अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक शांति संगठन लॉन्च किया था जिसका नाम ‘बोर्ड ऑफ पीस’ रखा गया। इस संगठन का मकसद दुनिया भर में शांति और स्थिरता लाना बताया गया था। लेकिन इस घोषणा के महज 24 घंटे बाद ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत, फाइटर जेट और मिसाइल सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम से पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है कि कहीं एक बड़े संघर्ष की शुरुआत तो नहीं हो रही।
ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य तैयारी
अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक बड़ा युद्धपोत समूह जल्द ही अरब सागर या फारस की खाड़ी में पहुंचने वाला है। इस युद्धपोत समूह में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और एक हमलावर पनडुब्बी भी शामिल है। यह बेड़ा पहले दक्षिण चीन सागर में तैनात था लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश के बाद इसे पश्चिम की ओर भेज दिया गया है।
फिलहाल यह स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर क्षेत्र में माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह युद्धपोत समूह अब ‘डार्क’ हो गया है यानी इसकी ट्रैकिंग से बचने के लिए इसके ट्रांसपोंडर बंद कर दिए गए हैं। इससे साफ होता है कि अमेरिका किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट भी पश्चिम एशिया में तैनात कर दिए गए हैं। ये वही फाइटर जेट हैं जिन्हें अप्रैल 2024 में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद इजरायल की सुरक्षा के लिए भेजा गया था।
लंबी दूरी के हमले की पूरी तैयारी
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, KC-135 एयर रिफ्यूलिंग टैंकर भी इस इलाके में भेजे गए हैं। इनकी मदद से फाइटर जेट हवा में ही ईंधन भर सकेंगे और लंबी दूरी तक हमला कर सकेंगे। यह सैन्य रणनीति साफ दिखाती है कि अमेरिका किसी बड़े और लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियान की तैयारी में है।
इसके अलावा अमेरिका ने पश्चिम एशिया में THAAD और पैट्रिएट जैसी एंटी-मिसाइल प्रणालियां भी तैनात की हैं। खासतौर पर इजरायल और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। यह पूरा सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।
A U.S. Air Force F-15E Strike Eagle assigned to the 494th Expeditionary Fighter Squadron lands at a base in the Middle East, Jan. 18. The F-15’s presence enhances combat readiness and promotes regional security and stability. pic.twitter.com/QTXgOsOozV
— U.S. Central Command (@CENTCOM) January 20, 2026
ईरान में विरोध प्रदर्शन और हिंसा की खबरें
अमेरिका का आरोप है कि ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सरकार ने हिंसक कार्रवाई की है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अब तक 3117 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में संभावना जताई जा रही है कि 20 हजार से अधिक लोग मारे गए हो सकते हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार ईरान को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान को सैकड़ों लोगों को फांसी देने की योजना रोकनी पड़ी है।
परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ती चिंता
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरान ने फिर से परमाणु कार्यक्रम शुरू किया तो उसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान को कुछ हद तक नरम भी किया। विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप की रणनीति दबाव बनाकर बातचीत के लिए मजबूर करने की रही है।
एक और बड़ी चिंता की बात यह है कि जून 2025 में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का करीब 400 किलो समृद्ध यूरेनियम कहां गया, इसका अब तक पता नहीं चल पाया है। यह मात्रा करीब 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए काफी मानी जाती है। यह स्थिति क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
ईरान की जवाबी चेतावनी
ईरान ने भी अमेरिकी धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेकेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद बदले की भावना से प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।
ईरान का मानना है कि यह सब एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है जिसका मकसद ईरान को कमजोर करना और क्षेत्र में अमेरिकी वर्चस्व स्थापित करना है।
अगर हमला हुआ तो क्या होगा
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका आमतौर पर चरणबद्ध तरीके से सैन्य कार्रवाई करता है। पहले सीमित चेतावनी हमले किए जाते हैं, फिर दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाया जाता है। इसके बाद परमाणु ठिकानों पर हमला भी एक विकल्प हो सकता है जैसा जून 2025 में हुआ था।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसका भू-आर्थिक असर है। 2024 में रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरा जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रास्ते पर ईरान का प्रभाव है।
तेल कीमतों पर असर की आशंका
अगर ईरान ने इस रास्ते को अस्थिर किया, भले ही पूरी तरह बंद न भी किया, तो तेल की कीमतें, बीमा और शिपिंग लागत तेजी से बढ़ सकती है। इससे अमेरिका सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और राजनीतिक दबाव बढ़ेगा। भारत जैसे देश जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उन पर इसका सीधा असर होगा।
इजरायल की भूमिका भी अहम
अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो इजरायल भी इस संघर्ष में खिंच सकता है। ईरान उसे दूसरा लक्ष्य मान सकता है। इजरायल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली जिसमें आयरन डोम और एरो सिस्टम शामिल हैं, क्षेत्र में नुकसान को सीमित करने में अहम मानी जाती है।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर ईरान ने इजरायल पर सीमित हमला किया तो इससे अमेरिका को समय मिल सकता है और ईरान को भी अपना चेहरा बचाने का रास्ता मिल सकता है। लेकिन यह स्थिति बेहद नाजुक है और कोई भी गलती बड़े युद्ध का कारण बन सकती है।
दुनिया के लिए चिंता का विषय
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है। यह पूरे पश्चिम एशिया और दुनिया के लिए चिंता का विषय है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तनाव को कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि स्थिति और न बिगड़े।