बिहार की राजनीति में एक बार फिर विवाद की आग भड़क उठी है। इस बार मुद्दा बना है सूअर, जिस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बीच बयानों की जंग छिड़ गई है। गिरिराज सिंह के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान ने जहां विवाद खड़ा किया, वहीं पप्पू यादव के जवाब ने राजनीतिक पारा और भी गर्म कर दिया है। भाजपा ने पप्पू यादव से माफी की मांग करते हुए उनकी टिप्पणी को ओछा बताया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
बेगूसराय से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को बछवाड़ा में एनडीए कार्यकर्ता सम्मान समारोह में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में बिहार सरकार के मंत्री सुरेंद्र मेहता भी मौजूद थे। गिरिराज सिंह ने अपने भाषण में कहा कि सरकार में गाय, दूध, मछली, अंडा और बकरी के लिए मंत्री हैं, लेकिन उन्हें सूअर का मंत्री चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां सूअर रहते हैं, वहां इधर-उधर वाला आदमी नहीं आता। यह टिप्पणी एक खास धर्म के लोगों की ओर इशारा करती दिखी, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया।
गिरिराज सिंह के बयान का मतलब
गिरिराज सिंह ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि अगर सूअर पालन को बढ़ावा दिया जाए तो कुछ खास इलाकों में अवैध कब्जे और घुसपैठ की समस्या कम हो सकती है। उनका मानना है कि सूअर पालन से गांवों में सफाई भी बनी रहती है और खास समुदाय के लोग ऐसी जगहों पर नहीं आते। हालांकि, इस बयान को कई लोगों ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश माना और विवाद खड़ा हो गया।
पप्पू यादव का पलटवार
गिरिराज सिंह के बयान पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर गिरिराज सिंह पर हमला बोला। पप्पू यादव ने लिखा कि काम न धाम, बस कीचड़ में लोटना इनका काम है। उन्होंने गिरिराज सिंह का नाम सूअर से भी जोड़ते हुए कहा कि जो लोग राजनीति में गंदगी फैलाते हैं, वे खुद कीचड़ में रहते हैं। पप्पू यादव की इस टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
भाजपा की नाराजगी
पप्पू यादव के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने पप्पू यादव की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह ओछी सोच का नमूना है। उन्होंने कहा कि आसमान की तरफ थूकने से थूक खुद के ऊपर ही गिरता है। नीरज कुमार ने गिरिराज सिंह का बचाव करते हुए कहा कि उनके पास बाघ का करेजा है और वे साफ-साफ बात रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू यादव हमेशा सरकार के काम में रोड़ा अटकाने की कोशिश करते हैं और अब उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया
इस विवाद पर बिहार की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी राय रखी है। राजद और कांग्रेस ने गिरिराज सिंह के बयान को सांप्रदायिक और विभाजनकारी बताया है। उनका कहना है कि भाजपा नेता हमेशा धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करते हैं और समाज में नफरत फैलाने का काम करते हैं। वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है।
बिहार में बढ़ता राजनीतिक तनाव
यह पहली बार नहीं है जब बिहार में किसी मुद्दे को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। पिछले कुछ समय से बिहार की राजनीति में तनाव का माहौल बना हुआ है। चुनावी साल में पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में लगी हुई हैं। गिरिराज सिंह और पप्पू यादव के बीच यह बयानबाजी भी इसी राजनीतिक खेल का हिस्सा लग रही है।
सोशल मीडिया पर बहस
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस हो रही है। कुछ लोग गिरिराज सिंह के बयान का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग पप्पू यादव के पक्ष में खड़े हैं। ट्विटर और फेसबुक पर इस मुद्दे को लेकर कई ट्रेंड्स चल रहे हैं। लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं और इस विवाद को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
क्या है असली मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा विवाद राजनीतिक फायदे के लिए खड़ा किया गया है। बिहार में आने वाले समय में चुनाव होने वाले हैं और पार्टियां अपना वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश में लगी हुई हैं। ऐसे में धर्म, जाति और सांप्रदायिकता के मुद्दे उठाना आम बात हो गई है। असल मुद्दे जैसे विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पीछे छूट जाते हैं।
आगे क्या होगा
अभी यह देखना बाकी है कि यह विवाद कहां तक जाता है। भाजपा ने पप्पू यादव से माफी की मांग की है, लेकिन पप्पू यादव की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगर यह मामला और बढ़ा तो राजनीतिक दलों के बीच तनाव और भी गहरा हो सकता है। बिहार की जनता को उम्मीद है कि नेता बयानबाजी की राजनीति छोड़कर विकास के मुद्दों पर ध्यान देंगे।
समाज पर असर
ऐसे विवादित बयानों का समाज पर भी गहरा असर पड़ता है। धर्म और जाति के नाम पर की जाने वाली राजनीति से समाज में नफरत और विभाजन बढ़ता है। आम लोग इस तरह की बयानबाजी से परेशान हैं और चाहते हैं कि नेता उनके असली मुद्दों पर बात करें। बिहार को विकास की जरूरत है, न कि विवादों की।