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नेपाल में भड़की हिंसा: मस्जिद में तोड़-फोड़, इलाके में लगा कर्फ्यू; भारत-नेपाल बॉर्डर सील

नेपाल में भड़की हिंसा
नेपाल में भड़की हिंसा (Pic- Screen Grab)
बीरगंज में टिकटॉक वीडियो से शुरू हुआ विवाद अफवाहों और उपद्रव के बाद कर्फ्यू तक पहुंच गया। प्रशासन ने सख्त कदम उठाए और शांति बनाए रखने की अपील की। यह घटना सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और सामाजिक संयम की अहमियत को रेखांकित करती है।
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Nepal Violence: नेपाल का बीरगंज एक ऐसा शहर है, जो हमेशा से व्यापार, संस्कृति और सीमावर्ती आपसी मेलजोल के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन बीते कुछ दिनों में यही शहर अचानक तनाव, अफवाह और भय के माहौल में घिर गया। इस बार विवाद की जड़ न कोई बड़ा राजनीतिक फैसला था और न ही कोई प्रशासनिक बदलाव, बल्कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया एक वीडियो, जिसने धीरे-धीरे पूरे शहर को कर्फ्यू की स्थिति तक पहुंचा दिया। सुरक्षा के मद्देनजर भारत-नेपाल बॉर्डर सील कर दिया गया है.

हिंदू समुदाय ने वीडियो पर जतायी आपत्ति

शहर में तनाव की शुरुआत उस समय हुई, जब हैदर अंसारी और अमानत अंसारी नामक दो युवकों ने टिकटॉक पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो को लेकर हिंदू समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। शुरुआती स्तर पर यह मामला स्थानीय असहमति तक सीमित था, लेकिन सोशल मीडिया की गति और प्रतिक्रियाओं ने इसे तेजी से भड़का दिया।

पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन का मानना था कि इससे मामला शांत हो जाएगा, लेकिन इसके उलट तनाव और गहराता चला गया। इसी बीच कमला इलाके में एक मस्जिद में तोड़फोड़ की खबर सामने आई, जिसने हालात को और संवेदनशील बना दिया।

अफवाहों ने बढ़ाया तनाव

स्थानीय विवाद जब सोशल मीडिया पर पहुंचता है, तो वह केवल स्थानीय नहीं रह जाता। बीरगंज के मामले में भी यही हुआ। टिकटॉक और अन्य प्लेटफॉर्म पर कई भ्रामक और उकसाने वाले वीडियो वायरल होने लगे। कुछ वीडियो में घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, तो कुछ में बिना पुष्टि के आरोप लगाए गए।

इन अफवाहों ने लोगों के बीच अविश्वास और भय को बढ़ाया। नतीजा यह हुआ कि शहर के अलग-अलग इलाकों में उपद्रव, पत्थरबाजी और तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए। प्रशासन के सामने चुनौती केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने की नहीं थी, बल्कि सूचना के इस बवंडर को रोकने की भी थी।

कर्फ्यू का फैसला और प्रशासन की सख्ती

हालात बिगड़ते देख पुलिस-प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा बल किसी भी उपद्रवी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं।

आम नागरिकों को सलाह दी गई कि वे केवल अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए ही घर से बाहर निकलें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या उपद्रव की स्थिति में तुरंत 100 नंबर पर सूचना देने को कहा गया। प्रशासन का कहना है कि ये कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा के लिए उठाए गए हैं।

आम लोगों में डर

कर्फ्यू का असर सबसे ज्यादा आम नागरिकों पर पड़ता है। दुकानें बंद, स्कूल-कॉलेज ठप और रोजमर्रा की जिंदगी अचानक थम सी जाती है। बीरगंज के कई निवासियों का कहना है कि वे डर और असमंजस में हैं। उन्हें चिंता है कि अफवाहों और नफरत की राजनीति कहीं शहर की साझी विरासत को नुकसान न पहुंचा दे।

कई बुजुर्गों ने याद दिलाया कि बीरगंज ने पहले भी मुश्किल दौर देखे हैं, लेकिन हर बार आपसी समझ और संयम से हालात सुधरे हैं। उनका मानना है कि इस बार भी समाधान का रास्ता संवाद और शांति से ही निकलेगा।

फिलहाल प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी। कर्फ्यू हटने के बाद भी यदि अविश्वास और भय बना रहा, तो घाव भरने में समय लगेगा। जरूरत है कि सभी समुदाय मिलकर अफवाहों को नकारें और शांति का संदेश दें।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।