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शेख हसीना ने दिल्ली से दिया बड़ा बयान, मोहम्मद यूनुस को बताया हत्यारा और फासीवादी

शेख हसीना ने दिल्ली से दिया बड़ा बयान, मोहम्मद यूनुस को बताया हत्यारा और फासीवादी
Sheikh Hasina Calls Yunus Murderer: दिल्ली से दिया बड़ा बयान, यूनुस को बताया हत्यारा (FB Photo)

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में ऑडियो भाषण देकर मोहम्मद यूनुस को हत्यारा और फासीवादी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार देश को आतंक और अपराध की आग में झोंक रही है। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र खत्म हो गया है और अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की।

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Asfi Shadab
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Sheikh Hasina Calls Yunus Murderer: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दिल्ली में आयोजित एक खास कार्यक्रम में उन्होंने ऑडियो भाषण देकर अपने देश की मौजूदा अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सीधे तौर पर हत्यारा और फासीवादी करार दिया है। उनका कहना है कि यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश आतंक और अपराध की आग में जल रहा है।

दिल्ली से गूंजी हसीना की आवाज

बांग्लादेश में लोकतंत्र की रक्षा नामक कार्यक्रम में शेख हसीना ने ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने हिंसा करवाकर पूरे देश को अराजकता की ओर धकेल दिया है। हसीना ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार विदेशी ताकतों की कठपुतली बनकर काम कर रही है और बांग्लादेश की आजादी के लिए किए गए बलिदान को बेकार कर रही है।

शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि उनका देश गहरे संकट में फंस गया है। सांप्रदायिक ताकतों ने माहौल इतना खराब कर दिया है कि लोग जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस उपजाऊ भूमि पर कभी खुशहाली थी, वह अब बंजर हो गई है।

लोकतंत्र की हत्या का आरोप

पूर्व प्रधानमंत्री का मानना है कि बांग्लादेश में कानून का राज अब खत्म हो चुका है। पांच अगस्त 2024 को जब उन्हें सत्ता से हटाया गया, उसी दिन से देश में लोकतंत्र की हत्या हो गई। हसीना ने कहा कि लोगों द्वारा चुनी गई सरकार को ताकत के बल पर गिरा दिया गया। यह एक बड़ी साजिश थी जिसमें देश के दुश्मनों ने मिलकर काम किया।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में अब न्याय एक मजाक बन गया है। मानवाधिकारों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महिलाएं और युवतियां सुरक्षित नहीं हैं। अल्पसंख्यकों को रोजाना जान के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार

शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि इस विपदा के समय में दुनिया को आवाज उठानी चाहिए। विदेशी ताकतों की कठपुतली बनी सरकार को हटाना बहुत जरूरी है। तभी बांग्लादेश में फिर से लोकतंत्र कायम हो सकता है।

हसीना ने भ्रष्टाचार और हिंसा की आग में जलते अपने देश की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब एक विशाल जेल बन चुका है जहां आम लोग असुरक्षा, आर्थिक तंगी और रोजाना हिंसा के बीच जीवन बिता रहे हैं। देश की क्षेत्रीय अखंडता का सौदा किया जा रहा है और संप्रभुता खतरे में है।

देश खून के आंसू रो रहा है

अपने भाषण में हसीना ने कहा कि बांग्लादेश आज खून के आंसू रो रहा है। उग्रवादियों और मोहम्मद यूनुस ने मिलकर उन्हें जबरन सत्ता से बेदखल किया। उस दिन से अब तक देश में लगातार हिंसा, दमन और आर्थिक संकट का दौर चल रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाएं व्यवस्थित तरीके से कमजोर की जा रही हैं।

उन्होंने खासतौर से महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई। हसीना ने एक निष्पक्ष सरकार की बहाली की मांग करते हुए कहा कि बांग्लादेश को विश्वासघाती साजिश से बचाना जरूरी है।

चुनाव के बीच हसीना का बयान

यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में आम चुनाव का प्रचार जोरों पर है। 12 फरवरी को होने वाले इस चुनाव को देश के इतिहास का सबसे अहम चुनाव माना जा रहा है। यह पहला चुनाव है जो शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद अंतरिम सरकार के तहत कराया जा रहा है।

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है। लेकिन हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने से सवाल भी उठ रहे हैं। अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी लंबे समय से देश की राजनीति में दो मुख्य ताकतें रही हैं।

कानून व्यवस्था की चिंताएं

देश में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जाएगा। याद रहे कि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद हुए हिंसक दमन के बीच शेख हसीना पांच अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत आ गई थीं। तीन दिन बाद ही मोहम्मद यूनुस ने पद संभाला था।

चुनावी समीकरण

अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद इस्लामी दल जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 10 दलीय गठबंधन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जमात-ए-इस्लामी को धर्मनिरपेक्ष समूहों की आलोचना का सामना करना पड़ता रहा है। उनका कहना है कि इस दल की नीतियां बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को चुनौती देती हैं।

छात्र आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी का गठन किया है जो भी इस गठबंधन का हिस्सा है। बीएनपी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का मुख्य दावेदार माना जा रहा है।

तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद पिछले महीने ब्रिटेन से वापस लौटे हैं। उनकी पार्टी को उनकी मां की राजनीतिक विरासत के कारण मजबूत समर्थन मिला है। खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था।

जुलाई राष्ट्रीय चार्टर का मुद्दा

इस चुनाव में एक राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह भी शामिल है। अंतरिम सरकार मतदाताओं से इसके समर्थन की अपील कर रही है। सरकार का दावा है कि यह चार्टर सुधारों पर आधारित एक नई राजनीतिक दिशा प्रस्तुत करता है।

Sheikh Hasina Calls Yunus Murderer: इस चार्टर पर पिछले साल देश के 52 पंजीकृत राजनीतिक दलों में से 25 ने हस्ताक्षर किए थे। अवामी लीग ने इसका विरोध किया था और कई अन्य दलों ने भी हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

जुलाई राष्ट्रीय चार्टर का नाम जुलाई 2024 में शुरू हुए उस जन आंदोलन के नाम पर रखा गया है जिसने हसीना सरकार के पतन का रास्ता तैयार किया था। फिलहाल यह चार्टर बाध्यकारी नहीं है लेकिन इसके समर्थक इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी और संविधान का हिस्सा बनाना चाहते हैं।

अंतरिम सरकार का कहना है कि यह चार्टर सत्तावादी शासन से बचने के लिए ज्यादा नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था करेगा। इसमें राष्ट्रपति को अधिक अधिकार देकर अब तक शक्तिशाली रहे प्रधानमंत्री पद के संतुलन का प्रावधान शामिल है। इसमें सांसदों के कार्यकाल की सीमा तय करने और भ्रष्टाचार रोकने के उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।