
पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर बढ़ा तनाव बंगाल में क्यों भड़का विवाद कोलकाता में सोमवार देर रात एसआईआर यानी विशेष मतदाता सूची जांच प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। बीएलओ, जिन्हें मतदाता सूची अपडेट करने की जिम्मेदारी दी जाती है, आरोप लगा रहे थे कि उन्हें अनावश्यक दबाव में रखकर काम कराया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता इस पूरी प्रक्रिया में चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगा रहे थे। यह विवाद उस समय और गर्म हो गया जब लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ता रात करीब 11 बजे पश्चिम बंगाल के

पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर बढ़ा तनाव बंगाल में क्यों भड़का विवाद कोलकाता में सोमवार देर रात एसआईआर यानी विशेष मतदाता सूची जांच प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। बीएलओ, जिन्हें मतदाता सूची अपडेट करने की जिम्मेदारी दी जाती है, आरोप लगा रहे थे कि उन्हें अनावश्यक दबाव में रखकर काम कराया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता इस पूरी प्रक्रिया में चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगा रहे थे। यह विवाद उस समय और गर्म हो गया जब लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ता रात करीब 11 बजे पश्चिम बंगाल के

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक शोर-गुल लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि राज्य में एसआईआर को सुचारु रूप से चलने से रोकने के लिए तृणमूल नेतृत्व और स्थानीय गुंडों द्वारा बूथ स्तर अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों को खुले तौर पर चुनौती देने का

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक शोर-गुल लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि राज्य में एसआईआर को सुचारु रूप से चलने से रोकने के लिए तृणमूल नेतृत्व और स्थानीय गुंडों द्वारा बूथ स्तर अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों को खुले तौर पर चुनौती देने का