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ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर दावा करते हुए नाटो सहयोगियों का उड़ाया मजाक, बदले हुए अमेरिकी नक्शे के साथ किया पोस्ट

ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर दावा करते हुए नाटो सहयोगियों का उड़ाया मजाक, बदले हुए अमेरिकी नक्शे के साथ किया पोस्ट
Trump Mocks NATO: ट्रंप ने नाटो सहयोगियों का उड़ाया मजाक, ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र दिखाने वाला नक्शा किया शेयर (File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपने दावे को लेकर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने एक बदला हुआ अमेरिकी नक्शा शेयर किया जिसमें ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। इस नक्शे में नाटो नेता ओवल ऑफिस में बैठे नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इस द्वीप को जरूरी बताया है।

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Asfi Shadab
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसा नक्शा शेयर किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस नक्शे में ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा केवल एक तस्वीर नहीं है बल्कि इसके जरिए ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों के नेताओं का मजाक भी उड़ाया है।

ट्रंप का ग्रीनलैंड पर दावा

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया है। उनका कहना है कि यह आर्कटिक द्वीप अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डेनमार्क के पास इस द्वीप की रक्षा करने की पर्याप्त क्षमता नहीं है।

फ्लोरिडा में संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें यह द्वीप लेना ही होगा। यह एक राष्ट्रीय जरूरत है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि यूरोपीय संघ इस मामले में ज्यादा विरोध नहीं करेगा।

नाटो नेताओं का मजाक

ट्रंप द्वारा शेयर की गई तस्वीर में कई बड़े यूरोपीय नेता ओवल ऑफिस में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन शामिल हैं। इन सभी के पीछे की दीवार पर एक बदला हुआ अमेरिकी नक्शा लगा है जिसमें ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है।

यह तस्वीर साफ तौर पर नाटो सहयोगियों को संदेश देने के लिए बनाई गई है। ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे सकता है।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया

ट्रंप का दावा है कि यूरोपीय संघ इस मामले में ज्यादा विरोध नहीं करेगा। हालांकि अभी तक यूरोपीय संघ या डेनमार्क की सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव का कारण बन सकता है।

ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है और वहां की स्थानीय सरकार भी इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर चुकी है। पहले भी ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव रखा था जिसे डेनमार्क ने सिरे से खारिज कर दिया था।

नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़ी टिप्पणी

ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को लिखे एक पत्र में अपने ग्रीनलैंड के दावे को नोबेल शांति पुरस्कार से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला जबकि उन्हें मिलना चाहिए था। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।

नाटो महासचिव से बातचीत

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह भी लिखा कि उन्होंने नाटो के महासचिव मार्क रुटे से ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बात की है। उन्होंने कहा कि यह बातचीत बेहद अच्छी रही और उन्होंने सभी को साफ शब्दों में बता दिया है कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

ट्रंप ने लिखा कि इस मामले में कोई पीछे नहीं हटेगा और इस बात पर सभी सहमत हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि नाटो महासचिव ने वास्तव में ट्रंप के इस दावे का समर्थन किया है या नहीं।

रूस और चीन का मुद्दा

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेने की अपनी मांग को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव से जोड़ा है। उनका कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में इन दोनों देशों की बढ़ती गतिविधियां अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति के कारण यह सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

आर्कटिक क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघल रही है जिससे नए जहाजी रास्ते खुल रहे हैं। साथ ही इस क्षेत्र में तेल और खनिज संपदा की भी बड़ी संभावनाएं हैं। यही कारण है कि कई देश इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल

ट्रंप के इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों ने सवाल उठाए हैं। किसी भी स्वतंत्र देश या उसके क्षेत्र को जबरन लेना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ग्रीनलैंड के लोगों ने भी साफ कर दिया है कि वे अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वे अमेरिका में अपने समर्थकों को यह दिखाना चाहते हैं कि वे देश की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने को तैयार हैं।

दावोस यात्रा से पहले का बयान

यह बयान ट्रंप की दावोस यात्रा से ठीक पहले आया है। दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक में दुनियाभर के नेता शामिल होंगे। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे मजबूत है।

ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति उल्टी भी पड़ सकती है और अमेरिका के पुराने सहयोगी देश दूर हो सकते हैं।

ट्रंप का यह बयान और नक्शा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म देगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यूरोपीय देश और डेनमार्क इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।