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पाकिस्तान में हिंदू युवक की हत्या के बाद आक्रोश, सड़कों पर उतरे लोग

पाकिस्तान में हिंदू किसान की हत्या के बाद आक्रोश
किसान कैलाश कोलही (File Photo)
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन ज़िले में हिंदू किसान कैलाश कोलही की हत्या के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रभावशाली ज़मींदार पर हत्या का आरोप है। गिरफ्तारी न होने से जनाक्रोश बढ़ रहा है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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Hindu Youth Murder in Pakistan: पाकिस्तान के सिंध प्रांत का बदीन ज़िला इन दिनों सिर्फ़ एक हत्या का गवाह नहीं है, बल्कि उस पीड़ा, गुस्से और टूटते भरोसे का प्रतीक बन गया है, जो वर्षों से दबे हुए समुदायों के भीतर सुलग रहा था। एक युवा हिंदू किसान कैलाश कोलही की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

कैलाश कोलही की कथित हत्या एक प्रभावशाली ज़मींदार सरफराज निजामानी द्वारा की गई, ऐसा आरोप है। विवाद की जड़ बेहद साधारण थी—ज़मीन पर एक झोपड़ी बनाने को लेकर हुआ टकराव। लेकिन इस साधारण विवाद का अंत गोली और मौत के साथ हुआ, जिसने पूरे सिंध में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।

हत्या से उपजा आक्रोश

हत्या के बाद बदीन और आसपास के इलाकों में हालात तेज़ी से बदले। बदीन–हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और बदीन–थार कोयला सड़क पर घंटों तक धरना चला। सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना साफ़ था—जब तक हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं होती, सड़कें नहीं खुलेंगी।

यह धरना केवल यातायात रोकने का ज़रिया नहीं था, बल्कि यह एक सामूहिक चेतावनी थी कि अब चुप रहने का समय खत्म हो चुका है। महिलाएं, बुज़ुर्ग, बच्चे और युवा—सब एक ही मांग के साथ सड़कों पर डटे रहे। उनके हाथों में तख्तियां थीं और आंखों में एक सवाल—क्या गरीब और अल्पसंख्यक होना अपराध है?

“यह धरना नहीं, जख्मी ज़मीर की आवाज़ है”

सामाजिक कार्यकर्ता और पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन शिवा काच्छी का बयान इस आंदोलन की आत्मा को बयान करता है। उन्होंने कहा कि यह विरोध इतिहास रच रहा है। सुबह से रात तक बिना रुके चला यह धरना इस बात का प्रमाण है कि लोग अब थकने वाले नहीं हैं।

उनके शब्दों में, कैलाश कोलही का अपराध सिर्फ़ इतना था कि वह गरीब था, हाशिए पर था और सवाल पूछने की स्थिति में नहीं था। उसकी मां का विलाप, उसकी पत्नी की खामोशी और उसके बच्चों की आंखों में डर—ये सब मिलकर पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

पुलिस के वादे और गिरफ्तारी की अधूरी कहानी

हत्या के तुरंत बाद पीड़ित परिवार और समुदाय ने शव रखकर प्रदर्शन किया था। उस वक्त बदीन के एसएसपी ने 24 घंटे में गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया था। घटना को अब चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी कानून की पकड़ से बाहर है।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का साथ

इस धरने को केवल एक समुदाय का विरोध कहना गलत होगा। इसमें कई राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों की भागीदारी दिखी। अलग-अलग विचारधाराओं के लोग एक मंच पर आए, क्योंकि मुद्दा किसी एक पार्टी या संगठन का नहीं, बल्कि न्याय और समानता का है।

सिंध में ज़मींदारी व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की असुरक्षा

कैलाश कोलही की हत्या ने एक बार फिर ज़मींदारी व्यवस्था की कठोर सच्चाई को सामने ला दिया है। जमीन, ताक़त और हथियार—इन तीनों के सहारे प्रभावशाली वर्ग अक्सर कमजोरों पर हावी रहता है। अल्पसंख्यक समुदायों के लिए यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि उनके पास न तो राजनीतिक ताक़त होती है और न ही प्रभावी संरक्षण।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।