दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर एक नई उम्मीद जगी है। स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने मोदी को अपना करीबी दोस्त बताते हुए यह भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच जल्द ही एक अच्छा व्यापार समझौता होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार को लेकर बातचीत चल रही है।
ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। हालांकि पिछले कुछ समय से व्यापार के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था, लेकिन अब लगता है कि हालात सुधरने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि वे एक अच्छा समझौता करने जा रहे हैं।
दावोस में ट्रंप का बयान
विश्व आर्थिक मंच के दौरान जब अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधे सवाल पूछा गया कि क्या भारत के साथ कोई व्यापार समझौता संभव है, तो उन्होंने बेहद सकारात्मक जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके बहुत अच्छे दोस्त हैं और दोनों देशों के बीच एक बेहतरीन डील होगी। उनके इस बयान से दुनिया भर के व्यापारिक जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।
दावोस में हर साल दुनिया के बड़े नेता, उद्योगपति और अर्थशास्त्री इकट्ठा होते हैं। यहां पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और राजनीति पर चर्चा होती है। इस बार के मंच में ट्रंप की मौजूदगी और उनके भारत को लेकर सकारात्मक बयान ने खास ध्यान खींचा है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं। दोनों देश एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। हर साल अरबों डॉलर का व्यापार दोनों देशों के बीच होता है। अमेरिका भारत को तकनीक, हथियार और कई अन्य सामान बेचता है, जबकि भारत अमेरिका को दवाइयां, कपड़े, आईटी सेवाएं और अन्य उत्पाद निर्यात करता है।
हालांकि, पिछले कुछ सालों में कुछ मुद्दों पर असहमति भी रही है। अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया है कि यहां पर कुछ क्षेत्रों में व्यापार में रुकावटें हैं। वहीं, भारत का कहना है कि अमेरिका भी कई भारतीय उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाता है। इन्हीं मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही है।
मोदी-ट्रंप की दोस्ती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है और कई बड़े कार्यक्रमों में साथ भाग लिया है। अमेरिका में हुआ ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम और भारत में आयोजित ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल और आपसी सम्मान दोनों देशों के रिश्तों में एक मजबूत आधार बना है। ट्रंप ने कई बार मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की है, तो वहीं मोदी ने भी ट्रंप को एक मजबूत नेता बताया है।
व्यापार समझौते से क्या होगा फायदा
अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होता है, तो दोनों देशों को बहुत फायदा होगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और बढ़ेगा। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में और आसानी से अपने उत्पाद बेचने का मौका मिलेगा। वहीं, अमेरिकी कंपनियों को भी भारत में अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इससे नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे। भारतीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। दोनों देशों के लोगों को सस्ते दाम पर अच्छे उत्पाद मिलेंगे। तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर सकेंगे।
चुनौतियां भी हैं सामने
हालांकि, व्यापार समझौते के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों को टैक्स, आयात-निर्यात नियमों और अन्य मुद्दों पर सहमति बनानी होगी। कुछ क्षेत्रों में दोनों देशों के हित अलग-अलग हैं, जिन्हें सुलझाना होगा।
अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को और खोले और विदेशी कंपनियों के लिए नियम आसान बनाए। वहीं, भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय पेशेवरों को वीजा देने में आसानी करे और भारतीय उत्पादों पर लगने वाला टैक्स कम करे।
आगे की राह
ट्रंप के ताजा बयान से यह उम्मीद बंधी है कि दोनों देश जल्द ही अपनी बातचीत को अंतिम रूप देंगे। दोनों देशों की टीमें लगातार संपर्क में हैं और समझौते के मुद्दों पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष लचीलापन दिखाएं, तो जल्द ही एक अच्छा समझौता हो सकता है।
भारत सरकार ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख दिखाया है। विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों से नियमित बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे की जरूरतों और चिंताओं को समझते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए एक अच्छा संकेत है। दावोस में उनके द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ और व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक बयान से साफ है कि दोनों देश अपने रिश्तों को और मजबूत बनाना चाहते हैं। अगर यह समझौता होता है, तो यह दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न सिर्फ दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, बल्कि पूरे विश्व में शांति और समृद्धि का माहौल बनेगा। अब देखना यह है कि दोनों देश कब तक इस समझौते को अंतिम रूप देते हैं और दुनिया के सामने इसे पेश करते हैं।