Gujarat Earthquake: गुजरात के राजकोट जिले में शुक्रवार की सुबह आम लोगों के लिए बेचैनी लेकर आई। जेतपुर, धोराजी, उपलेटा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक के बाद एक भूकंप के झटकों ने धरती को हिला दिया। सुबह की शुरुआत ही डर और अनिश्चितता के साथ हुई, जब लोग नींद से जागते ही जमीन को कांपते महसूस करने लगे। बार-बार आए झटकों ने लोगों के मन में पुराने भूकंपों की यादें ताजा कर दीं और पूरा इलाका दहशत के माहौल में डूब गया।
हालांकि भूकंप की तीव्रता मध्यम रही, लेकिन झटकों की संख्या ज्यादा होने के कारण डर का असर गहरा रहा। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एहतियातन स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम न रहे।
सुबह-सुबह कांपी धरती, लोगों की नींद उड़ गई
शुक्रवार सुबह करीब 6 बजकर 19 मिनट पर जब सबसे तेज झटका महसूस हुआ, तब अधिकांश लोग घरों में थे। अचानक फर्नीचर हिलने, बर्तनों की आवाज आने और दीवारों में कंपन महसूस होने से लोग घबराकर बाहर निकल आए। कुछ ही मिनटों के अंतराल पर दोबारा झटके आने लगे, जिससे डर और बढ़ गया। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह रही। कई लोग घरों से निकलकर खुले खेतों और सड़कों पर खड़े हो गए। बुजुर्गों और बच्चों में सबसे ज्यादा घबराहट देखी गई।
एक के बाद एक सात झटकों ने बढ़ाई चिंता
इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार, सुबह 6:19 बजे से 8:34 बजे के बीच कुल सात भूकंप के झटके दर्ज किए गए। सबसे अधिक तीव्रता वाला भूकंप 3.8 मापा गया, जबकि अन्य झटकों की तीव्रता 2.7 से 3.2 के बीच रही।
लगातार झटकों ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं यह किसी बड़े भूकंप की चेतावनी तो नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे झटके कई बार जमीन के भीतर जमा तनाव को बाहर निकालने का संकेत होते हैं।
केंद्र और गहराई ने बढ़ाई हलचल
आईएसआर की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी भूकंपों का केंद्र उपलेटा से लगभग 27 से 30 किलोमीटर दूर पूर्व-उत्तरपूर्व दिशा में स्थित था। इन भूकंपों की गहराई 6.1 किलोमीटर से लेकर 13.6 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई।
कम गहराई में आए भूकंप आमतौर पर ज्यादा महसूस किए जाते हैं, यही वजह है कि तीव्रता कम होने के बावजूद झटकों का असर लोगों तक साफ पहुंचा।
स्कूलों में छुट्टी, प्रशासन अलर्ट मोड पर
लगातार भूकंप के झटकों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क कर दिया गया है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाए।
लोगों के मन में फिर जागा 2001 का डर
राजकोट और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भूकंप कोई नया अनुभव नहीं है। वर्ष 2001 के विनाशकारी भुज भूकंप की यादें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं। शुक्रवार के झटकों ने उन जख्मों को फिर से हरा कर दिया।
कई लोगों ने बताया कि जैसे ही जमीन हिली, उन्हें सबसे पहले वही पुराना डर याद आया। इसी कारण लोग घरों के भीतर रुकने के बजाय बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे थे।