अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कनाडा को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने चीन के साथ कोई व्यापार समझौता किया तो अमेरिका उस पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देगा। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध पहले से ही चरम पर है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी का मतलब
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि कनाडा को अमेरिका और चीन के बीच चुनाव करना होगा। उनका कहना है कि अगर कनाडा चीन के साथ किसी भी तरह का व्यापार समझौता करता है तो वह अमेरिकी हितों के खिलाफ माना जाएगा। ऐसी स्थिति में अमेरिका कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। इस टैरिफ का मतलब होगा कि कनाडाई सामानों की कीमत अमेरिकी बाजार में दोगुनी हो जाएगी जिससे वे पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे।
ट्रंप की यह रणनीति उनकी अमेरिका फर्स्ट नीति का हिस्सा है। वे चाहते हैं कि अमेरिका के सभी पड़ोसी और सहयोगी देश चीन से दूरी बनाए रखें और अमेरिकी व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दें।
अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंध
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध बेहद पुराने और गहरे हैं। दोनों देशों के बीच हर साल अरबों डॉलर का व्यापार होता है। कनाडा अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अमेरिका भी कनाडा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजार है। दोनों देशों के बीच लंबी सीमा है और रोजाना हजारों ट्रक और रेल गाड़ियां माल लेकर एक देश से दूसरे देश जाती हैं।
कनाडा से अमेरिका में तेल, प्राकृतिक गैस, लकड़ी, धातु और कई तरह के खाद्य पदार्थ आते हैं। वहीं अमेरिका से कनाडा में कारें, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कृषि उत्पाद जाते हैं। अगर ट्रंप 100 फीसदी टैरिफ लगाते हैं तो इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।
चीन के साथ कनाडा के रिश्ते
कनाडा ने हाल के वर्षों में चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंध बढ़ाने की कोशिश की है। चीन कनाडा का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। कनाडा चीन को कच्चा माल, खनिज और कृषि उत्पाद बेचता है। वहीं चीन से कनाडा में इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और अन्य उपभोक्ता सामान आते हैं।
हालांकि कनाडा-चीन संबंधों में भी तनाव रहा है। चीन की दूरसंचार कंपनी हुआवे की एक वरिष्ठ अधिकारी को कनाडा में गिरफ्तार करने के बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए थे। चीन ने इसके जवाब में कई कनाडाई नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन अब दोनों देश फिर से संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
व्यापार युद्ध का असर
अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापार युद्ध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। ट्रंप ने चीन पर पहले ही भारी टैरिफ लगा रखे हैं और चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ाए हैं। इस व्यापार युद्ध में अब अन्य देश भी फंसते जा रहे हैं।
ट्रंप चाहते हैं कि सभी देश चीन से दूरी बनाए रखें और अमेरिका के साथ व्यापार करें। उनका मानना है कि चीन अनुचित व्यापार प्रथाओं का इस्तेमाल करता है और अमेरिकी कंपनियों की तकनीक चुराता है। इसलिए वे चीन को अलग-थलग करने की रणनीति अपना रहे हैं।
कनाडा के सामने मुश्किल चुनाव
ट्रंप की चेतावनी ने कनाडा को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। एक तरफ अमेरिका उनका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दूसरी तरफ चीन एक बड़ा बाजार है। अगर कनाडा अमेरिका की बात मानता है तो उसे चीन के साथ व्यापार के अवसर खोने पड़ेंगे। वहीं अगर वह चीन के साथ समझौता करता है तो अमेरिका से भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
कनाडाई सरकार अभी तक ट्रंप की धमकी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को खराब नहीं करना चाहेगा क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रंप की इस धमकी पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। कुछ देश अमेरिका की इस आक्रामक व्यापार नीति की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मुक्त व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे वैश्विक व्यापार प्रणाली को नुकसान होगा।
वहीं कुछ देश अमेरिका के रुख को समझ रहे हैं और चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं। उनका मानना है कि चीन की आर्थिक और सैन्य शक्ति को संतुलित करने के लिए कुछ कठोर कदम उठाने जरूरी हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि 100 फीसदी टैरिफ एक बहुत बड़ा कदम होगा जो दोनों देशों को नुकसान पहुंचाएगा। अमेरिकी उपभोक्ताओं को कनाडाई सामान के लिए दोगुनी कीमत चुकानी पड़ेगी जिससे महंगाई बढ़ेगी। वहीं कनाडा की कंपनियां अमेरिकी बाजार खो देंगी जिससे वहां बेरोजगारी बढ़ सकती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक धमकी है और ट्रंप वास्तव में इतना बड़ा टैरिफ नहीं लगाएंगे। उनका उद्देश्य कनाडा पर दबाव बनाना और उसे चीन से दूर रखना है।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले दिनों में अमेरिका-कनाडा संबंधों की दिशा बहुत महत्वपूर्ण होगी। कनाडा को अपने राष्ट्रीय हितों और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन बनाना होगा। संभव है कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करें।
ट्रंप की यह धमकी दिखाती है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में राजनीति की भूमिका बढ़ती जा रही है। देश अब सिर्फ आर्थिक फायदे को देखकर ही व्यापार नहीं कर रहे बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक हितों को भी ध्यान में रख रहे हैं। इस स्थिति में छोटे और मझोले देशों को बड़ी शक्तियों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।