नागपुर के कामठी इलाके में एक प्रतिकूल अवस्था में पाई गई जीवित लेकिन गंभीर रूप से घायल काली चील की करुण कथा ने यह दर्शाया कि अगर सही समय पर जागरूकता एवं सहायता मिले, तो प्रकृति को एक नई सांस दी जा सकती है।
संकट और तत्परता की घड़ी
17 सितंबर की सुबह, स्थानीय नागरिक श्री कमलेश कांबळे ने ट्रांज़िट हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सूचना दी कि कामठी क्षेत्र में एक चील बहुत बुरी हालत में पड़ी है। सूचना मिलते ही ट्रांज़िट रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वह चील इतनी कमजोर थी कि लगभग कुछ भी खाने-पीने की शक्ति नहीं थी। पशु चिकित्सक जब निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि चील की अन्ननली (food pipe / esophagus) फट चुकी थी। इस कारण जो भी उसे दिया जा रहा था, वह बाहर निकल जाता था, और लंबे समय से कुछ सेवन न कर पाने के कारण उसकी हालत बहुत गंभीर बन चुकी थी।
तत्काल शल्यक्रिया और उपचार
चील की जटिल स्थिति को देखते हुए, उसे तुरंत ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। वहां अन्ननली की सिलाई की गई और गले में आवश्यक टांके लगाए गए। इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न करने के बाद वह आईसीयू की तरह बनाए गए مراقبت क्षेत्र में रखा गया। शुरू में उसे हाथ से खाना खिलाया गया, क्योंकि वह खुद से भोजन न कर पा रही थी।
यह महीना किसी युद्ध जैसा था — पशु चिकित्सक, पशु सहायकों और देखरेख टीम ने दिन-रात मेहनत की। धीरे-धीरे, चील की स्थिति सुधारने लगी। वह अब धीरे-धीरे स्वयं से भोजन लेने लगी और उसके स्वास्थ्य में स्थिर प्रगति देखने को मिली।
स्वस्फूर्ति और रिहाई
समय के साथ सभी चिकित्सकीय परीक्षण किए गए। जब यह सुनिश्चित हो गया कि चील पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है और किसी तरह की जटिलता शेष नहीं है, तो उसे प्रकृति में मुक्त किया गया। उस दिन, वह आकाश की ओर ऊँची उड़ान भरते हुए स्वंतन्त्रता की ओर रवाना हुई — एक प्रतीक कि पुनरुत्थान संभव है।
इस पूरी प्रक्रिया में नागरिक की जागरूकता, समय पर सूचना, ट्रांज़िट टीम की तत्परता, और डॉक्टरों-प्रशासन की समर्पित भागीदारी अहम सिद्ध हुई।
ट्रांज़िट सेंटर की सफलता दर और प्रभाव
ट्रांज़िट उपचार केंद्रों की सफलता दर अब 79.5 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है — यानी लगभग हर पाँच में चार घायल वन्यजीवों को पुनर्जीवन मिलता है। यह आंकड़ा यह दिखाता है कि कैसे संरचनात्मक व्यवस्था व समर्पित टीम मिलकर जीवों को नई जिंदगी दे सकती है।
इस प्रकार की घटनाएँ वन्यजीवों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और मानव-प्रकृति सामंजस्य के लिए प्रेरणा हैं।