Gold Prices Rally: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने हाल ही में एक नया इतिहास रचा है। गुरुवार को एशियाई कारोबार के दौरान सोने की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 4,900 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने सख्त रुख में नरमी दिखाई, जिसके बाद सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई और सोने की तेजी थोड़ी थम गई।
वैश्विक बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड में 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 4,826.03 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पूर्वी समयानुसार सुबह 01:19 बजे (ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार 06:19 बजे) दर्ज किया गया। पिछले सत्र में सोना 4,888.1 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू चुका था। वहीं, मार्च के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4,825.39 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
ट्रंप के बयान से बदली बाजार की दिशा
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की जबरदस्त तेजी देखी गई थी। यह उछाल मुख्य रूप से ग्रीनलैंड को लेकर उत्पन्न हुए भू-राजनीतिक तनाव और यूरोपीय आयातों पर टैरिफ लगाने की धमकियों के कारण आया था। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सोने में सुरक्षित निवेश तलाशा, जिससे इस सप्ताह बुलियन मनोवैज्ञानिक स्तर 5,000 डॉलर के करीब पहुंच गया।
हालांकि, स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप के बयान के बाद स्थिति में बदलाव आया। ट्रंप ने कहा कि वह टैरिफ नहीं लगाएंगे और डेनमार्क के इस क्षेत्र पर विवाद में बल प्रयोग का विकल्प भी खारिज कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि नाटो सहयोगियों के साथ तनाव सुलझाने के लिए एक “फ्रेमवर्क” समझौता नजदीक है।
ग्रीनलैंड समझौते की महत्वपूर्णता
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह एक लंबी अवधि का समझौता है। यह अंतिम और सबसे बड़ा दीर्घकालिक समझौता है। यह सभी को एक बेहतर स्थिति में रखता है, खासकर सुरक्षा और खनिज संसाधनों के मामले में।” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुछ राहत देखी गई।
डॉलर की मजबूती का असर
सोने की कीमतों में मामूली नरमी का एक कारण अमेरिकी डॉलर में हल्की मजबूती भी रहा। यूएस डॉलर इंडेक्स में थोड़ी बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले सत्र में 0.1 प्रतिशत बढ़ा था। आमतौर पर डॉलर की मजबूती सोने की कीमतों पर नकारात्मक असर डालती है क्योंकि यह अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना महंगा बना देती है।
अन्य धातुओं में तेजी का रुख
जबकि सोने में कुछ स्थिरता आई, अधिकांश अन्य कीमती और औद्योगिक धातुओं में तेजी का रुख बना रहा। चांदी की कीमतें बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बनी रहीं।
चांदी में जबरदस्त उछाल
चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 94.03 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यह इस सप्ताह की शुरुआत में छुए गए 95.89 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा ही नीचे है। औद्योगिक उपयोग में वृद्धि, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्र में, चांदी की मांग को बढ़ा रही है।
प्लेटिनम और तांबे की स्थिति
प्लेटिनम की कीमतों में 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2,465.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क कॉपर फ्यूचर्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी देखी गई और यह 12,855.0 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। अमेरिकी कॉपर फ्यूचर्स स्थिर रहे और 5.81 डॉलर प्रति पाउंड पर कारोबार कर रहे थे।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
वर्तमान बाजार परिस्थितियों में निवेशकों को सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कंप्यूटिंग शेयर बाजार की दिशा बदल रही है। विभिन्न एआई-संचालित निवेश पोर्टफोलियो उन्नत तकनीक का उपयोग कर दर्जनों सफल शेयर पोर्टफोलियो चुन रहे हैं।
प्रौद्योगिकी शेयरों में संभावनाएं
साल की शुरुआत से अब तक, तीन में से दो वैश्विक पोर्टफोलियो अपने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें 88 प्रतिशत लाभ में हैं। टेक टाइटन्स रणनीति ने 18 महीनों में एसएंडपी 500 को दोगुना कर दिया है। इसमें सुपर माइक्रो कंप्यूटर (+185 प्रतिशत) और ऐपलोविन (+157 प्रतिशत) जैसे उल्लेखनीय विजेता शामिल हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सोने और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत जैसे देशों के लिए, जो सोने का बड़ा आयातक है, इन बदलावों का महत्वपूर्ण असर होता है।
भारतीय बाजार के लिए संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ता है। घरेलू सोने की कीमतें आयात शुल्क और रुपये की कीमत के साथ-साथ वैश्विक रुझानों पर भी निर्भर करती हैं। निवेशकों को इन बदलावों पर नजर रखने की जरूरत है।
आगे की संभावनाएं
Gold Prices Rally: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है तो सोने की कीमतें 5,000 डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती हैं। हालांकि, ट्रंप के नरम रुख और संभावित समझौतों से बाजार में कुछ स्थिरता आ सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने निवेश को विविधतापूर्ण बनाए रखें और बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखें।
चांदी और तांबे जैसी औद्योगिक धातुओं में तेजी औद्योगिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देती है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
डिस्क्लेमर:
राष्ट्र भारत पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को राष्ट्र भारत की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।