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वेनेजुएला की सत्ता में बड़ा मोड़: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने संभाली कमान

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने संभाली कमान
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने संभाली कमान (File Photo)
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनना वेनेजुएला की राजनीति में बड़ा मोड़ है। चीन, रूस और ईरान के समर्थन के बीच अमेरिका की प्राथमिकता स्थिरता नजर आ रही है। यह संकट देश के भविष्य और वैश्विक राजनीति दोनों को प्रभावित करेगा।
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Venezuela: वेनेजुएला की राजनीति ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर सत्ता की बागडोर डेल्सी रोड्रिगेज के हाथों में सौंप दी गई। यह सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी था कि वेनेजुएला की सत्ता संरचना अचानक आए झटकों के बावजूद टूटने वाली नहीं है।

सोमवार दोपहर जब नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने अपनी बहन डेल्सी रोड्रिगेज को शपथ दिलाई, तो माहौल भावनात्मक भी था और राजनीतिक रूप से बेहद सधा हुआ भी। शपथ ग्रहण के दौरान पवित्र पुस्तक को मादुरो के बेटे द्वारा थामे जाना सत्ता और परिवार के गहरे संबंधों का प्रतीक माना गया।

अमेरिका की कार्रवाई और वेनेजुएला की प्रतिक्रिया

अमेरिका द्वारा मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाकर मुकदमे का सामना कराने का कदम वेनेजुएला सरकार के लिए अप्रत्याशित नहीं था, लेकिन इसकी टाइमिंग ने हालात को विस्फोटक बना दिया। डेल्सी रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर अपहरण करार दिया और कहा कि यह वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला है। सत्ता में त्वरित बदलाव यह दिखाने की कोशिश थी कि देश बिना राष्ट्रपति के भी प्रशासनिक रूप से स्थिर रह सकता है।

भावनात्मक शपथ और राजनीतिक संदेश

डेल्सी रोड्रिगेज शपथ लेते समय भावुक दिखीं। उन्होंने खुद को निकोलस मादुरो की संवैधानिक उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया और ह्यूगो शावेज की विचारधारा के प्रति निष्ठा जताई। यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं था, बल्कि देश के भीतर चाविस्मो आंदोलन को एकजुट रखने की रणनीति भी थी।

चीन, रूस और ईरान की त्वरित मौजूदगी

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद चीन, रूस और ईरान के राजदूतों का सामने आना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में साफ संकेत देता है। ये तीनों देश लंबे समय से वेनेजुएला के रणनीतिक सहयोगी रहे हैं। अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की निंदा कर इन देशों ने यह जता दिया कि वेनेजुएला वैश्विक शक्ति संघर्ष में अकेला नहीं है।

सड़कों पर उतरे समर्थक और शक्ति प्रदर्शन

डेल्सी रोड्रिगेज की शपथ के साथ ही काराकास की सड़कों पर मादुरो समर्थकों की भीड़ दिखाई दी। झंडे, तख्तियां और नारे इस बात का संकेत थे कि सरकार जनता के समर्थन का सार्वजनिक प्रदर्शन करना चाहती है। मादुरो के बेटे गुएरा का बयान कि “हम सड़क पर उतरेंगे” सत्ता के लिए जनभावनाओं को हथियार बनाने की रणनीति को दर्शाता है।

राष्ट्रपति भवन के पास गोलीबारी की खबरें

शपथ ग्रहण के बाद रात में राष्ट्रपति भवन के पास गोलीबारी और ड्रोन देखे जाने की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया, लेकिन यह घटना संकेत देती है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद अस्थिरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

अमेरिका की प्राथमिकता: लोकतंत्र या स्थिरता

वेनेजुएला में अमेरिका के पूर्व राजदूत चार्ल्स शैपिरो का बयान इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखता है। उनका मानना है कि अमेरिका फिलहाल लोकतांत्रिक आदर्शों से ज्यादा स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। आंतरिक मंत्री डियोसदादो कैबेलो का पद पर बने रहना इसी सोच का उदाहरण माना जा रहा है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।