अमेरिका में एपस्टीन मामले से जुड़े दस्तावेजों में एक बड़ी गलती सामने आई है। पीड़ितों की निजी तस्वीरें और वीडियो इन दस्तावेजों में बिना किसी रोक-टोक के सार्वजनिक कर दिए गए। सरकारी अधिकारियों को इस बारे में चेतावनी दिए जाने के बावजूद ये फाइलें कई दिनों तक इंटरनेट पर बनी रहीं। पीड़ितों के वकीलों का कहना है कि इससे उन्हें ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।
बीबीसी वेरिफाई ने जब इन फाइलों की जांच की तो पता चला कि हजारों दस्तावेज ऐसे हैं जिनमें एपस्टीन के दर्जनों पीड़ितों की पहचान बताने वाली जानकारी मौजूद है। पीड़ितों के समूहों ने सबसे पहले सप्ताहांत में इस मुद्दे को उठाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया था कि शुक्रवार को एपस्टीन फाइलों के साथ लगभग 40 अलग-अलग तस्वीरें प्रकाशित कर दी गई थीं।
कानूनी कार्रवाई और सरकार का रुख
मंगलवार को न्यूयॉर्क के एक जज ने कहा कि न्याय विभाग (डीओजे) ने इस समस्या को जल्दी ठीक करने पर सहमति जताई है। पीड़ितों ने मांग की थी कि जब तक नाम और तस्वीरों को सही तरीके से हटाया नहीं जाता, तब तक वेबसाइट को बंद कर देना चाहिए।
न्याय विभाग ने अपनी वेबसाइट से हजारों दस्तावेज हटा दिए। विभाग ने कहा कि ये फाइलें “तकनीकी या मानवीय गलती” के कारण अपलोड हो गई थीं। विभाग ने यह भी बताया कि वह नए अनुरोधों की जांच कर रहा है और देख रहा है कि कहीं ऐसे और दस्तावेज तो नहीं हैं जिन्हें छुपाने की जरूरत हो।
सरकारी दावों के बावजूद समस्या बरकरार
बीबीसी वेरिफाई ने स्वतंत्र रूप से पाया कि बुधवार को भी कई ऐसी तस्वीरें ऑनलाइन मौजूद थीं जिनमें लोगों की पहचान की जा सकती थी। यह तब की बात है जब अमेरिकी सरकार ने कहा था कि वह पिछले दिन से अधूरे सुधार के मुद्दे पर काम कर रही है। बीबीसी ने न्याय विभाग से संपर्क किया है और उन फाइलों के नाम भी दिए हैं जो बिना छुपाए गए हैं।
पीड़ितों के वकील का बयान
पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ब्रैड एडवर्ड्स ने एक बयान में कहा, “जो नुकसान हुआ है वह अपूरणीय है।” एपस्टीन के दुर्व्यवहार से बचने वाली एशले रूब्राइट ने बीबीसी को बताया, “जिन लड़कियों की जानकारी सार्वजनिक हो गई, उनके लिए मेरा दिल टूट रहा है। यह उनके जीवन के सबसे भयानक पलों में से एक का बहुत बड़ा उल्लंघन है।”
किस तरह की तस्वीरें थीं सार्वजनिक
बीबीसी वेरिफाई ने जिन चार तस्वीरों की पहचान की, उनमें आंशिक रूप से कपड़े पहने युवा महिलाएं दिखाई दे रही थीं और उनके चेहरे तथा शरीर को छुपाया नहीं गया था। ये तस्वीरें तब मिलीं जब सार्वजनिक हस्तियों के साथ एपस्टीन के संबंधों के सबूत के लिए लाखों फाइलों में सामान्य खोज की गई।
कुछ दस्तावेजों में अन्य लोगों की तस्वीरों को छुपाया गया था लेकिन कहीं और उन्हें बिना छुपाए छोड़ दिया गया था। एक दस्तावेज में एक ही तस्वीर के दो संस्करण थे – एक में चेहरे को काले वर्ग से ढका गया था और दूसरे में चेहरा पूरी तरह से दिखाई दे रहा था। एक अन्य वीडियो में भी किसी की पहचान हो गई जो कैमरे के सामने अपनी शर्ट उठा रही थी।
पीड़ितों की गोपनीयता का सवाल
यह मामला पीड़ितों की गोपनीयता के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाता है। एपस्टीन मामला पहले से ही संवेदनशील है और इसमें कई युवा महिलाओं और लड़कियों का शोषण हुआ था। ऐसे में सरकारी विभाग द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही चौंकाने वाली है।
पीड़ितों के अधिकार समूहों का कहना है कि इस तरह की गलतियां उन लोगों को दोबारा पीड़ा देती हैं जो पहले ही बहुत कुछ सह चुके हैं। उनका मानना है कि सरकार को ऐसे संवेदनशील मामलों में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।
न्याय प्रणाली में सुधार की मांग
इस घटना के बाद कई विशेषज्ञों ने अदालती दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि डिजिटल युग में एक बार कोई जानकारी इंटरनेट पर आ जाए तो उसे पूरी तरह से हटाना लगभग असंभव हो जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को ऐसे मामलों में ज्यादा मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत है। दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से पहले कई स्तरों पर जांच होनी चाहिए ताकि ऐसी गलतियां न हों।
लंबे समय तक प्रभाव
इस घटना का पीड़ितों पर लंबे समय तक प्रभाव रह सकता है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों की निजी तस्वीरें बिना अनुमति के सार्वजनिक हो जाती हैं, उन्हें गंभीर मानसिक आघात पहुंचता है। एपस्टीन मामले की पीड़ितों के लिए यह और भी दुखद है क्योंकि वे पहले से ही एक कठिन दौर से गुजर चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को केवल फाइलें हटाने से आगे जाकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए। उन्हें परामर्श और कानूनी सहायता की जरूरत है ताकि वे इस नए आघात से उबर सकें।
यह मामला दिखाता है कि कैसे तकनीकी और मानवीय गलतियां लोगों के जीवन पर गहरा असर डाल सकती हैं। यह भी याद दिलाता है कि न्याय प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना यह है कि अमेरिकी सरकार इस गलती की भरपाई के लिए क्या कदम उठाती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था करती है।