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S. Jaishankar: भारत-अमेरिका संबंधों में नई उमंग, कुआलालंपुर में जयशंकर और रुबियो की उच्चस्तरीय वार्ता से सहयोग को नई दिशा

India-US Bilateral Talks
India-US Bilateral Talks – कुआलालंपुर में जयशंकर और रुबियो की वार्ता से द्विपक्षीय रिश्तों में नई ऊर्जा (File Photo)
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भारत-अमेरिका संबंधों में नई उमंग: कुआलालंपुर में जयशंकर और रुबियो की उच्चस्तरीय वार्ता से सहयोग को नई दिशा

कुआलालंपुर, 27 अक्टूबर (वार्ता) — विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने सोमवार को कुआलालंपुर में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक आसियान (ASEAN) वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जहाँ दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों में आई हाल की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

इस मुलाकात को दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में “नई शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है, खासतौर पर तब जब व्यापारिक तनावों ने बीते महीनों में संबंधों पर छाया डाली थी।


भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि

बीते कुछ महीनों से भारत-अमेरिका संबंधों में खिंचाव देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% तक का शुल्क लगाने और रूसी कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25% लेवी लगाने के फैसले से भारत ने नाराजगी जताई थी। भारत ने इसे “अनुचित, अन्यायपूर्ण और असंगत” बताया था।

इन परिस्थितियों में जयशंकर और रुबियो की मुलाकात को संबंध सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


वार्ता के मुख्य विषय: व्यापार और सामरिक साझेदारी

दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर विशेष बल दिया गया। अब तक पाँच दौर की वार्ताएँ पूरी हो चुकी हैं और अधिकारियों के अनुसार, “पहले चरण का समझौता बहुत निकट” है।

साथ ही, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए रक्षा और तकनीकी सहयोग को भी विस्तार देने पर विचार हुआ। जयशंकर ने कहा कि भारत, “समान मूल्यों और पारस्परिक हितों के आधार पर” अमेरिका के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।


क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहमति

कुआलालंपुर वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव, और इंडो-पैसिफिक में संतुलन जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा,

“आज सुबह कुआलालंपुर में @SecRubio से मुलाकात कर खुशी हुई। द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”

यह संकेत है कि भारत और अमेरिका केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहकर व्यापक रणनीतिक भागीदारी की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।


आसियान सम्मेलन की पृष्ठभूमि

मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर इस वर्ष आसियान शिखर सम्मेलन की मेज़बान है। 11 सदस्यीय यह संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे प्रभावशाली समूह माना जाता है। भारत, अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसके संवाद भागीदार हैं।

इस अवसर पर जयशंकर ने मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन और थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ से भी द्विपक्षीय वार्ता की।


भारत की दृष्टि: संवाद और समानता का पुल

भारत लंबे समय से “वैश्विक दक्षिण” की आवाज़ के रूप में उभर रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ नए सिरे से संवाद, अंतरराष्ट्रीय नीति में संतुलन का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच “विश्वास बहाली की प्रक्रिया” का हिस्सा है, जो आने वाले महीनों में व्यापारिक समझौते और रक्षा सहयोग में दिखाई दे सकती है।


संबंधों में सकारात्मक संकेत

कुआलालंपुर में हुई यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करती है। जहाँ पहले व्यापारिक विवादों ने रिश्तों में दरार डाली थी, वहीं अब संवाद और समझ का नया दौर शुरू होता दिख रहा है।

जयशंकर और रुबियो की यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि एशियाई भू-राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।


यह समाचार पीटीआई(PTI) के इनपुट के साथ प्रकाशित किया गया है।


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Asfi Shadab

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