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अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट से हटाईं गईं 16 एपस्टीन फाइलें

अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट से हटाईं गईं 16 एपस्टीन फाइलें
Epstein Files Removed: अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट से गायब हुईं 16 फाइलें

अमेरिका के न्याय विभाग की वेबसाइट से जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी कम से कम 16 फाइलें हटा दी गई हैं। इनमें राष्ट्रपति ट्रंप की एक तस्वीर भी शामिल बताई जा रही है। विभाग ने पहले कहा था कि केवल पीड़ितों की सुरक्षा के लिए कुछ हिस्से छिपाए जा रहे हैं। यह मामला नई बहस को जन्म दे रहा है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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अमेरिका के न्याय विभाग ने हाल ही में जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों का एक बड़ा संग्रह जारी किया था। लेकिन अब खबर आ रही है कि इन दस्तावेजों में से कम से कम 16 फाइलें विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से हटा दी गई हैं। यह मामला अब एक नया विवाद बनता जा रहा है क्योंकि इन हटाई गई फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक तस्वीर भी शामिल बताई जा रही है।

एक निजी समाचार चैनल ने इस बात की पुष्टि की है कि हटाई गई फाइलों में से एक में राष्ट्रपति ट्रंप की तस्वीर थी। हालांकि इस बात को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है कि आखिर इन फाइलों को क्यों हटाया गया।

हटाई गई फाइलों में क्या था

जो फाइलें वेबसाइट से गायब हुई हैं उनमें अलग-अलग तरह की सामग्री शामिल थी। ज्यादातर हटाई गई फाइलों में कुछ विवादास्पद कलाकृतियां दिखाई गई थीं। कुछ तस्वीरों में लिफाफों से भरे मेल स्लॉट दिखाए गए थे। एक फाइल में टाइल वाला गलियारा दिखाया गया था। इसके अलावा एक नोटबुक का पन्ना भी था जिसमें नाम और अपार्टमेंट नंबर लिखे हुए थे।

ये सभी फाइलें एपस्टीन मामले की जांच से जुड़ी हुई थीं। इन दस्तावेजों को न्याय विभाग ने सार्वजनिक किया था ताकि लोगों को इस मामले की पूरी जानकारी मिल सके। लेकिन अब इनमें से कुछ को हटाना एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

न्याय विभाग का पहले का बयान

इससे पहले अमेरिका के न्याय विभाग ने स्पष्ट किया था कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़े हाल ही में जारी किए गए दस्तावेजों में केवल पीड़ितों की सुरक्षा के लिए कुछ हिस्से छिपाए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा था कि किसी भी राजनेता का नाम जानबूझकर नहीं छिपाया जा रहा है।

यह सफाई उस समय दी गई थी जब लोगों में यह शंका पैदा होने लगी थी कि शायद कुछ बड़े नामों को बचाने के लिए दस्तावेजों में काट-छांट की जा रही है। न्याय विभाग ने साफ तौर पर कहा था कि पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता है।

अदालत ने दी थी मंजूरी

इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मंजूरी संघीय न्यायाधीशों ने दी थी। अदालत ने एपस्टीन और उनकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल के खिलाफ चल रहे मामलों में ग्रैंड जूरी की सामग्री को सार्वजनिक करने की अनुमति दी थी। इसी के बाद न्याय विभाग ने इन बहुप्रतीक्षित रिकॉर्डों को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया था।

यह फैसला इस मामले में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था। एपस्टीन मामला अमेरिका के कई शक्तिशाली लोगों के नाम से जुड़ा हुआ है और लोग लंबे समय से इन दस्तावेजों को देखने के लिए उत्सुक थे।

ट्रंप का नाम कितनी बार आया

न्यूयॉर्क टाइम्स ने हजारों दस्तावेजों और सैकड़ों तस्वीरों की शुरुआती जांच के आधार पर बताया है कि एपस्टीन फाइलों के इस संग्रह में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम बहुत कम बार आया है। यह जानकारी उन अटकलों को कम करती है जो यह बता रही थीं कि ट्रंप इस मामले में गहराई से शामिल हो सकते हैं।

हालांकि ट्रंप की एक तस्वीर का हटाया जाना फिर से सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि अगर राष्ट्रपति का नाम इन दस्तावेजों में इतना कम है तो फिर उनकी तस्वीर को क्यों हटाया गया।

एपस्टीन मामला क्या है

जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी करोड़पति थे जिन पर नाबालिग लड़कियों की तस्करी और यौन शोषण के गंभीर आरोप थे। उनका संबंध कई शक्तिशाली और प्रभावशाली लोगों से था। 2019 में जेल में रहते हुए उनकी मौत हो गई थी जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया था।

उनकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल को भी इन अपराधों में शामिल पाया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। यह मामला अमेरिकी समाज के उच्च वर्ग की काली सच्चाइयों को उजागर करता है।

जनता की प्रतिक्रिया

इन फाइलों के हटाए जाने पर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सरकार कुछ छिपाना तो नहीं चाहती। पारदर्शिता की मांग करने वाले कार्यकर्ता इस मामले में जांच की मांग कर रहे हैं।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह संभव है कि तकनीकी कारणों से या गोपनीयता नियमों के तहत ये फाइलें हटाई गई हों। लेकिन बिना किसी स्पष्ट बयान के यह कदम संदेह को ही बढ़ाता है।

आगे क्या होगा

अब देखना यह है कि न्याय विभाग इस मामले में क्या सफाई देता है। क्या वे बताएंगे कि इन फाइलों को क्यों हटाया गया और क्या इन्हें फिर से सार्वजनिक किया जाएगा। मीडिया और जनता दोनों ही इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।

यह मामला यह भी दिखाता है कि सरकारी पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है। खासकर तब जब मामला इतना संवेदनशील हो और इसमें बड़े नाम शामिल हों।

एपस्टीन मामला अमेरिकी न्याय व्यवस्था के लिए एक परीक्षा बना हुआ है। लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या सच्चाई सामने आएगी या फिर ताकतवर लोग इसे दबा देंगे। इन 16 फाइलों का हटाया जाना इसी लड़ाई का एक नया अध्याय है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।