय राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (RRAG) ने सोमवार को पूर्व बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके दो वरिष्ठ सहयोगियों की सजा को “न्याय की विफलता और राजनीतिक प्रपंच” करार दिया। इस निकाय का कहना है कि असली अपराधियों को अभी तक दण्डित नहीं किया गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने शेख हसीना, पूर्व गृहमंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून को मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप में दोषी पाया। जुलाई पिछले वर्ष के

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बांग्लादेश में शेख हसीना को मृत्यु दण्ड: छात्र आंदोलन से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फ़ैसले तक की सम्पूर्ण घटनाक्रम यात्रा

बांग्लादेश में शेख हसीना पर न्यायाधिकरण का ऐतिहासिक निर्णय छात्र आंदोलन से उभरते राजनीतिक तूफ़ान की शुरुआत बांग्लादेश में वर्ष 2024 के मध्य में आरम्भ हुए छात्र आंदोलन ने अचानक ही राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल दी। सरकारी नौकरी में आरक्षित कोटे, विशेष रूप से मुक्ति योद्धाओं के वंशजों के लिए एक-तिहाई पद निर्धारित रहने के विरुद्ध छात्रों का आक्रोश धीरे-धीरे उग्र रूप लेता गया। छात्रों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना से कोटा व्यवस्था में व्यापक सुधार और उनकी नीतिगत भूमिका पर स्पष्टीकरण की माँग की।सरकार द्वारा आंदोलन को रोकने हेतु किए गए बलप्रयोग ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक

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बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना और कमाल को सौंपने की औपचारिक मांग की

सम्पादकीय: बांग्लादेश की मांग और दक्षिण एशियाई राजनीति में उभरता तनाव बांग्लादेश में ऐतिहासिक निर्णय और उसका क्षेत्रीय प्रभाव बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण-1 (आईसीटी-1) ने 17 नवम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को फांसी की सज़ा दी। यह निर्णय जुलाई–अगस्त 2024 के दौरान हुए भीषण छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कथित नरसंहार तथा मानवता-विरोधी अपराधों के मामलों पर आधारित था। अधिकरण के इस निर्णय ने न केवल बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय कूटनीति में भी नई जटिलताएँ

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शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान: बांग्लादेश की राजनीतिक धारा में मानवता और बलिदान की गाथा

शेख हसीना और उनके पिता: बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य का परिचय बांग्लादेश की राजनीति के इतिहास में शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित है। शेख मुजीबुर रहमान, जिन्हें बंगबंधु के नाम से भी जाना जाता है, न केवल बांग्लादेश के संस्थापक थे, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान के अधीन पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में जनता ने अत्याचार और असमानता के खिलाफ आवाज़ उठाई, और उनका बेटा-बेटी का रिश्ता इतिहास में वीरता और बलिदान के प्रतीक के रूप में दर्ज हुआ। शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध आरोपों में मृत्युदण्ड

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT‑BD) ने शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों का दोष सिद्ध करते हुए उन्हें मृत्युदण्ड की सज़ा सुनाई है। यह फैसला सोमवार को 453 पन्नों की विस्तृत और विश्लेषणात्मक रिर्पोट के बाद आया है, जिससे देशभर में राजनीतिक भूचाल मचा हुआ है। ह्रदयस्था पृष्ठभूमि यह मुकदमा जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र‑नेतृत आंदोलन और विद्रोह से जुड़ा है। उस समय देश में विशाल प्रदर्शन हुए थे, और विरोध जताने वाले छात्रों के ऊपर सुरक्षा बलों द्वारा कठोर कार्रवाई की गई थी। न्यायाधिकरण का आरोप है कि हसीना ने इस आंदोलन को भड़काया, हिंसा के आदेश

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अदालत ने ठहराया दोषी, सजा पर जल्द फैसला

शेख हसीना के खिलाफ आरोपों का संक्षिप्त विवरण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ कुल पांच गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे। इन आरोपों में हत्या की साजिश, प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार का आदेश और मानवाधिकार उल्लंघन शामिल हैं। 23 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधिकारियों ने फैसला सुरक्षित रखा। इस फैसले का दस्तावेज लगभग 400 पृष्ठों में विभाजित है और इसे छह भागों में बांटा गया है। अदालत के निर्णय में उल्लेख किया गया कि कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों पर हमले का आदेश दिया था, जिसके कारण कई लोग मारे

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना पर ऐतिहासिक फैसला; अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में 400 पृष्ठ का आदेश पढ़ना आरम्भ

बांग्लादेश में न्याय का निर्णायक अध्याय खुला बांग्लादेश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिए आज का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ गंभीर आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना रहा है। यह फैसला न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बांग्लादेश की न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। शेख हसीना पर हत्या और साजिश सहित पाँच गंभीर आरोप दर्ज हैं। इन आरोपों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड तक की मांग कर दी है, जिससे इस

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