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सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से विदाई, जानिए 27 सालों की ऐतिहासिक यात्रा

सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से विदाई
सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से विदाई
नासा की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल की ऐतिहासिक सेवा के बाद संन्यास ले लिया है। 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने और रिकॉर्ड स्पेसवॉक करने वाली सुनीता का करियर मानव अंतरिक्ष उड़ान के भविष्य को दिशा देने वाला रहा है।
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Sunita Williams: अंतरिक्ष की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ मिशनों की सूची नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की प्रेरणा बन जाते हैं। नासा की मशहूर अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स उन्हीं नामों में से एक हैं। 27 साल की लंबी, समर्पित और ऐतिहासिक सेवा के बाद उन्होंने नासा से संन्यास ले लिया है। उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुआ, लेकिन उनकी विरासत आने वाले दशकों तक मानव अंतरिक्ष उड़ान को दिशा देती रहेगी।

सुनीता विलियम्स का करियर केवल आंकड़ों और रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अंतरिक्ष को इंसानों के लिए और अधिक समझने योग्य, सुरक्षित और संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए गए उनके लंबे समय और नेतृत्व ने भविष्य के मिशनों की नींव को मजबूत किया है।

सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष में 27 साल की ऐतिहासिक यात्रा

अंतरिक्ष में बिताए 608 दिन की कहानी

नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स ने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। यह किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताए गए कुल समय में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह उपलब्धि केवल धैर्य और शारीरिक क्षमता की नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और अनुशासन की भी मिसाल है। महीनों तक पृथ्वी से दूर रहकर काम करना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

स्पेसवॉक में बनाया नया कीर्तिमान

सुनीता विलियम्स ने अपने करियर में कुल नौ स्पेसवॉक किए। इन स्पेसवॉक की कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया सबसे अधिक स्पेसवॉक समय है। कुल मिलाकर वह इस सूची में चौथे स्थान पर हैं। अंतरिक्ष में खुले वातावरण में काम करना बेहद जोखिम भरा होता है, लेकिन सुनीता ने हर बार साहस और पेशेवर कुशलता का परिचय दिया।

अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली इंसान

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में रहते हुए मैराथन दौड़कर एक अनोखा इतिहास रचा। यह उपलब्धि बताती है कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में भी मानव शरीर को सक्रिय और फिट रखा जा सकता है। इस प्रयोग ने भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी।

2006 से शुरू हुआ अंतरिक्ष सफर

सुनीता विलियम्स ने पहली बार दिसंबर 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी से अंतरिक्ष की उड़ान भरी थी। यह उनके करियर की शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर कई ऐतिहासिक पड़ाव तय किए। इसके बाद 2012 में उन्होंने कजाखस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर बनीं। यह जिम्मेदारी मिलना उनके नेतृत्व और अनुभव का प्रमाण था।

हालिया मिशन और पृथ्वी पर वापसी

हाल ही में जून 2024 में सुनीता विलियम्स बोइंग स्टारलाइनर मिशन के तहत अंतरिक्ष गई थीं। मार्च 2025 में उनकी पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी हुई। यह मिशन तकनीकी और मानवीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा और इससे भविष्य के व्यावसायिक अंतरिक्ष अभियानों को मजबूती मिली।

नासा नेतृत्व की नजर में सुनीता विलियम्स

नासा के प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने कहा कि सुनीता विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान की अग्रणी रहीं। अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके नेतृत्व ने आने वाले मिशनों के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। उनके योगदान ने चंद्रमा के लिए आर्टेमिस मिशन और भविष्य में मंगल ग्रह की ओर बढ़ने की राह को और स्पष्ट बनाया है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर की निदेशक वनेसा वाइचे के अनुसार, सुनीता का करियर नेतृत्व, समर्पण और साहस का प्रतीक है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि विज्ञान, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। खासतौर पर युवा लड़कियों के लिए सुनीता विलियम्स एक मजबूत प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं।

संन्यास पर सुनीता की भावनाएं

अपने रिटायरमेंट पर सुनीता विलियम्स ने कहा कि अंतरिक्ष उनके लिए सबसे पसंदीदा जगह रही है। नासा में बिताया गया हर पल उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके काम से चंद्रमा और मंगल मिशनों का रास्ता और मजबूत होगा।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।