Islamabad Shia Imambargah Attack: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोपहर के समय एक शिया इमामबाड़े पर हुए आत्मघाती हमले ने पूरे देश को हिला दिया है। इस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। यह हमला उस समय हुआ जब इमामबाड़े में नमाज़ पढ़ने के लिए श्रद्धालु इकट्ठा हुए थे। पाकिस्तानी मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हमला तरलाई इलाके में स्थित कसर-ए-खदीजतुल कुबरा इमामबाड़े पर किया गया।
Visuals from Islamabad,
Emergency declared after an explosion pic.twitter.com/zhRyf6KuRc— War & Gore (@Goreunit) February 6, 2026
हमले का खौफनाक मंजर
हमला दोपहर के समय हुआ जब इमामबाड़े में नमाज़ अदा की जा रही थी। हमलावर ने इमामबाड़े के मुख्य गेट पर प्रवेश करने की कोशिश की। सुरक्षा गार्डों ने उसे रोकने का प्रयास किया और उस पर गोली भी चलाई। लेकिन गोली लगने के बावजूद हमलावर ने गेट के पास ही खुद को विस्फोट कर दिया। इस जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल गया।
विस्फोट इतना तेज था कि इमामबाड़े की दीवारें टूट गईं, चारों ओर मलबा बिखर गया, और नमाज़ियों के जूते-चप्पल बिखरे पड़े थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जगह-जगह खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे और नमाज़ की चटाइयों पर शवों के टुकड़े बिखरे थे। यह दृश्य बेहद दर्दनाक और भयावह था।
मौके पर पहुंची बचाव टीमें
धमाके की सूचना मिलते ही बचाव दल और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अस्पतालों में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है। डॉक्टरों और नर्सों की अतिरिक्त टीमें बुलाई गईं ताकि घायलों का इलाज किया जा सके।
बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों ने बताया कि कई घायल गंभीर हालत में हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। कुछ घायलों को विशेष उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और साक्ष्य जुटाने का काम शुरू कर दिया है।
परिवारों की तड़प और राहत की कहानियां
हमले के बाद इमामबाड़े के बाहर मारे गए और घायल लोगों के परिजनों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग रो-रो कर अपने परिजनों को खोज रहे थे। कुछ लोगों को अपने प्रियजनों के शव मिले तो कुछ अस्पतालों में भर्ती घायलों को देखकर राहत की सांस ली।
एक व्यक्ति ने राहत जताई कि उसके पिता बीमार होने के कारण आज नमाज़ पढ़ने नहीं गए थे। उसने कहा कि अगर वे गए होते तो शायद वह भी इस हमले का शिकार हो जाते। इस तरह की छोटी-छोटी बातों ने कुछ परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचा लिया।
बढ़ती मौतों की संख्या
शुरुआत में मौतों की संख्या कम बताई गई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह आंकड़ा बढ़ता गया। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं।
घायलों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
जिम्मेदारी का दावा अभी तक नहीं
हमले के कई घंटे बीत जाने के बाद भी किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं और हमलावर की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं। पुलिस ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ हमले पहले भी होते रहे हैं। विभिन्न आतंकी संगठनों ने अतीत में शिया इमामबाड़ों, मस्जिदों और जुलूसों को निशाना बनाया है। इसलिए इस हमले को भी सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा माना जा रहा है।
सुरक्षा में बड़ी चूक
यह हमला इस्लामाबाद जैसे संवेदनशील शहर में होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। राजधानी में इमामबाड़ों की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जाती रही हैं। हालांकि सुरक्षा गार्डों ने हमलावर को गेट पर ही रोकने की कोशिश की और उस पर गोली भी चलाई, लेकिन वह विस्फोट करने में सफल रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थानों पर सुरक्षा और मजबूत करने की जरूरत है। मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरे और प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जरूरी है।
शोक और निंदा की लहर
Islamabad Shia Imambargah Attack: इस हमले की पूरे पाकिस्तान में निंदा की जा रही है। राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा की है। शिया समुदाय के नेताओं ने सरकार से बेहतर सुरक्षा की मांग की है।
सोशल मीडिया पर भी लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी। नमाज़ पढ़ने वाले लोगों पर हमला करना घोर अमानवीयता है।
आगे की चुनौतियां
यह हमला पाकिस्तान में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा का एक और उदाहरण है। देश में शिया-सुन्नी तनाव समय-समय पर सामने आता रहा है। विभिन्न चरमपंथी संगठन इस विभाजन को और गहरा करने का प्रयास करते हैं।
सरकार को न केवल सुरक्षा बढ़ानी होगी बल्कि चरमपंथी विचारधारा के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने होंगे। शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थानों में सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देना जरूरी है।
इस्लामाबाद में हुआ यह हमला एक बार फिर याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी भी धर्म, समुदाय या देश का नहीं होता। यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है जिसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए और इसके खिलाफ सभी को मिलकर खड़ा होना चाहिए।