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आचार संहिता लागू होने के बाद सांसद पप्पू यादव पर लगा आरोप — बाढ़ पीड़ितों को खुलेआम बांटे रुपए, हाजीपुर में मचा सियासी हड़कंप

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आचार संहिता लागू होते ही हाजीपुर में पप्पू यादव पर लगा बड़ा आरोप

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है। लेकिन इसी के बीच हाजीपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पूर्णिया के सांसद और जन अधिकार पार्टी (JAP) के प्रमुख पप्पू यादव पर आरोप है कि उन्होंने आचार संहिता लागू होने के बाद खुलेआम लोगों के बीच पैसा बांटा

यह घटना वैशाली जिले के सहदेई प्रखंड के एक गांव की बताई जा रही है, जहां पप्पू यादव बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि गंगा नदी में हो रहे कटाव से प्रभावित कई परिवारों की स्थिति बेहद खराब है, जिनसे मिलने पप्पू यादव स्वयं पहुंचे।

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बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात और आर्थिक मदद का वादा

सूत्रों के अनुसार, सांसद पप्पू यादव ने मौके पर जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों को फोन कर राहत कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पप्पू यादव से कहा कि उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है क्योंकि गंगा के कटाव में उनके घर और खेत पूरी तरह बह गए हैं।

बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने लोगों को 2000 से 3000 रुपए तक की नकद सहायता दी। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।


कैमरे में कैद हुआ ‘कैश वितरण’, चुनाव आयोग तक पहुंची शिकायत

घटना के वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत की है। भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे चुनावी लाभ के लिए की गई “लोकलुभावन कार्रवाई” बताया।

वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सांसद पप्पू यादव ग्रामीणों के बीच बैठे हैं और कुछ लोग उनसे रुपए लेते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो फैलते ही चुनाव आयोग के अधिकारियों ने भी मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।


पप्पू यादव बोले – “मानवता के नाते की मदद, राजनीति नहीं”

विवाद बढ़ने के बाद सांसद पप्पू यादव ने मीडिया से कहा,

“मैंने किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मानवता के नाते पीड़ितों की मदद की। जिन लोगों का घर नदी में बह गया, जिनके पास एक समय का खाना भी नहीं है, उन्हें थोड़ी मदद देना अपराध नहीं है।”

उन्होंने कहा कि जब प्रशासन असहाय लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा, तो समाज के जिम्मेदार लोगों का यह कर्तव्य है कि वे मदद के लिए आगे आएं।


विपक्षी दलों का हमला — “आचार संहिता का खुला उल्लंघन”

वहीं विपक्षी दलों ने पप्पू यादव के इस बयान को ढकोसला बताते हुए कहा कि यह मदद नहीं, बल्कि “चुनावी फायदा उठाने का प्रयास” है।
भाजपा नेता ने कहा,

“आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी प्रतिनिधि को इस तरह की आर्थिक मदद करने की अनुमति नहीं है। पप्पू यादव ने खुलकर नियमों का उल्लंघन किया है। चुनाव आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

राजद और जदयू नेताओं ने भी आयोग से इस पूरे प्रकरण की जांच कर FIR दर्ज करने की मांग की है।


चुनाव आयोग की नजर में आया मामला

सूत्रों के अनुसार, बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वैशाली जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। स्थानीय चुनाव अधिकारी ने बताया कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और यदि यह प्रमाणित होता है कि पप्पू यादव ने नकद राशि वितरित की, तो यह आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।


जनता की प्रतिक्रिया — “सच्ची मदद या राजनीतिक चाल?”

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पप्पू यादव को “जनता का नेता” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “सस्ती लोकप्रियता पाने का तरीका” कह रहे हैं।

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा,

“हम लोग बाढ़ से बर्बाद हो गए हैं। अगर सांसद साहब ने थोड़ी मदद की है तो इसमें गलत क्या है?”
वहीं एक अन्य व्यक्ति का कहना था,
“अगर हर नेता चुनाव से पहले पैसे बांटेगा तो लोकतंत्र का क्या होगा?”


निष्कर्ष

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान 6 तारीख को होना है और उससे ठीक पहले यह मामला सियासी माहौल को गरमा गया है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पप्पू यादव पर किसी तरह की पाबंदी लगाई जाती है या नहीं।


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Aakash Srivastava

राष्ट्रभारत में लेखक एवं संपादक | राजनीतिक विश्लेषक | खेल और व्यवसाय की रिपोर्टिंग में विशेष रुचि | पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से स्नातक।