पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मुश्किल में फंस गए हैं। उनके खिलाफ उनके ही देश में गिरफ्तारी का आदेश जारी हुआ है। यह वारंट बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार ने जारी किया है। बलूचिस्तान गणराज्य ने शहबाज शरीफ पर बिना वीजा के बलूचिस्तान में प्रवेश करने का आरोप लगाया है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप क्या हैं
बलूचिस्तान गणराज्य का कहना है कि शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान के वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। उन पर बलूचिस्तान की संप्रभुता को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है। निर्वासित सरकार ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने वैध कानूनी दस्तावेज और स्वीकृत वीजा के बिना बलूचिस्तान में प्रवेश किया। यह कृत्य बलूचिस्तान के कानून के तहत आपराधिक अपराध माना गया है।
किसने जारी किया वारंट
इस गिरफ्तारी वारंट की घोषणा मीर यार बलोच ने की है। वे सोशल मीडिया पर बलूचिस्तान की आजादी की मांग करते हैं। वे पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य प्रशासन की खुलकर आलोचना करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की। उनके अनुसार, यह आदेश 8 जनवरी 2026 को जारी किया गया था।
The Republic of Balochistan issues arrest warrant of Pakistan’s PM Shehbaz Sharif over violation of Balochistan’s visa rules.
8th January 2026
The Prime Minister of Pakistan is liable to arrest by the Republic of Balochistan for grave and deliberate violations of Balochistan’s… pic.twitter.com/v1R9PpkgOo
— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch) January 8, 2026
बलूचिस्तान को बताया स्वतंत्र देश
बलूचिस्तान गणराज्य ने खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य घोषित किया है। निर्वासित सरकार का दावा है कि बलूचिस्तान एक विशिष्ट देश है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा हो, बलूचिस्तान के आव्रजन कानूनों से छूट नहीं है। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। बलूचिस्तान गणराज्य ने स्पष्ट किया कि उचित कानूनी दस्तावेज के बिना बलूचिस्तान में प्रवेश करना अपराध है।
गिरफ्तारी का अधिकार सुरक्षित
बलूचिस्तान गणराज्य ने कहा कि वे क्वेटा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर या अपने अधिकार क्षेत्र के किसी भी स्थान पर शहबाज शरीफ को गिरफ्तार करने का अधिकार रखते हैं। यह घोषणा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, सेना प्रमुख और सभी अधिकारियों के लिए अंतिम चेतावनी बताई गई है। बलूचिस्तान गणराज्य ने स्पष्ट किया कि बिना वीजा स्वीकृति के बलूचिस्तान में प्रवेश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कठोर कार्रवाई की चेतावनी
निर्वासित सरकार ने कहा कि जो भी पाकिस्तानी नागरिक वैध वीजा के बिना बलूचिस्तान में प्रवेश करेगा, उसे कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा। ऐसे व्यक्ति को बलूचिस्तान के कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा। उसे जबरन पाकिस्तान वापस भेजा जा सकता है। बलूचिस्तान गणराज्य ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनयिक मानदंडों का पालन करने की चेतावनी दी है।
संप्रभुता का सवाल
बलूचिस्तान गणराज्य ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार किसी भी संप्रभु देश में प्रवेश के लिए वीजा आवश्यक है। यही नियम बलूचिस्तान पर भी लागू होता है। निर्वासित सरकार ने स्पष्ट किया कि बलूचिस्तान में भूमि, समुद्र या वायु मार्ग से बिना वीजा स्वीकृति के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसी भी उल्लंघन को बलूचिस्तान की संप्रभुता के लिए चुनौती माना जाएगा।
राजनीतिक संदर्भ
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। बलूच लोग पाकिस्तान पर अपने संसाधनों का शोषण करने का आरोप लगाते हैं। वे अपने अधिकारों की मांग करते हैं। कई बलूच नेता निर्वासन में रहते हैं। वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान की आजादी की बात उठाते हैं। हालांकि पाकिस्तान इन दावों को खारिज करता है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
अभी तक पाकिस्तान सरकार ने इस गिरफ्तारी वारंट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाकिस्तान बलूचिस्तान को अपना अभिन्न अंग मानता है। वह किसी भी अलगाववादी गतिविधि को गैरकानूनी मानता है। पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में सक्रिय रूप से तैनात है। वह क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने का दावा करती है।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बलूचिस्तान गणराज्य की निर्वासित सरकार को मान्यता नहीं मिली है। कोई भी देश इसे वैध सरकार के रूप में स्वीकार नहीं करता। इसलिए इस गिरफ्तारी वारंट का कानूनी महत्व सीमित है। हालांकि यह बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष को उजागर करता है। यह पाकिस्तान के आंतरिक मुद्दों को सामने लाता है।
आगे क्या होगा
यह गिरफ्तारी वारंट एक प्रतीकात्मक कदम है। इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना मुश्किल है। बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का नियंत्रण है। पाकिस्तानी सुरक्षा बल वहां तैनात हैं। इसलिए शहबाज शरीफ को गिरफ्तार करना संभव नहीं लगता। लेकिन यह घटना बलूचिस्तान के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला सकती है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस क्षेत्र की समस्याओं पर आकर्षित कर सकती है।