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पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव आयोग और मतदाता सूची विवाद: अभिषेक बनर्जी पर भाजपा का पलटवार

Election Commission Voter List Controversy: अभिषेक बनर्जी और भाजपा के बीच तीखी बहस
Election Commission Voter List Controversy: अभिषेक बनर्जी और भाजपा के बीच तीखी बहस (File Photo)
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन को लेकर TMC नेता अभिषेक बनर्जी और भाजपा में तीखी बहस छिड़ गई है। 24 लाख नामों को हटाने पर अभिषेक ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने करारा जवाब देते हुए TMC पर पलटवार किया। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजनीतिक गर्मी बढ़ा रहा है।
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर बवाल मच गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। चुनाव आयोग से हुई बैठक के बाद अभिषेक बनर्जी के बयानों पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने जोरदार पलटवार किया है। यह विवाद आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा

पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के संशोधित संस्करण को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। अभिषेक बनर्जी का कहना है कि चुनाव आयोग उनकी चिंताओं को दूर करने में पूरी तरह असफल रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर अंतिम मतदाता सूची में विसंगतियां मिलती हैं तो उनकी पार्टी इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। टीएमसी ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने तक की बात कही है।

चुनाव आयोग ने राज्य में करीब 24 लाख लोगों को मृत होने के कारण मतदाता सूची से हटाया है। इस बड़े पैमाने पर हुए बदलाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस सवाल उठा रही है। पार्टी का मानना है कि यह कवायद चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की साजिश हो सकती है।

भाजपा का तीखा जवाब

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने शनिवार को अभिषेक बनर्जी के बयानों पर करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब अभिषेक बनर्जी चुनाव आयोग गए थे तो आयुक्तों ने उन्हें मतदाता सूची के संशोधन की पूरी प्रक्रिया समझाई थी। इसके बाद से उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है और वे अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं।

मजूमदार ने तंज कसते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी एक बार दिल्ली गए थे और चप्पल छोड़कर भागे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पुलिस पश्चिम बंगाल की पुलिस की तरह नहीं है जहां टेबल के नीचे जाकर छिपा जा सके। भाजपा नेता ने साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में TMC नेताओं को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

तीन लोगों का रैंप वॉक और 24 लाख का गणित

सुकांत मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी के उस बयान का मजाक उड़ाया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे भूतों का रैंप वॉक कराएंगे। भाजपा नेता ने कहा कि अभिषेक बनर्जी केवल तीन लोगों को लेकर आए जो कथित रूप से मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए थे। उन्होंने पूछा कि 24 लाख में से केवल तीन लोग कितना प्रतिशत बनते हैं।

मजूमदार ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी को कागज और कलम देकर बांग्ला में एक पेज लिखने को कहा जाए तो उसमें इससे ज्यादा गलतियां निकलेंगी। उन्होंने समझाया कि ड्राफ्ट लिस्ट इसीलिए जारी की जाती है ताकि अगर कोई गलती हो तो उसे ठीक किया जा सके।

अभिषेक बनर्जी के गंभीर आरोप

अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनावों में वोट चोरी ईवीएम के माध्यम से नहीं बल्कि मतदाता सूची के माध्यम से हो रही है। उन्होंने दावा किया कि अगर विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाया होता तो महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में उनकी जीत हो सकती थी।

टीएमसी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रवैये को भी सवालों के घेरे में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान आयुक्त का व्यवहार आक्रामक था और जब वे अपनी बात रखने लगे तो वे अपना आपा खोने लगे। अभिषेक ने कहा कि उन्होंने आयुक्त को याद दिलाया कि वे मनोनीत हैं जबकि वे खुद एक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।

चुनावी रणनीति या वास्तविक चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा लगातार बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है जबकि टीएमसी अपने गढ़ को बचाने के लिए हर मोर्चे पर सक्रिय है।

सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि बंगाल के हिंदू और अन्य धर्मों के लोग भाजपा के समर्थन में लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में टीएमसी को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे अभिषेक बनर्जी कितनी भी यात्राएं कर लें, अंत में टीएमसी का ही सफाया होने वाला है।

जनता की राय का महत्व

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आम जनता इसे कैसे देखती है। मतदाता सूची की शुद्धता किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की बुनियाद होती है। अगर वाकई इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी है तो यह चिंता का विषय है। दूसरी ओर, अगर यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है तो यह जनता के साथ खिलवाड़ है।

चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया पारदर्शी रखने का दावा किया है। ड्राफ्ट लिस्ट इसीलिए जारी की जाती है ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी आपत्तियां दर्ज करा सके। अब यह देखना होगा कि अंतिम मतदाता सूची में कितने बदलाव होते हैं और क्या टीएमसी की चिंताओं को दूर किया जाता है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। भाजपा और टीएमसी के बीच यह तीखी बहस आने वाले चुनावों का संकेत दे रही है। दोनों पार्टियां अपने-अपने तरीके से जनता को साधने की कोशिश कर रही हैं। अंतिम फैसला तो मतदाता ही करेंगे, लेकिन इस बीच राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी रहने की संभावना है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपना काम करे ताकि किसी को भी शिकायत का मौका न मिले।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।